सैम झुका, और बर्फ के एक हिस्से से तापमान मापाः "-183°C..."
"हवा में नमी नहीं है... बस मिथेन की जकड़न और 95% नाइट्रोजन..."
उसी पल, उसकी हेलमेट की स्क्रीन पर कंपन हुआ एक धीमी तरंग... जैसे किसी ने... उत्तर दिया हो।
टिक-टिक...
उसकी स्क्रीन पर एक code line उभरी >>> DRA-11: Conscious Ping | Source Unknown | Location: Below Surface
सैम ने चौंक कर कहा, "Guys... ये क्या था?" "मेरी हेलमेट पर... कुछ... प्रतिक्रिया मिली है।" निशांत सतर्क हो गया "क्या कोई झूठा सिग्नल हो सकता है?"
"नहीं... ये सिग्नल नहीं था... ये सुन रहा था,"
सैम की आंखें झील पर टिक गईं।
तभी सैम की नज़र पानी की सतह पर गई हल्की सी हलचल... जैसे कुछ भीतर से सांस ले रहा हो।
"जीवन नहीं... पर चेतना... कोई मौन बुद्धि..." आद्विका की आवाज़ कंपकंपा उठी। "जैसे ये ग्रह खुद जाग रहा हो..."
उधर निशांत और आद्विका भी इधर-उधर खोजबीन कर रहे थे, शायद उस पुराने यान की तलाश में जिससे वो अनजाना सिग्नल आ रहा था।
सैम ने इंटरकॉम पर सूचना दी ... लगता है "यहां जीवन संभव नहीं है..." "क्यों?" निशांत रुक कर पूछता है।
सैम की आवाज़ में थोड़ी गंभीरता थी : "टाइटन इतना ठंडा है कि यहाँ का पानी भी पत्थर जैसा ठोस हो चुका है।
तरल जल यहाँ कल्पना है... और हमारे जैसे जीवन के लिए पानी, जीवनरेखा है।"
"ऑक्सीजन नाम की कोई चीज़ यहां नहीं है - सिर्फ नाइट्रोजन का घना जाल, इतना घना कि... सूरज की रोशनी भी यहाँ धरती से हजार गुना कम पहुंचती है।" "हम जिस हवा में सांस लेते हैं, वो यहाँ ज़हर है। और जहां साँस न हो... वहाँ जीवन की कल्पना... सिर्फ एक व्यर्थ शोर लगती है।"
आद्विका रुक कर चारों ओर देखती है
चारों ओर बर्फ, धुंध, जमी हुई झीलें... और एक ऐसा मौन... जो दिल की धड़कन को भी सुनने लगे।
सैम की आवाज़ दोबारा आई "यहाँ की गुरुत्वाकर्षण शक्ति धरती के केवल 1/7 के बराबर है। जो भी भूगर्भीय हलचल होती है, वो हमारी कल्पना से अलग है। ** यह धरती नहीं है आद्विका... यह कुछ और है..."
सबके भीरत कुछ न कुछ चल रहा था। सवालों का एक सेलाव ।
टाइटन, शनि के विशाल चुंबकीय क्षेत्र के घेरे में है। और जब शनि सूर्य की सीधी रेखा में आता... तो टाइटन पर गिरती है वो घातक सोलर रेडिएशन बर्ट्स, जिनसे कोई भी जैविक कोशिका ज़िंदा नहीं बच सकती।
यहां न ध्वनि है... न हवा... बस मौन का दबाव है।
"यहां हर धड़कन, अंतरिक्ष की चुप्पी में खो जाती है ।
आद्विका ने अपनी सांस को महसूस किया... और तभी... उसकी हेलमेट में एक झुनझुनी सी लहर दौड़ गई।
"मैंने... अभी... एक कम्पन महसूस किया है..."
झील के पास की ठंडी, धुंधली ज़मीन... आद्विका कुछ ढूंढ रही थी।
सैम थोड़ी दूरी से चिल्लाता हुए कहा: "आद्विका! ज़रा संभल कर चलो... ये झील गहरी भी हो सकती है।"
उसने कहा... "हां सैम, मैं देख रही हूं... लेकिन यहाँ कुछ है।"
आद्विका झील के थोड़ी अंदर गई, जहां उसने बर्फ में धंसा एक टूटा सा यांत्रिक पुर्जा उठाया।
आद्विका आश्चर्य से: "यह देखो... किसी मशीन का हिस्सा लग रहा है।" पता नहीं ये कब से यहां है इसलिए पूरी तरह नष्ट हो गया।
उसने वॉकी-टॉकी पर निशांत को बुलाया...
"निशांत! सैम ! जल्दी यहाँ आओ!"
इतनी बात सुनकर दोनों भागते हुए आदविका के पास आए।
निशांत पुर्जा देखकर बोला: "शायद ये तो उसी मिशन यान का हिस्सा है जिससे हमें सिग्नल मिल रहा था... लेकिन ये इस हाल में कैसे?"
सैम स्क्रीन चेक करते हुए: "सिग्नल यहीं से मिल रहा था। लेकिन यान टूट कैसे गया?"
आद्विका सोचते हुए: "शायद... शनि के चुंबकीय तूफानों से।
यहां का रेडिएशन मशीनों को लंबे समय तक झेलने नहीं देता।"
अचानक से बूंदें गिरने लगी – ठंडी मिथेन की बूंदें। मौसम बिगड़ने लगा था।
सैम तेज आवाज़ में चिल्लाते हुए बोला: "मिथेन की बारिश ! जल्दी यहां से निकलते हैं, आद्विका!
ये हमारे लिए ख़तरनाक हो सकती है!"
उसने निशांत को देखा जो अभी भी यान के पुर्जों को देख रहा था खोया-सा,
आ ने नरम स्वर में कहा: "निशांत... चलो, यहां से निकलना होगा। मौसम तेजी से बदल रहा है।"
निशांत एक पल ठहरता है, टाइटन की सतह को देखता है
निशांत जैसे जड़ हो गया हो, टाइटन की गहराई में खोया निशांत धीरे से: "ये... आखिरी उम्मीद थी..."
धरती को बचाने की।"
तभी आद्विका ने उसके कंधे पर हाथ रखा: "हमारी उम्मीद अभी खत्म नहीं हुए हैं। जब एक दरवाजा बंद होता है तब दूसरा दरवाज़ा खुलता है।
जैसे Zyvan 3 अभी बाकी है।
उधर सैम उनका इतंजार कर रहा था
शायद... वहां हमें वो मिले जिसकी हमें ज़रूरत है।"
सैम दूर से चिल्लाता है: "जल्दी आओ! मैं यान तैयार कर चुका हूं!"
आद्विका निशांत का हाथ पकड़ती हुई यान की ओर दौड़ी।
मौसम धीरे धीरे और खराब हो रहा था।
वे तीनों यान में बैठ गए।।
कुछ समय बाद वे मॉरिश के पास पहुंचे।
मॉरिश जो उनका इंतज़ार कर रहा था।
मॉरिश ने चिंतित होकर पूछा: "तुम सब ठीक तो हो?
क्या मिला?"
वे सब थोड़े उदास थे: "कुछ नहीं... सिर्फ एक टूटा हुआ पुर्जा।"
मॉरिश हैरानी से: "मतलब... सिग्नल बस उसी से आ रहा था?"
सैम धीरे से: "हां... और वहां जीवन जैसा कुछ नहीं था... सिवाय बर्फ,
धुंध और जहर के।"
सबका चेहरा उदास था,, क्योंकि करोड़ों लोगों की वे आख़िरी उम्मीद थे।
निशांत लॉगबुक में मिशन रिपोर्ट भर रहा था।
स्पेसक्राफ्ट के अंदर हलकी नीली रोशनी थी। आद्विका खिड़की के पास बैठीथी, बाहर तारे और गहरी शांति फैली हुई थी।
निशांत धीरे से उसके पास आया।
: "इतनी चुप क्यों हो आद्विका...?
सब ठीक है?"
आद्विका ने उसकी ओर देखा। आंखें हल्की भीगी हुई थी।
आद्विका धीमे स्वर में बोली: "बस... अपने परिवार की याद आ रही है निशांत।
इतने साल हो गए... न कोई संदेश, न कोई आवाज़। मां... हर सुबह मेरा इंतजार करती होगी।"
उसकी आवाज भरी थी।
निशांत कुछ पल खामोश रहता है, फिर उसके पास बैठ गया।
: "मैं समझ सकता हूँ... हम सबका परिवार है वहां जो हमारा इंतजार कर रहा है।
लेकिन अगर हम यहां टूटे, तो सब कुछ हार जाएगा।
और तुमने ही तो कहा था – एक मौका zyvan 3... तो अब डर क्यों?"
आद्विका गहरी सांस लेते हुए बोली: "डर नहीं है... बस मन भारी है।
लेकिन तुम ठीक कह रहे हो... शायद ये मिशन एक इतिहास बने।"
निशांत हौसले से: "इतिहास? नहीं... भविष्य।
तुम नहीं चाहती कि आने वाले वक़्त में लोग कहें आद्विका ने उस धरती को बचाने की कोशिश की?"
ये सुनकर अद्विका थोड़ी मुस्कुरा दी, उसकी आंखों में थोड़ा हौसला लौटा।
तभी निशांत ने मॉरिश को इंटरकॉम से कॉल किया । निशांतः "मॉरिश, सुनो... ईंधन कितना है? क्या हम zyvan 3 तक जा सकते हैं?"
मॉरिश: "हां... पहुंच तो सकते हैं। लेकिन वापसी का संतुलन देखना होगा। पर क्या सच में वहां जाना चाहिए।
बाकि सब ने कहा शायद हां, एक कोशिश ओर करते हैं।
वैसे हमें ज़्यादा समय बर्बाद नहीं करना चाहिए।"
सैम, मॉरिश के बगल में बैठा था स्क्रीन पर निगाहें गढ़ाए।
तो चलो तैयारी करते है एक जादुई दुनियां की!!
सैम उत्साहित होकर: "तो फिर देर किस बात की?
जब इतने साल इस मिशन को दिए हैं... तो उस सिग्नल को छोड़ना क्यों?"
निशांतः "बिलकुल सही... चलो, एक और जीवन की तलाश में!"
सब मुस्कुराते हैं, पहली बार राहत और हौसले से भरी मुस्कान। आद्विका खिड़की के पास से उठी।
अद्विकाः "हम तैयार हैं।" Scene Transition: ऑटोमोड और नया सफर,
यान अब ऑटोमोड में जा चुका था। खिड़की से zyvan 3 की दिशा में एक faint लालिमा दिख रही थी।
चारों अपने-अपने चैंबर में चले गए।
5 महीने बाद...
मॉरिश सबको मॉर्निंग कॉल देता है। अद्विका, सैम, निशांत कंट्रोल डेक पर एक साथ बैठे थे।
मॉरिश स्क्रीन पर देखते हुए बोला: "हम zyvan 3 से केवल कुछ लाख किलोमीटर दूर हैं... सिग्नल अब साफ हो रहा है।"
थोड़ा डर और थोड़ी जिज्ञासा से भरा एक अंजान सफर...
सैम हौले से: "हम पहुँचने ही वाले हैं..."
आद्विका नीचे डायरी में कुछ लिख रही थी: "एक और सपना... एक और सवाल... और शायद अब एक जवाब भी।"
स्पेसक्राफ्ट ने धीरे-धीरे zyvan 3 की कक्षा में प्रवेश किया।
सभी मिशन सदस्य खिड़की से बाहर देख रहे थे।
आद्विका आश्चर्य से: "निशांत... देखो... ये रंग... हरा... ये तो धरती जैसा लगता है!"
ये वातावरण तो जाना पहचाना महसूस हो रहा है।
और सदस्य ने भी हामी में सर हिलाया।
Zyvan 3 की सतह पर दूर-दूर तक फैली हरियाली से भरा दृश्य, झीलों की नीली चमक, और सूरज की रौशनी जैसी गरमाहट।
एक शांत लेकिन जीवन्त ग्रह।
सैम थोड़ा सतर्क स्वर में: "इतना भी खुश मत हो आद्विका... याद है न, टाइटन पर भी हमें उम्मीद थी। और देखो क्या निकला।
Next part...