TERE MERE DARMIYAAN in Hindi Love Stories by CHIRANJIT TEWARY books and stories PDF | तेरे मेरे दरमियान - 97

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तेरे मेरे दरमियान - 97

जानवी हैरानी से --

जानवी: - और वो 50 लाख.... जो तुमने मेरे रिहाई के लिए दिए थे ?

विकास :- वो पैसे मैने तुम्हें छुड़ाने के लिए नही , तुम्हें किडनेप करने के लिए दिया था । मैने तो सौचा था के तुम्हें सारी सच्चाई का पता चल जाएगा । पर उससे पहले ही तुमने आदित्य के उपर सारा दोष डाल दिया और मुझे बचा लिया । जानवी तुमने हर बार आदित्य को गलत समझा , ये मैने नही किया , और ना ही ये सब तुम्हें सोचने पर मजबुर किया । पर तुमने हर बार उसे ही गलत समझा ।

विकास से इतना सुनकर जानवी वही जमीन पर बैठ जाती है , और रोने लगती है । यही वो पल है जहाँ उसका अहंकार टूटता है और प्यार की सच्चाई समझ आती है। जानवी वहीं ज़मीन पर बैठ जाती है। 

उसके हाथ काँप रहे थे…साँसें टूट-टूट कर निकल रही थीं…
वह अपने बाल पकड़ लेती है… जैसे खुद को सज़ा दे रही हो।

जानवी ( रोती हूई ) :- मैंने… मैंनें क्या कर दिया…? जिस इंसान ने मुझे हर बार बचाया…मैं उसी को दोष देती रही…मैंने उसे अपमानित किया…उससे नफरत की…उसकी आँखों में देखकर उसे झूठा कहा…"

उसकी आवाज़ और भारी हो जाती है। जानवी कुछ दैर तक रोती रही फिर कहती है --

जानवी :- और वो… हर बार चुप रहा…क्यों…?
क्यों नहीं बताया उसने…? क्यों नहीं रोका मुझे…? पापा ... उसने मेरे साथ ऐसा क्यों किया ? वो ... वो ... मुझे बता सकता था ना के वही है जिसने मेरी इतनी मदद की है ।
अशोक जानवी के पास जाता है और जानवी से अशोक धीमे स्वर में कहता है —

अशोक :- "क्योंकि वो तुम्हें खोना नहीं चाहता था बेटा…वो बार - बार तो तुमसे कहता रहा के इन सब मे वो नही है पर तुमने उसकी कहा मानी , जब तुम उसकी कोई भी बात मानने को तैयार नही थी तो वो तुम्हारे सामने खुद को सही साबित करके तुम्हारा विश्वास नहीं तोड़ना चाहता था…वो चाहता था… तुम खुद सच तक पहुँचो।

अशोक से ये सब सुनकर जानवी को पछतावा होने लगा था , जानवी की आँखें फैल जाती हैं। उसे आदित्य की वो चुप्पी याद आती है…वो नजरें…वो अधूरी बातें…वो दर्द जो उसने कभी दिखाया ही नहीं… ये सब सोच - सोच कर जानवी का बुरा हाल था ।

जानवी (फूटकर रोते हुए) :- मैंने… उसे कितना अकेला कर दिया…वो लड़ता रहा… मेरे लिए…और मैं… मैं उसके खिलाफ खड़ी रही…

विकास सिर झुकाकर कहता है —

विकास :- जानवी… उस रात…जब तुम नशे में थी…तुम आदित्य के लिए खाना लेकर आई थी…वो पल… उसने मुझे बताया…वो कह रहा था —जिसे मैं बचा रहा हूँ… वो मुझे ही गलत समझती है…शायद यही मेरी किस्मत है।

इतना सब सुनकर जानवी जैसे पत्थर हो जाती है।

जानवी (टूटी आवाज़ में) :- नहीं… नहीं… ऐसा मत कहो…मैंने… मैंनें उसके साथ बहुत गलत किया…मुझे… मुझे उसके पास जाना होगा…
मुझे उससे माफी माँगनी होगी…

इतना बोलकर जानवी वहां से उठने की कोशिश करती है…पर उसके कदम लड़खड़ा जाते हैं तभी अशोक उसे संभाल लेते हैं।

अशोक :- माफी माँगने जाओगी…पर याद रखना बेटा…जिसका दिल तुमने तोड़ा है…वो अब पहले वाला आदित्य नहीं होगा।

जानवी की आँखों में डर उतर आता है।

जानवी :- वो… मुझसे बात करेगा ना पापा…? वो मुझे… माफ कर देगा ना…?

अशोक जानवी के बातो का कोई जवाब नहीं देते। कमरे में फिर वही सन्नाटा छा जाता है।

जानवी दोबारा अपने पापा से पूछती है --

जानवी: - पापा ... आप चुप क्यों हो , बताओ ना मैं .... मैं ऐसा क्या करु के आदित्य मुझे माफ कर दे ?

अशोक शांत आवाज मे धिरे से जानवी से कहता है --

अशोक :- बेटा तुमने उसके साथ जो कुछ भी किया है , उससे तो तुम्हें माफी मिलना बहुत मुश्किल है ।

अशोक से इतना सुनकर जानवी डर जाती है और चुप होकर अपने पापा अशोक की और दैखने लगती है , तब अशोक जानवी से फिर कहता है --

अशोक :- पर बेटा .. तुम्हें आदित्य से माफी जरुर मांगनी चाहिए , क्योंकी मुझे यकीन है के आदित्य तुम्हें माफ कर देगा । उसका दिल बहुत बड़ा है बेटी । और मुझे लगता है के वो अब भी तुमसे प्यार करता है ।

अशोक से इतना सुनकर जानवी को थोड़ी राहत महसूस हूआ । जानवी के चेहरे पर आशा की एक हल्की मुस्कान आ गई । अब जानवी वहां से आदित्य के पास जाने के लिए अपना कदम बड़ाती है के तभी विकास कहता है --

विकास :- जानवी रुको ...

विकास की बात पर जानवी रुक जाती है , विकास जानवी के पास जाता है और कहता है --

विकास :- जानवी .. मैं भी तुम्हारे साथ चलूगां , मुझे भी अपने पापो की माफी उससे मांगनी है ।

विकास के दिल मे अब सच्चाई थी पर जानवी के सामने उसने अपना भरोसा खो दिया था । इसिलिए जानवी विकस से बिना कुछ कहे ही वहां से चला जाती है ।

उधर रेखा अपनी बेटी मोनिका के लिए परेशान थी , वो घर पर मोनिका का इंतेजार कर रही थी , तभी वहां पर रघुनाथ आता है और रेखा को परेशान दैखकर रघुनाथ रेखा से कहता है --

रघुनाथ: - क्या बात है रेखा ... तुम परेशान लग रही हो ?

रघुनाथ के इतना बोलने पर रेखा गुस्से से कहती है --

रेखा :- परेशान होऊं ना तो क्या होऊ । आपको तो किसी बात का कोई टेंशन तो है नही ? 

रघुनाथ: - मैने क्या किया ?

रेखा :- सब आपका किया कराया है , आज आपके ही वजह से हमने आदित्य जैसे लड़के को खो दिया , और आप और आपकी बेटी आदित्य को रोकने के बजाय उसे भला बुरा कहने लगे , और आज बात कहां से कहां तक पहूँच गई , पैसे वासा दामाद चाहिए था ना आप दोनो को , अब दैखो कैसे पैसे देकर भैजा है उस विकी ने हमारी बेटी को 10 लाख देकर भैजा है । और साथ मे एक बच्चा भी । 

रघुनाथ जानता था के ये सब उसके वजह से ही हूआ था क्योंकि , उसने पैसो की लालच मे आकर अपनी बेटी को विकी के लिए और उसकसाया था । रघुनाथ चुप होतक वही पर खड़ा था । तभी वहां पर मोनिका आ जाती है , मोनिका अपने मां पापा को एक साथ दैखकर यंझ गई थी के यहां पर उसी के बापे मे बात हो रही थी , मोनिका उन दोनो से बिना कुछ बोले अंदर जाने की कोशिश करती है पर तभी रेखा मोनिका को रोक कर कहती है --

रेखा :- कहां से आ रही हो ?

मोनिका अपनी मां की बात पर रुक जाती है और कहती है --

मोनिका :- मैं ... वो वकील के पास गई थी ।

रेखा की भोहें वकिल का नाम सुनकर उपर हो जाता है और रेखा गुस्सा हो जाती है और पूछती है --

रेखा :- वकिल ..? वकिल किस लिए ?

मोनिका :- वो सब बाद मे बताउगीं ।

इतना बोलतर मोनिका वहां से जाने लगती है तब रेखा उसे रोककर फिर से पुछती है --

रेखा :- मैने जो पुछा उसका जवाब दिये बिना ही जा रही हो ?

मोनिका :- मां वो ... DNA रिपोर्ट को गलत साबित करने के लिए वकिल से मिला था । ताकी आदित्य कोर्ट मे झुटा साबित हो जाए और जानवी से उसका तलाक हो जाए , फिर हम और आदित्य फिर से एक हो जाएगें । और इस बच्चे को भी उसके बाप का नाम मिल जाएगा ।

मोनिका की ऐसी बातों को सुनकर रेखा मोनिका का सामने जाती है और उसे एक जोरका थप्पड़ मारती है । मोनिका हैरानी से अपने मां की और दैख रही थी और फिर मोनिका कहती है --

मोनिका :- मां ... तुमने मुझे थप्पड़ मारा ?

रेखा :- हां मारा ... और मुझे बहुत पहले ही करना चाहिए था । अगर मैं ये पहले किया होता तो आज तेरी ऐसी हालत ना दैखनी पड़ती । तुझे शर्म नही आती एक भले इंसान को फंसाने की साजिस रच रही हो ? जब उसने तुमसे बार - बार कहा के मुझे मत छोड़ो तब तो तुम बड़े सिना ठोक के कहा था के तुम कभी उसके जैसे गरीब के पास लोट कर या दैखना पंसद नही करोगी । 

मोनिता :- मां .. उस समय Situation कुछ और था । और अब कुछ और है । ये सब मैं अपने लिए नही कर रही हूँ , मैं अपने बच्चे के लिए कर रही हूँ ।

रेखा :- अगर तुझे जरा सा भी शर्म है तो कोर्ट मे आदित्य को फंसाने के बजाय तु कोर्ट मे उस इंसान का नाम लेगी जो तेरे बच्चे का असली बाप है , तु किसी और के बच्चो को आदित्य का नाम क्यों देना चाहती हो ? तुम विकी से क्यों नही बात करती हो , अगर वो इस बच्चे को अपनाने से मना करता है तो हम कोर्ट मे जाएगें और इस बच्चे को इसको बाप का नाम दिलाएगें । पर ऐसे किसी मासुम और बेगुनाह को फंसाके नही । और ये मैं कभी होने नही दुगीं ।

मोनिका अपनी मां की बातो से परेशान होकर कहती है --

मोनिका :- पापा ... आप ही समझाओ ना मां को ! विकी अच्छा लड़का नही है , उसके कई लड़कियों के साथ .....

इतना बोलतर मोनिका रुक जाती है फिर कहती है ---

मोनिका :- पापा ... अगर मैने उससे शादी किया तो मेरा और मेरे बच्चे की दोनो का भविष्य बर्बाद हो जाएगा । पर आदित्य ऐसा नही है ।

रघुनाथ: - पर बेटा , विकी के पास तो बहुत सारा पैसा है लेकिन आदित्य के पास तो कुछ भी नही है । तो फिर तु आदित्य के साथ रहेगी कैसे ?

मोनिका :- पापा ... पैसे से बड़ा प्यार होता है , इंसान होता है ।

रघुनाथ मोनिका को तभी एक जौर का तमाचा मारता है । और कहता है --

रघुनाथ :- तुमने हम सबका नाम डुबो दिया , तुम इतना निचे कैसे गिर सकती हो । के बच्चा किसी और का और नाम कियी और का । तुम्हें अपना बेटी बोलने पर भी शर्म आने लगा है । पैसो को लिए तुमने यो सब क्या कर लिया ।

मोनिका अब एकदम चुप थी , मोनिका को मन ही मन अब भी आदित्य पर ही गुस्सा आ रहा था , मोनिका मन ही मन सौचती है --
" ये सब उस दौ टके की आदित्य के वजह से हो रहा है उसकी इतनी औकात के वो मुझे ना बोले , जो मेरे पिछे पागलो की तरह पड़ा रहता था , मुझसे प्यार की भीख मांगता था , आज वो ... आज वो मुझो ना बोल रहा है । मैं उसे ऐसा सबक सिखाऊगी के वो जिंदगी भर याद रखेगा । मुझे ना बोलने की किमत उसे चुकानी पड़ेगी । वो चाहे कुछ भी करले , मैं उससे शादी करके रहूगी !


To be continue.....