Ek Aur Jivan - 3 in Hindi Science-Fiction by Neha kariyaal books and stories PDF | एक ओर जीवन - 3

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एक ओर जीवन - 3

आद्विका मिशन स्टेशन पर पहुँच चुकी थी। सामने एक विशाल भवन था, 
जिसके ऊपर "Project: Ek Aur Jeevan - Titan Mission" लिखा हुआ था। 
अंदर प्रवेश करते ही उसने देखा चारों ओर सजी हुईं डिजिटल स्क्रीन, दीवारों पर आकाशगंगाओं के विस्तृत नक्शे, और हल्की नीली रोशनी वाला वह सुझाव कक्ष, जहाँ इस मिशन की धड़कनें चल रही थीं। 

जब वह अंदर पहुँची, तो सभी प्रोफेसर और मिशन सदस्य एक गोलाकार मेज़ के चारों ओर बैठे थे। मेज़ के बीच एक 3D होलोग्राम तैर रहा था जिसमें हमारी पूरी गैलेक्सी घूम रही थी। हर उपग्रह, हर कक्षा, और दूर कहीं शनि का उपग्रह टाइटन एक मंद नीली रोशनी से चमक रहा था।

आद्विका बिना कुछ कहे एक खाली कुर्सी पर बैठ गई।
उसके ठीक सामने प्रोफेसर विलियम खड़े थे, जिनके इशारे पर वो 3D नक्शा बदलता जा रहा था। 

प्रोफेसर बोले "हमारा मिशन सरल नहीं है। इसमें बहुत जोख़िम है। 

हमें टाइटन की सतह पर यह देखना है कि क्या वहाँ जीवन के लिए आवश्यक तत्व मौजूद हैं: वायुमंडल, तापमान, रसायनिक संरचना। 
जो सिग्नल हमें मिला है, वह टाइटन के दक्षिणी ध्रुव के पास से आया है।" आद्विका ने चुप्पी तोड़ी "सर, क्या यह पक्का है कि वह सिग्नल टाइटन से ही आया है?"

प्रोफेसर थोड़ा रुके। फिर बोले "हमें पूरी तरह यक़ीन नहीं है। लेकिन ये संकेत टाइटन की कक्षा से काफी सटीक मेल खाता है। हमने शनि के अन्य उपग्रहों और बाहरी ग्रहों पर खोज की, पर ऐसी कोई गूंज हमें और कहीं से नहीं मिली।" 
एक अन्य वैज्ञानिक ने जोड़ते हुए कहा "हो सकता है वह किसी और बुद्धिमान जीवन का प्रयास हो। या... शायद हमारी ही पुरानी कोई खोज वहाँ से प्रतिध्वनि दे रही हो। लेकिन जब तक कोई वहाँ जाकर देखेगा नहीं... कुछ कहना मुमकिन नहीं।" 
कक्ष में सन्नाटा था। हर चेहरा गंभीर था, हर आँख मानो दूर ब्रह्मांड को टटोल रही थी। और आद्विका उसके भीतर अब सिर्फ़ एक सवाल नहीं था, बल्कि एक मिशन धड़कने लगा था।

तभी प्रोफेसर विलियम ने आद्विका की ओर देखा और बोले “अब तुम अपने साथियों से अच्छे से परिचित हो जाओ, क्योंकि आने वाले वक़्त में यही लोग तुम्हारे सबसे क़रीबी होंगे।" 
आद्विका ने हल्की मुस्कान के साथ जवाब दिया "जी सर, बाक़ी तो इस मिशन पर जान ही जाएंगे।" उसके जवाब पर सैम, निशांत और मॉरिश तीनों मुस्कराते हैं। 

एक हल्की गर्मजोशी उस पल कमरे में फैल जाती है। सन्नाटे में जैसे एक दोस्ती की लहर चलती है।

लॉन्चिंग से पहले का सन्नाटा लॉन्चिंग से ठीक पहले, वे चारों एक बड़े हॉल में बैठे थे। हॉल की दीवार कांच की थी जिसके उस पार टाइटन के चित्रों का धीमा स्लाइड शो चल रहा था।
बर्फ की सफ़ेद चादरें... नारंगी धुंध से घिरी रेखाएँ... और उस सबसे ऊपर एक गहरी, रहस्यमयी खामोशी। ये कोई ग्रह नहीं था, ये चाँद था लेकिन उम्मीद का। हर किसी की आँखों में एक ही सवाल था क्या हम वहाँ जीवन खोज पाएंगे...? या कोई निशान...? या बस... एक अकेलापन...?

थोड़ी ही देर में सायरन बजा लॉन्चिंग की उलटी गिनती शुरू हो गई। आद्विका, सैम, निशांत और मॉरिश अपने स्पेससूट में तैयार हो चुके थे। 
चुपचाप यान में बैठे पीठ सीधी, निगाहें आगे, और दिल में हज़ारों भाव... 3... 2... 1... "Project: Ek Aur Jeevan" ने आकाश की ओर उड़ान भर ली।

पृथ्वी की कक्षा से निकलते ही अंतरिक्षयान धीरे-धीरे गहरे सन्नाटे में उतर चुका था।
सब सिस्टम ऑटो-पायलट पर थे और अब अगले 6-7 वर्षों तक... बस यात्रा थी, इन चार यात्रियों की समय और अनिश्चित भविष्य के बीच। 
सैम और मॉरिश अपने स्लीप पॉड्स में जा चुके थे। निशांत ने भी थकावट से भरे कदमों से आद्विका की ओर देखा।
निशांतः "क्यों नहीं सोई अभी तक ?
तुम्हें भी आराम करना चाहिए..." 
आद्विका खिड़की के पास बैठी, टकटकी लगाए ब्लैक स्पेस और दूसरे पृथ्वी को देख रही थी, जहाँ कहीं कोई तारा भी नहीं था बस अनंत अंधेरा। 

अद्विका धीरे से: "निशांत... जब हम लौटेंगे... क्या पृथ्वी पहले जैसी होगी? अगर हम टाइटन या किसी और जगह जीवन न ढूंढ पाए तो क्या होगा...?"

निशांत कुछ पल चुप रहा फिर मुस्कुराते हुए, पर हल्की थकान के साथ बोलाः "शायद नहीं... पर हम यहाँ इसलिए तो आए हैं ताकि कोशिश अधूरी न रह जाए।" "जो हार मान लेते हैं, वो कभी सच तक नहीं पहुँचते।"

वो उठकर आद्विका के कंधे पर हाथ रखता है। | "तुम कुछ देर सो लो। सपनों में ही सही... शायद वो ग्रह हमें दिख जाए।" 

आद्विका सिर्फ मुस्कुराती है "तुम जाओ... मैं अभी थोड़ी देर यहीं बैठना चाहती हूँ।" निशांत बिना कुछ कहे पॉड की ओर बढ़ जाता है।

"1 वर्ष 4 महीने बीत चुके हैं..." ईंधन स्थिर है। सभी सिस्टम ठीक हैं। पर मानव मन में बेचैनी बढ़ने लगी है।

टाइटन अभी भी बहुत दूर था। और वक़्त... हर किसी के भीतर अपनी तरह से असर कर रहा था।
चारों यात्री एक साथ कमांड स्क्रीन के सामने बैठे थे। तभी स्क्रीन पर एक हलका झपकता सिग्नल दिखाई देता है धीरे-धीरे बढ़ता हुआ... 

निशांत आश्चर्य से: "ये तो... ये तो नामुमकिन है! ये सिग्नल उसी मिशन का है... जिसे हमने 10 साल पहले शनि के एक उपग्रह की ओर भेजा था।" 
"हमने तो समझा था कि वो मिशन असफल रहा...” उसकी उंगलियाँ जल्दी-जल्दी डेटा खंगालने लगती हैं।

निशांत: "सैम ! फौरन पता लगाओ ये सिग्नल कहां से आ रहा है?" 
सैमः "कुछ देर में बता पाऊंगा... सिग्नल बहुत पुराना है, लेकिन चालू है..."

आद्विका धीरे सोचते हुए: "शायद... ये सिग्नल शुरू से आ रहा था।
लेकिन दूरी इतनी ज़्यादा थी कि पृथ्वी तक कभी पहुंचा ही नहीं।" 
मॉरिश सिर हिलाते हुए: "तुम सही हो आद्विका। हम अब मंगल के परे हैं... शायद यहीं से वो हमसे संपर्क कर पाया हो।" 
एक क्षण की चुप्पी छा जाती है। सैम की आँखें तेजी से स्क्रीन पर दौड़ी... "मिल गया!" "ये सिग्नल शनि के ही एक और उपग्रह से आ रहा है... जो टाइटन से भी कहीं ज़्यादा दूर है। शायद 'एपिमेथियस' या 'हाइपेरियन' जैसा कोई छोटा चंद्रमा..." या कोई अंजान ग्रह "लेकिन वहां तक पहुंचना... आसान नहीं होगा।"

सैम सामने स्क्रीन पर देखता है और कहता है "इस सिग्नल का स्रोत Zyvan-3 है... ये शनि के बाहरी ऑर्बिट में स्थित एक रहस्यमयी उपग्रह है।" 

निशांत मॉरिश की ओर देखता है "क्या हमारे पास इतना ईंधन है कि हम टाइटन के साथ-साथ Zyvan-3 तक भी जा सकें?" 
मॉरिश गहरी सांस लेते हुए कहता है "नहीं। 
हमें एक ही विकल्प चुनना होगा। ईंधन का आधा हिस्सा लौटने के लिए सुरक्षित रखना जरूरी है।" 
ये सुनकर सब चुप हो जाते हैं। 
कुछ पल बाद आद्विका धीरे से कहती है "हमें Zyvan-3 पर जाना चाहिए। अगर कोई हमें वहां से बुला रहा है, तो शायद उन्हें हमारी ज़रूरत है।"
सैम असमंजस में कहता है "लेकिन आद्विका, हम नहीं जानते वहां क्या मिलेगा। ये सिर्फ एक सिग्नल है, शायद एक गड़बड़ी भी हो। और इतना लंबा रास्ता है... हम पहुंच भी पाएंगे या नहीं- कोई नहीं जानता।"

मॉरिश डेटा स्कैनर बंद करता है और कहता है "वैसे भी, टाइटन तक पहुंचने में अभी बहुत समय हैं।
तब तक हम क्या पाएंगे, ये खुद एक सवाल है।" 
टीम चुप हो जाती है।
सब confused थे। थोड़ी देर बाद, थके हुए वे सब दोबारा हाइबरनेशन चैम्बर में चले जाते हैं। 

कुछ साल बाद...

जब मिशन "एक और जीवन" ने पृथ्वी को अलविदा कहा था। लक्ष्य अब भी वही था टाइटन की सतह पर जीवन की अंतिम संभावना को खोज निकालना। 

पर अब तक वे शनि की कक्षा से लगभग 3.2 अरब किलोमीटर दूर, सौर मंडल के अंधेरे किनारे पर थे। 

ईंधन कम हो रहा था। समय, धैर्य, और उम्मीद - तीनों दरकने लगे थे। 
धरती से आने वाले संदेश अब बस आपात चेतावनियों तक सीमित थे। 

तभी अचानक चेतावनी बत्ती जलती है:
[System Alert: Unknown Signal Detected] 
Frequency: 226.96 MHz
Source: Near Jupiter gravitational pocket. a minor :

पायलट मॉरिश, जो उस समय मिशन लॉग में कुछ अपडेट कर रहा था, चौंककर स्क्रीन की ओर देखता है। "This can't be random..." - वह बुदबुदाता है। उसने जल्दी से निशांत को बुलाया। जल्दी आओ ये देखो?.
कुछ ही क्षणों में आद्विका और सैम भी मॉड्यूल में पहुँचते हैं। 
निशांत स्क्रीन की फ्रिक्वेंसी ट्रेस करता है "ये बृहस्पति के पास की किसी gravitational cavity से आ रहा है, पर वहां तो कोई ज्ञात ग्रह या स्टेशन नहीं है!"

मॉरिश गंभीर होकर कहता है "सिग्नल बहुत स्थिर है... ये कोई नैचुरल इको नहीं लग रहा..." 
आद्विका आगे झुकती है, उसकी आँखें कंप्यूटर स्क्रीन पर जमी थी।
"क्या ये वही मिशन तो नहीं, जो 10 साल पहले भेजा गया था? जिसे 'लौटने' की कोई उम्मीद नहीं थी?"
यह दृश्य एक रहस्य की नींव रखता है क्या वह सिग्नल किसी जीवित इकाई का है? या बस एक पुराना संदेश जो अंतरिक्ष की गहराई से लौट आया है? या फिर... कोई पुकार?

सिग्नल रुक नहीं रहा था। पर उसमें कुछ और था- एक दोहराता हुआ पैटर्न,
जैसे कोई अनसुनी आवाज़ धीरे-धीरे किसी दरार से छनकर आ रही हो... "Dvāra... Dvāra... Dvāra..."

निशांत की साँसें थम सी गईं। उसके चेहरे पर तनाव था एक अनुभवी वैज्ञानिक जान गया था कि ये सिर्फ कोई शोर नहीं है। 

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