Deal Wedding - 5 in Hindi Drama by Miss Secret books and stories PDF | सौदे की शादी - 5

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सौदे की शादी - 5

सुबह की पहली किरण Malhotra Mansion की ऊँची खिड़कियों से भीतर आई —
लेकिन उस घर के अंदर किसी के दिल में कोई रौशनी नहीं थी।

अनाया नींद से जागी तो उसे एक पल के लिए याद ही नहीं रहा कि वो कहाँ है।
कमरे में हल्की सी ठंडक थी, और उसके पास रखी साड़ी अब तक मुड़ी हुई थी।
कल की बातें उसके दिमाग में गूंजने लगीं —
आरव के ठंडे शब्द, उसकी आँखों में भरा इल्ज़ाम,
और वो तस्वीर… जिसमें किसी और के साथ मुस्कुराता वो आरव था।

वो धीरे से उठी, और बालकनी की तरफ़ बढ़ गई।
बाहर गुलाबों की क्यारी में हल्की धूप पड़ रही थी —
पर उसके अंदर अंधेरा अब भी उतना ही गहरा था।

“इतना नफ़रत क्यों है तुममें, आरव?”
उसने खुद से कहा,
“क्या मेरे होने से तुम्हें अपने ज़ख्म याद आते हैं, या तुम बस उन्हें कभी भूलना नहीं चाहते?”


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नीचे ड्रॉइंग रूम में Mrs. Malhotra अपने चाय के कप के साथ अख़बार पढ़ रही थीं।
उनकी निगाह ऊपर सीढ़ियों की तरफ़ उठी,
जैसे वो पहले से जानती हों कि अनाया अब नीचे आएगी।

“Good morning, Mrs. Malhotra,” अनाया ने धीमे से कहा।
“Bas formalities की ज़रूरत नहीं है,”
उनकी सास ने कहा, बिना नज़र उठाए।
“इस घर में रिश्ते दिल से नहीं, मजबूरी से निभाए जाते हैं।”

उनके शब्दों ने अनाया के अंदर की हिम्मत को फिर से चोट पहुंचाई।
लेकिन वो अब वही डरपोक लड़की नहीं रही थी जो कल रात थी।
वो मुस्कराई — एक हल्की, मगर मजबूत मुस्कान।
“ठीक है, फिर मैं भी मजबूरी नहीं दिखाऊंगी,” उसने कहा, और सीधे किचन की ओर चली गई।



किचन में नौकरों के बीच हल्की फुसफुसाहट थी।
“नई बहू है, पर बात करने का तरीका देखो…”
“सुना है, आरव सर इसे पसंद नहीं करते…”

अनाया ने सब सुना — मगर कुछ नहीं कहा।
वो बस चाय बना रही थी, और अपने भीतर की बेचैनी को शांत कर रही थी।

उसी वक्त, पीछे से एक भारी आवाज़ आई —
“यहाँ तुम्हें काम करने की ज़रूरत नहीं है।”

वो मुड़ी — सामने आरव खड़ा था।
साफ-सुथरी शर्ट, ठंडी निगाहें, और वही तिरस्कार भरा लहजा।

“ये मेरा घर नहीं?” अनाया ने पूछा।
“है, लेकिन इस घर में कुछ मर्यादाएँ हैं,” आरव बोला,
“Malhotra की बहुएँ नौकरों के बीच नहीं खड़ी होतीं।”

“Malhotra की बहुएँ?” उसने हल्का व्यंग्य किया,
“मतलब वो जो नाम के लिए पत्नी हैं, लेकिन हक़ सिर्फ फ्रेम में लगी पुरानी तस्वीरों को है?”

आरव की आँखों में पलभर को झटका आया,
पर उसने खुद को संभाल लिया।
“तुम मेरी ज़िंदगी की वो गलती हो, जिसे मैं मिटा नहीं सकता, लेकिन भुलाना भी नहीं चाहता,”
वो बोला, और चला गया।

अनाया ने उसकी पीठ की ओर देखा,
“और तुम वो सज़ा हो, जो मुझे हर दिन मिलती है, किसी ऐसे गुनाह के लिए जो मैंने किया ही नहीं,”
उसने फुसफुसाया।



दिन यूँ ही बीतते रहे।
घर के हर कोने में अब उनकी खामोश जंग चलने लगी थी।
न एक-दूसरे से सीधे झगड़ा,
न कोई मिठास — बस एक ठंडी लड़ाई।

एक शाम, Aarav’s Study Room से आवाज़ें आ रही थीं।
कागज़ फटने की, किसी चीज़ के गिरने की।
अनाया ने दरवाज़े पर जाकर देखा —
आरव किसी फ़ाइल को मेज़ पर पटक रहा था।

“तुम्हारे पिता का प्रोजेक्ट,” वो बुदबुदाया,
“जिसने मुझे सबके सामने गिराया…”

अनाया अंदर गई —
“तुम अब भी उस एक गलती के पीछे अटके हुए हो?”

आरव ने उसकी तरफ़ देखा —
“गलती? वो गलती नहीं थी, धोखा था!”
“और अब तुम उसी आदमी की बेटी हो, जो मेरी ज़िंदगी का सबसे बड़ा घाव है।”

“लेकिन मैं वो आदमी नहीं हूँ, आरव,”
उसने दृढ़ आवाज़ में कहा,
“तुम्हें सज़ा देनी है, तो दो… पर ये मत भूलो कि मैं तुम्हारी दुश्मन नहीं हूँ।”

वो कुछ पल चुप रहा, फिर बोला —
“दुश्मन वही होती है जो दर्द देती है, और तुम वही कर रही हो… हर बार, जब मैं तुम्हें देखता हूँ।”

अनाया का दिल धड़क उठा।
पहली बार उसके शब्दों में दर्द ज़्यादा था, नफ़रत कम।
जैसे कहीं गहराई में, अभी भी कोई जख्म ताजा था।



रात को, हवेली में सन्नाटा था।
अनाया बालकनी में खड़ी थी, आसमान की तरफ़ देखती हुई।
वो अब भी समझ नहीं पा रही थी कि उस नफ़रत के पीछे कितना टूटा हुआ प्यार छिपा है।

नीचे बगीचे में आरव खड़ा था —
फोन पर बात करते हुए, लेकिन उसकी नज़र बार-बार ऊपर की ओर जा रही थी।
अनाया के साये पर।

“क्या अब भी कुछ बाकी है हमारे बीच?”
उसने खुद से पूछा, लेकिन जवाब हवा में खो गया।


अगले दिन सुबह, अनाया को स्टोर रूम में पुरानी फाइलें ठीक करने का काम दिया गया।
वो जैसे ही पुराने बॉक्स खोलने लगी,
एक पुरानी डायरी नीचे गिर गई — Aarav Malhotra नाम की।

उसके पन्नों में दर्द लिखा था —
“Trust is like glass… once broken, even if you fix it, cracks remain.”
फिर नीचे तारीख — Two years before the wedding.

अनाया के हाथ कांप गए।
वो पढ़ती चली गई —
उसमें आरव का डर, गुस्सा, और किसी ‘Rhea’ नाम की लड़की का ज़िक्र था।
वही लड़की… तस्वीर वाली।

“तो ये सब मेरे पिता की वजह से नहीं… उस लड़की की वजह से शुरू हुआ था?”
उसने फुसफुसाया,
“तुमने नफ़रत गलत जगह निकाली, आरव…”



शाम को, जब आरव घर आया,
अनाया ने डायरी उसकी मेज़ पर रख दी।

“तुम्हें शायद याद नहीं, लेकिन सच ये है कि तुम्हारा दर्द गलत पते पर पहुँचा है,”
उसने शांत आवाज़ में कहा।
आरव ने डायरी देखी, फिर उसकी आँखों में झाँका —
“तुमने इसे पढ़ा?”

“हाँ, क्योंकि मैं वो इंसान नहीं जो सिर्फ झूठ सुनती रहे,”
उसने कहा,
“अब मुझे पता है — नफ़रत की ये दीवार किसी और ने बनाई थी,
और तुमने बस उसे संभाले रखा।”

आरव ने कोई जवाब नहीं दिया।
वो बस वहीं खड़ा रहा, जैसे किसी ने उसके अंदर की बर्फ़ को हिला दिया हो।


रात गहरी हो चुकी थी।
आरव अपनी बालकनी में खड़ा था,
और ऊपर की तरफ़ देख रहा था —
जहाँ अनाया अब भी अपने कमरे की रोशनी के पास बैठी थी।

उसके अंदर पहली बार एक हल्का सा एहसास हुआ —
शायद इस लड़की की आँखों में सच है,
शायद वो अब तक गलत इंसान से लड़ रहा था।

लेकिन ego और दर्द के बीच जो दीवार थी,
वो अब भी खड़ी थी — मज़बूत, ठंडी, और ऊँची।

उसने आँखें बंद कीं, और धीरे से कहा,
“तुम्हें समझने में शायद मुझे वक्त लगेगा, अनाया… लेकिन शायद उस वक्त तक मैं खुद को भी समझ पाऊँ।”


अनाया ने ऊपर आसमान की ओर देखा —
“अब सच्चाई सामने है,
लेकिन क्या ये सच हमारे बीच की नफ़रत को तोड़ पाएगा?”

हवा में गुलाब की खुशबू थी,
लेकिन उस रात वो खुशबू भी कुछ भारी लग रही थी —
जैसे उसमें अब भी अनकहे सवाल तैर रहे हों।


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🌹 To Be Continued…

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