Ek aur jivan - 4 in Hindi Science-Fiction by Neha kariyaal books and stories PDF | एक ओर जीवन - 4

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एक ओर जीवन - 4

सैम, मॉरिश... इस सिग्नल को तुरंत ट्रैक करो।" "ये कोई इको नहीं है... ये कोई पुकार है।"
कुछ ही देर बाद... सैम ने अलर्ट होते हुए बताया "सिग्नल बृहस्पति ग्रह के पास किसी अजनबी ग्रेविटेशनल फोल्ड से आ रहा है..." ये सुनकर - सैम की आँखें चौड़ी हो गई। 
उन्हों पता लगाया कि... 
"वहां चुंबकीय संकुचन इतना तीव्र है कि... शायद... वहां एक wormhole मौजूद हो सकता है!"

Wormhole... ये शब्द आद्विका के लिए कुछ नया था। वह बेचैनी से निशांत की ओर देखती है, जैसे कोई बच्चा पहली बार गुरुत्वाकर्षण समझना चाहता हो। 

"निशांत, ये wormhole क्या होता है?" – उसने धीरे से पूछा। निशांत मुस्कराता है, जैसे किसी रहस्य को आसान शब्दों में समझाना चाहता रहा हो। "देखो आद्विका... wormhole मतलब... एक ऐसा रास्ता जो समय और दूरी को मोड़ देता है।
जैसे अभी हमें टाइटन पर पहुँचने में कई साल और लगेंगे... लेकिन अगर हम इस द्वार से गुजरते हैं, तो शायद ये दूरी कुछ महीनों की, या कुछ हफ्तों, घंटों की रह जाए।"
आद्विका की आँखें चमक उठती हैं,
"जैसे कोई शॉर्टकट रास्ता?"

निशांत: "बिल्कुल, शॉर्टकट... लेकिन ये रास्ता तुम्हें दिखता नहीं ये ब्रह्मांड की तहों में छिपा होता है।" 

और इसलिए बहुत कम लोगों को इसकी जानकारी होती है। 

अब टीम के सामने एक कठिन निर्णय थाः क्या वो इस अज्ञात द्वार से गुजरें... जिसका रास्ता अनजान था? या वही लंबा, लेकिन सुरक्षित रास्ता अपनाएँ जो उन्हें शनि की सतह तक ले जाएगा? 

कक्ष में एक खामोशी थी। पर अब सवाल ये नहीं था कि क्या वहां जीवन है, बल्कि सवाल ये था क्या हम उस 'द्वार' से होकर एक और जीवन तक पहुँच सकते हैं?

मॉरिश कंप्यूटर स्क्रीन के सामने बैठा wormhole के gravitational pull का गहन विश्लेषण कर रहा था। "ये उतना स्थिर नहीं है जितना हम सोच रहे थे..." - उसने माथे पर शिकन डालते हुए कहा। 
"लेकिन... ये समय और दूरी दोनों को संकुचित कर सकता है।" 
दूसरी ओर, सैम टेलीमेट्री डेटा को खंगाल रहा था। तभी अचानक... "Voice Log detected: Prof. William - Priority Alpha (वॉयस संदेश)" 

सभी चुप हो गए। सामने स्क्रीन पर प्रोफेसर विलियम का चेहरा उभरा, 
उनकी आवाज़ कमजोर लेकिन स्पष्ट थी: "यदि कभी तुम्हें ये सिग्नल मिले... तो समझ जाना कि वह 'द्वार' सक्रिय है। उसके पार... कुछ है। शायद जीवन। या फिर... वो मिशन जो हमने वर्षों पहले खो दिया था।
ये अंतिम अवसर हो सकता है... तुम्हारे लिए भी और मानवता के लिए भी।" वॉयस संदेश समाप्त हो गया।

कमरे में एक पल को सन्नाटा छा गया। सब एक दूसरे की ओर देख रहे थे जैसे हर कोई निर्णय के मुहाने पर खड़ा हो।
आद्विका ने आगे बढ़कर कहा: "हमें उस wormhole से गुजरना चाहिए। हमारे पास समय भी कम है और ईंधन भी... यही रास्ता हमें जीवन के करीब ले जा सकता है और शायद मौत के भी..!! 
निशांत ने उसकी ओर देखा, उसकी आँखों में दृढ़ निश्चय था। "मैं सहमत हूँ... अगर हम इसे पार करते हैं तो शनि के टाइटन और शायद Zyvan-3 तक भी पहुँच सकते हैं।" 
मॉरिश अब भी चिंतित था। 
"पर ये रास्ता स्थिर नहीं है...
इसका gravitational collapse कभी भी हमारा यान नष्ट कर सकता है।" 

निशांत गंभीर स्वर में बोला : "पर अगर हमने ये जोखिम नहीं उठाया... तो शायद हम पृथ्वी को भी न बचा पाएं। 
वैसे भी ये ब्राह्मण एक गहराई है यहां कब क्या हो किसी को नहीं पता। 
और तब न समय बचेगा, न ईंधन... और न उम्मीद।" 
एक पल की चुप्पी के बाद, सभी ने हामी में सिर हिलाया।

अब प्रश्न थाः "मॉरिश, हमें wormhole तक पहुंचने में कितना समय लगेगा?"

मॉरिश सामने स्कैनिंग पैनल पर देख रहा था, उसकी उंगलियाँ धीरे-धीरे अलर्ट डेटा पर रुकती हैं।
"लगभग 36 घंटे में हम इवेंट हॉराइजन के पास होंगे," - उसने कहा। 
निशांत राहत की साँस लेने ही वाला था
कि मॉरिश आगे बोल पड़ाः "लेकिन एक परेशानी है।" निशांत चौकन्ना हो गया "क्या?" 
मॉरिश ने आंखों में गहरी चिंता के साथ बताया: "यह wormhole पूरी तरह स्थिर नहीं है। 
यह हर 59 घंटे में सिर्फ 30 मिनट के लिए सक्रिय होता है। और उस दौरान हमें कम से कम 40,000 किमी/घंटा की गति से प्रवेश करना होगा। 
वरना... यान उसके ग्रेविटेशनल कोलैप्स में फंसकर हमेशा के लिए खो जाएगा।"

ये सुनने के बाद सैम का चेहरा सफेद पड़ गया, आद्विका की आंखों में थोड़ी घबराहट थी। निशांत कुछ पल शांत रहा, 
फिर सीधा मॉरिश की ओर देखाः "तैयार हो पायलट?" मॉरिश ने सिर हिलाया। 

"ऑटो बर्न सीक्वेंस प्रोग्राम कर दूँ?" 
"हाँ।" – निशांत ने कहा।
फिर वह आद्विका और सैम की ओर मुड़ाः "सब कुछ बदलने वाला है। तैयार रहो।" 

आद्विका अपने कैप्सूल की ओर गई।  वह थोड़ी देर चुप चाप बैठी रही, फिर उसने अपनी डायरी निकाली  - वही नीली चमड़े की डायरी जो माँ ने दी थी।
उसके हाथ काँप रहे थे, लेकिन कलम मजबूती से चल रही थी। 
डायरी में लिखाः "वक्त और गुरुत्व हमें उस ओर खींच रहे हैं जहाँ शायद कोई नया सवेरा है... या फिर एक शून्य। लेकिन मैं डर नहीं रही। क्योंकि मैं जानती हूँ - मैं जा रही हूँ... अपनी धरती को बचाने।" दृश्य समाप्त होता है

कंट्रोल पैनल पर Mission Log: WH-Delta Entry Protocol Initiated चमक रहा है।

धीरे-धीरे wormhole उनका सामना कर रहा था। बाहर का दृश्य जैसे खुद ब्रह्मांड की आंखें सिकुड़ कर एक बिंदु में समा रही हों। वह बिंदु – घना, अंधकारपूर्ण, और कंपन से भरा जैसे समय और गुरुत्वाकर्षण दोनों एक ही लय में धड़क रहे हों। 

आद्विका की हथेली पसीने से भीग रही थी। उसने अपनी आंखें बंद कीं। "मैं क्यों आई थी? माँ... पापा... ये सब सिर्फ एक सपना था या मेरा फ़र्ज़?" फिर उसने आंखें खोलीं। उनमें अब डर नहीं, संकल्प था। 

मॉरिश का आदेश गूंजाः "सब अपनी सीट पर बैठो, सुरक्षा लॉक लगा लो। हम कुछ ही मिनटों में wormhole में प्रवेश करने वाले हैं।" सब ने अपनी सीट बेल्ट कस ली। 
यान कंपित हो उठा, जैसे कोई उसे किसी अदृश्य रस्सी से खींच रहा हो।
निशांत ने आवाज़ दी: "कोई कुछ नहीं छुएगा। सब सिस्टम ऑटो मोड में हैं। बस स्थिर रहो!" वातावरण में कंपन था, दीवारें झनझना रही थीं, कांच के पार सिर्फ काली गहराई थी जैसे ब्रह्मांड अपनी सांस रोक कर उन्हें निगलने को तैयार हो। 
अद्विका ने सैम की ओर देखा, उसने धीमे से कहा
"पता नहीं आगे क्या होगा...
" Wormhole के भीतर सब कुछ धुंधला, उलझा हुआ था। 
समय जैसे पिघल रहा था। स्वरूप बदल रहे थे यान की दीवारें खिंच रही थीं, आवाजें धीमी होकर गूंजने लगी थीं, जैसे कोई नदी समय के बहाव में डूब रही हो। कुछ घंटों का समय बीत गया। पर यान अपनी दिशा में बढ़ता रहा।

और फिर... एक उजाले की झलक, एक कंपन, फिर सामने शनि ग्रह का चमकता नारंगी आकाश। 
"हम बाहर आ गए..." - मॉरिश ने कहा। यान अब शनि के कक्षा में प्रवेश कर चुका है।

आद्विका अभी भी उस कंपन को महसूस कर रही थी।

 मॉरिश के बोलने पर जब उन्होंने सामने देखा तो चारों ओर एक घना धुआं सा अंधकार था। 
मद्धम नारंगी रोशनी उस अंधकार में एक रहस्यमयी पर्दा खींच रही थी। 
सामने टिका था एक भूरा, नारंगी, गोल ग्रह टाइटन। "हम... पहुँच गए..." निशांत ने धीमे से कहा- जैसे कोई सपना आँखों के सामने आकर ठहर गया हो। 

उन सबके चेहरे पर थकान के नीचे छिपी एक मुस्कान थी। वर्षों की यात्रा, ईंधन की चिंता, और असमंजस अब एक उम्मीद बन चुकी थी। निशांत ने तुरंत निर्णय लियाः "हमें टाइटन की सतह पर उतरना होगा।
लेकिन सिर्फ तीन लोग जाएंगे मैं, सैम और अद्विका। मॉरिश यान में रहेगा बैकअप कमांड के साथ। अगर कुछ भी गड़बड़ हुई - हमें तुरंत संपर्क करना होगा।"

पूरी तरह तैयार होने के बाद... 
स्पेस शटल का एक भाग अलग किया गया। छोटा, लेकिन मजबूत । मॉरिश वही उनका इतंजार कर रहा था। 
जैसे जैसे टाइटन की सतह पास आती जा रही थी। नीचे फैली थी - एक विशाल बर्फीली भूमि, जिस पर मिथेन की झीलें चुपचाप चमक रही थीं जैसे कोई दर्पण ठंड में थरथरा रहा हो। बादलों के मोटे टुकड़े, जमीन को छूते हुए गुजर रहे थे।
हर चीज़ पर एक गाढ़ा मौन छाया हुआ है। कोई आवाज़ नहीं थी। लेकिन एक संवेदना थी जो भीतर तक महसूस हो रही थी। 
आद्विका बाहर देख रही थी। उसकी आंखों में पहली बार बचपन वाली चमक लौट आई थी। "ये जगह... कैसी है..." उसने फुसफुसाकर कहा।

सैम मुस्कुराया "चलो, अब वक्त है... यहां की सच्चाई से मिल कर देखने का।” यान धीरे-धीरे सतह के पास आया। सबने सांसें थाम लीं। 
टाइटन जहां जीवन का अंतिम प्रश्न अब जवाब की तलाश में था... 
Touchdown, coordinates locked. "Helmet on, pressure stable," निशांत की आवाज़ इंटरकॉम में गूंजी। 
"चलो," उसने अद्विका की ओर देखा।
दरवाज़ा धीरे-धीरे खुला। 
एक मंद नारंगी रौशनी ने अंदर झांका। ठंड, गहराई और सन्नाटा। वे दोनों बाहर निकले टाइटन की सतह पर पहला मानव कदम। "थप... थप..."
उनके बूट बर्फ में धंसते ही, एक अजीब सी झुनझुनी उनके पैरों में दौड़ गई। ना गर्म, ना ठंडी - कुछ अलग ही थी।
"ये... सिर्फ ठंड नहीं है निशांत..." आद्विका धीरे से बोली- उसकी आवाज़ हैरानी में डूबी हुई थी। 
"ग्रेविटी हल्की है, हां... लेकिन... कुछ और भी है यहां... जैसे कुछ... महसूस कर रहा हो हमें..."

निशांत चारों ओर देखने लगा बर्फ के टीले, नारंगी धुंध और झीलों की जमी सतह... हर ओर एक भारी मौन, जो उनके दिल की धड़कनों से भी गूंज रहा था। 
"यहाँ की हवा में कुछ है, आद्विका," 
उसने कहा, "शायद... ये कोई संकेत हो।"

उनकी टाइटन सूट में लगे सेंसर्स "anomalous magnetic resonance" की चेतावनी देने लगे थे। "ये जगह... चुप नहीं है। बस... अलग भाषा में बोल रही है।" 
आद्विका की आंखों में अब डर के साथ, एक खोज की आग थी।
"यहाँ की चुप्पी... जैसे कोई हमें देख रहा है..." आद्विका ने धीरे से कहा, उसकी आँखें झील की ओर टिक सी गईं थी।

"मिथेन की झील के नीचे..." सैम ने धीमे स्वर में कहा, "कुछ है..." "संभलकर चलो..." आद्विका ने सावधानी से कदम बढ़ाए। टाइटन की सतह पर नारंगी कुहासा था। चारों ओर फैली थी बर्फ, मिथेन की झीलें, और सन्नाटा... इतना गहरा... जैसे समय थम गया हो। 

Wait for next part... ✨🪐☄️