मोनिका अब एकदम चुप थी , मोनिका को मन ही मन अब भी आदित्य पर ही गुस्सा आ रहा था , मोनिका मन ही मन सौचती है --
" ये सब उस दौ टके की आदित्य के वजह से हो रहा है उसकी इतनी औकात के वो मुझे ना बोले , जो मेरे पिछे पागलो की तरह पड़ा रहता था , मुझसे प्यार की भीख मांगता था , आज वो ... आज वो मुझो ना बोल रहा है । मैं उसे ऐसा सबक सिखाऊगी के वो जिंदगी भर याद रखेगा । मुझे ना बोलने की किमत उसे चुकानी पड़ेगी । वो चाहे कुछ भी करले , मैं उससे शादी करके रहूगीं । "
मोनिका वहां से अपने कमरे मे चली गई , रेखा :- अगर तुझे जरा सा भी शर्म है तो कोर्ट मे आदित्य को फंसाने के बजाय तु कोर्ट मे उस इंसान का नाम लेगी जो तेरे बच्चे का असली बाप है , तु किसी और के बच्चो को आदित्य का नाम क्यों देना चाहती हो ? तुम विकी से क्यों नही बात करती हो , अगर वो इस बच्चे को अपनाने से मना करता है तो हम कोर्ट मे जाएगें और इस बच्चे को इसको बाप का नाम दिलाएगें । पर ऐसे किसी मासुम और बेगुनाह को फंसाके नही । और ये मैं कभी होने नही दुगीं ।
मोनिका अपनी मां की बातो से परेशान होकर कहती है --
मोनिका :- पापा ... आप ही समझाओ ना मां को ! विकी अच्छा लड़का नही है , उसके कई लड़कियों के साथ .....
इतना बोलतर मोनिका रुक जाती है फिर कहती है ---
मोनिका :- पापा ... अगर मैने उससे शादी किया तो मेरा और मेरे बच्चे की दोनो का भविष्य बर्बाद हो जाएगा । पर आदित्य ऐसा नही है ।
रघुनाथ: - पर बेटा , विकी के पास तो बहुत सारा पैसा है लेकिन आदित्य के पास तो कुछ भी नही है । तो फिर तु आदित्य के साथ रहेगी कैसे ?
मोनिका :- पापा ... पैसे से बड़ा प्यार होता है , इंसान होता है ।
रघुनाथ मोनिका को तभी एक जौर का तमाचा मारता है । और कहता है --
रघुनाथ :- तुमने हम सबका नाम डुबो दिया , तुम इतना निचे कैसे गिर सकती हो । के बच्चा किसी और का और नाम कियी और का । तुम्हें अपना बेटी बोलने पर भी शर्म आने लगा है । पैसो को लिए तुमने यो सब क्या कर लिया ।
मोनिका अब एकदम चुप थी , मोनिका को मन ही मन अब भी आदित्य पर ही गुस्सा आ रहा था , मोनिका मन ही मन सौचती है --
" ये सब उस दौ टके की आदित्य के वजह से हो रहा है उसकी इतनी औकात के वो मुझे ना बोले , जो मेरे पिछे पागलो की तरह पड़ा रहता था , मुझसे प्यार की भीख मांगता था , आज वो ... आज वो मुझो ना बोल रहा है । मैं उसे ऐसा सबक सिखाऊगी के वो जिंदगी भर याद रखेगा । मुझे ना बोलने की किमत उसे चुकानी पड़ेगी । वो चाहे कुछ भी करले , मैं उससे शादी करके रहूगीं । "
इतना बोलकर मोनिका अपने कमरे मे चली गई , रेखा :- अगर तुझे जरा सा भी शर्म है तो कोर्ट मे आदित्य को फंसाने के बजाय तु कोर्ट मे उस इंसान का नाम लेगी जो तेरे बच्चे का असली बाप है , तु किसी और के बच्चो को आदित्य का नाम क्यों देना चाहती हो ? तुम विकी से क्यों नही बात करती हो , अगर वो इस बच्चे को अपनाने से मना करता है तो हम कोर्ट मे जाएगें और इस बच्चे को इसको बाप का नाम दिलाएगें । पर ऐसे किसी मासुम और बेगुनाह को फंसाके नही । और ये मैं कभी होने नही दुगीं ।
मोनिका अपनी मां की बातो से परेशान होकर कहती है --
मोनिका :- पापा ... आप ही समझाओ ना मां को ! विकी अच्छा लड़का नही है , उसके कई लड़कियों के साथ .....
इतना बोलतर मोनिका रुक जाती है फिर कहती है ---
मोनिका :- पापा ... अगर मैने उससे शादी किया तो मेरा और मेरे बच्चे की दोनो का भविष्य बर्बाद हो जाएगा । पर आदित्य ऐसा नही है ।
रघुनाथ: - पर बेटा , विकी के पास तो बहुत सारा पैसा है लेकिन आदित्य के पास तो कुछ भी नही है । तो फिर तु आदित्य के साथ रहेगी कैसे ?
मोनिका :- पापा ... पैसे से बड़ा प्यार होता है , इंसान होता है ।
रघुनाथ मोनिका को तभी एक जौर का तमाचा मारता है । और कहता है --
रघुनाथ :- तुमने हम सबका नाम डुबो दिया , तुम इतना निचे कैसे गिर सकती हो । के बच्चा किसी और का और नाम कियी और का । तुम्हें अपना बेटी बोलने पर भी शर्म आने लगा है । पैसो को लिए तुमने यो सब क्या कर लिया ।
मोनिका अब एकदम चुप थी , मोनिका को मन ही मन अब भी आदित्य पर ही गुस्सा आ रहा था , मोनिका मन ही मन सौचती है --
" ये सब उस दौ टके की आदित्य के वजह से हो रहा है उसकी इतनी औकात के वो मुझे ना बोले , जो मेरे पिछे पागलो की तरह पड़ा रहता था , मुझसे प्यार की भीख मांगता था , आज वो ... आज वो मुझो ना बोल रहा है । मैं उसे ऐसा सबक सिखाऊगी के वो जिंदगी भर याद रखेगा । मुझे ना बोलने की किमत उसे चुकानी पड़ेगी । वो चाहे कुछ भी करले , मैं उससे शादी करके रहूगीं । "
इतना सोचते हूए मोनिका वहां से अपने कमरे की और चली जाती है , मोनिका अपने कमरे में अकेली बैठी थी।
उसके गाल पर पड़े थप्पड़ का निशान अभी भी लाल था…लेकिन आँखों में आँसू नहीं… बल्कि सिर्फ गुस्सा था । वो आईने में खुद को देखती है और कहती है ---
मोनिका (धीरे, पर ज़हर भरी आवाज़ में) :- आदित्य…तुमने मुझे ठुकराया नहीं है…तुमने मुझे चुनौती दी है। और इस बार मैं तुम्हें ऐसी सबक सिखाऊगी के तुम जिंदगी भरके लिए याद रखोगे । मैं जानती हूँ के तुम मेरे पास अब भी आना चाहते हो बस मेरी मजबुरी का फायदा उठा रहे हो ? ताकी मैं तुम्हारे सामने झुकी रहूँ । मुझसे बदला ले रहे हो , ठिक है , इसका बदला मैं तुमसे जरुर लुगीं । तुम्हें तुम्हारी औकात दिखाकर रहूँगी ।
वह टेबल पर रखा फोन उठाती है…विकी का नंबर देखती है…कुछ पल सोचती है… फिर फोन काट देती है।
मोनिका :- नहीं… अब मुझे तुम्हारी जरूरत नहीं विकी। अब खेल मैं अपने तरीके से खेलूँगी।
वह अपने बैग से कुछ मेडिकल रिपोर्ट निकालती है…प्रेग्नेंसी रिपोर्ट मोनिका उन्हें देखते हुए मुस्कुराती है और कहती है --
मोनिका :- कोर्ट को सच नहीं चाहिए…उन्हें सबूत चाहिए…और सबूत… मैं बना सकती हूँ। मैं सबूत लेकर आउगीं ।
उधर आदित्य अपने दोस्तो के पास बैठा था तभी , कृतिका आदित्य से पूछती है --
कृतिका: - आदित्य .... तुमने हमे इस वक्त यहां पर क्यों बुलाया है ?
आदित्य :- हां ... वो मुझे तुम लोगो से कुछ काम था ।
रमेश :- हां तो बोल ना , क्या कहना है ?
आदित्य उन दोनो एक फाइल देता है जिसे दैखकर कृतिका कहती है ---
कृतिका: - ये क्या है ?
आदित्य :- ये ... मेरे इन दोनो मॉल का पेपर है ।
कृतिका, रमेश और ऱश्मी सभी आदित्य की और हैरानी से दैख रहा था , तभी रमेश कहता है --
रमेश :- पेपर ..? पर ये तु हमे क्यों दे रहा है ?
आदित्य :- ये दोनो मॉल , अब से तुम दोनो की ।
आदित्य के इतना कहने पर सभी चोंक जाता है तभी कृतिका कहती है --
कृतिका: - मॉल हमारी ... ये तुम क्या बोल रहे हो आदित्य ?
आदित्य :- दैखो तुम लोग मुझे गलत मत समझना , और मेरी बात ध्यान से सुनो । मैं अब यहां नही रहूँगा , मैं अब से न्युयॉर्क मे एक कंपनी खोलने का सोचा है । तो मैं वहां पर रहूँगा । तो मैने सौचा के ये दोनो मॉल को तुम दोनो से नाम कर दूँ क्योंकी तुम दोनो ने भी मेरे लिए बहुत मेहनत किया है ।
रमेश :- तु पागल हो गया है , इतनी बड़ी मॉल को , जिसे तुने अपने दम पर बनाया , तेरा सपना है ये और तु भी तो यही चाहता था के तु अपने दम से कुछ करो , और इसे ऐसे ही छोड़कर जा रहे हो ?
आदित्य :- मैं छोड़कर कहां जा रहूँ , अपने सपने को सेफ हाथो मे दे कर जा रहा हूँ ।
रमेश :- नही यार , तु इसे हमे दैखभाल के लिए दे सकता है पर मैं इसे अपने नाम पर नही करा सकता । और तुने न्यूयार्क जाने का क्यों सौचा ?
आदित्य :- मेरा अब यहां पर कुछ रहा ही नही यार , पहले मोनिका उसके बाद जानवी , अब अगर यहां पर रहा तो मुझे जानवी की याद आएगी । इसिलिए अब मैं डिवोर्स के बाद मैं यहां से चला जाउगां ।
कृतिका: - पर आदित्य , हम ये मॉल नही ले सकते , इसके लिए तुमवे 5 सालों तक बहुत मेहनत किया है , और हम इसे ऐसे नही ले सकते है ।
आदित्य दोनो को समझा कर कहता है ---
आदित्य :- जब मैं यहां पर नही रहूँगा तो मॉल भी बंद हो जाएगा और बहुत से लोगो का नौकरी चली जाएगी । इसिलिए मैं इसे तुम दोनो तो दे रहा हूँ ।
रमेश :- पर आदित्य ...
आदित्य रमेश की बात को काटते हूए कहता है --
आदित्य :- प्लिज यार ...मना मत करना ।
कृतिका: - तुम चाहे कुछ भी कहो , हम ये नही ले सकते । हम भी तुम्हारे साथ न्यूयार्क चलेगें , तुम्हारे बिना हमे भी अच्छा नही लगेगा ।
आदित्य :- तुम दोनो मेरे बात को समझो । बहुत सारे लोगो की उम्मीद है ये मॉल , काम करते है बहुत से लोग । अच्छा ठिक है , ये कंपनी मेरी ही रहेगी , पर दैखभाल तुम लोग करोगे , सारे डिसिजन तुम लोग करोगे । जो प्रॉफिट होगी उसे भेज देना ।
सभी आदित्य की बात पर सौचने लग जाता है , तभी आदित्य कहता है --
आदित्य :- प्लिज यारों ...!
आदित्य के इतना कहने पर वो लोग मान जाते है , तब आदित्य कहता है --
आदित्य :- थैंक्स यारों ... अब मुझे जाना है , कंपनी के सिलसिले मे एक मीटिंग है मेरी दिल्ली मे । अच्छा ठिक है अब मैं चलता हूँ ।
इतना बोलतर आदित्य वहां से चला जाता है ।
रास्ते मे अशोक जानवी को आदित्य के बारे मे सारी बाते बोलतर सुनाता है के वो कौन है । जानवी ये सुनकर हैरान हो जाता है के आदित्य देश के सबसे बड़े आदमी का बेटा है , जिससे जानवी गरीब घटिया , कामचोर और जानवी को लगता था के आदित्य उसके साथ सिर्फ उसको पैसो के कारण है । जानवी ये सुनकर चोंक जाती है के आदित्य ने अपने दम पर वो मॉल बनाया ।
जानवी को जब ये सब पता लगा तो जानवी कार को किनारे पर रोककर रोने लगती है और कहती है ---
जानवी :- मैने ये सब क्या कर दिया , जिसके सामने मेरी कोई हैसियत नही , कोई औकात नही मैने उसे ही लालची समझा , जिसने मेरी कंपनी को हर बार बचाया , मैने उसे ही कंपनी का लुटेरा समझा । आज मुझे एहसास हो रहा है के मैं कितनी बदनसीब हूँ , जिसने एक हिरा को खो दिया । आदित्य आज तक मेरे प्यार के लिए कितना कुछ सकता रहा , पर अब मैं उसे जरा सा भी दुख नही होने दुगीं ।
To be continue....921