Tere Mere Darmiyaan - 91 in Hindi Love Stories by CHIRANJIT TEWARY books and stories PDF | तेरे मेरे दरमियान - 91

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तेरे मेरे दरमियान - 91

आदित्य: - मुझे तुझ पर पहले से ही शक था के कभी ना कभी ऐसा ही हरकत जरुर करेगा । इसिलिए मेरी नजर हर पल तुझ रही । अब तेरा खेल खत्म हूआ विकास । अच्छा हूआ मैं सही समय पर पहूँच गया । जानवी वो ठीक नहीं है। 

आदित्य और विकास मे काफी दैर तक हाथा पाई हूआ , इसि बीच जानवी को होश आ जाता है जानवी दैखती है को आदित्य विकास को मार रहा था । जानवी उठने की कोशिश कर रही थी पर उठ नही पा रही थी । जानवी किसी तरह से उठती है तो इसकी साड़ी उपर से खुल जाती है और लड़खड़ाती हूई फिर से बेड पर गिर जाती है और कहती है --

जानवी :- तुम बहोत गंदे हो आदित्य , तुम हर जगह कैसे पहूँच जाते हो । क्यों मुझे शांति से रहने भी नही देते । 

जानवी की बात को आदित्य इग्नोर कर रहा था और आदित्य विकास को मारे जा रहा था । विकास आदित्य के सामने घुटने पर आ जाता है और हाथ जोड़कर माफी मांगने लगता है ।

विकास :- बस करो मुझे और मत मारो , मै तुमसे माफी मांगता हूँ मुझे माफ करदो मुझसे गलती हो गई ।

जानवी विकास को माफी मांगते दैख हैरान थी , तब जानवी दैखती है के उसके कपड़े की उपरी बटन खुला है , जानवी उस बटन को लगाती है ।

आदित्य विकास का कॉलर पकड़ता है और कहता है --

आदित्य :- तेरी हिम्मत कैसे हूई जानवी को छुने की , जानवी मेरी है और मेरी ही रहेगी , अगर उसे कभी भी कोई भी हानी पहूँचाने की कोशिश किया , मैं उसे इस दुनिया से उठा दूगां ।

आदित्य से इतना सुनकर जानवी हैरान थी , के आदित्य उसके लिए क्या सौचता है , तब जानवी आदित्य के पास आती है और लड़खड़ाते हूए आदित्य के बाहो मे गिर जाती है , आदित्य जानवी को संभाल लेता है और इसी का फायदा उठाते हूए विकास वहां से भाग जाता है , आदित्य उसे पकड़ने की कोशिश तो करता है पर वो वहां के साथ कहता भागने मे सफल हो जाता है । तब आदित्य दैखता है वहां पर विकास का फोन रखा था , आदित्य उसे उठाता है तो दैखता है के उसमे रिकॉर्डिंग ऑन था । 

आदित्य फोन को अपने जेब मे डाल लेता है तब जानवी नशे की हालत मे आदित्य से कहती है --

जानवी :- तुम विकास हो या आदित्य हो ? तुम्हें पता है , मुझे पता नही क्या हो गया है , कभी तुम मुझे आदित्य लगते हो तो कभी विकास को पिटते हूए आदित्य लगते हो । हर वक्त तुम ही हो मोरे दिमाग मे ।


जानवी होश मे नही थी , वो बक - बक किसे जा रही थी , तब आदित्य उसे अपने गौद मे उठाता था और वहां से बाहर लेकर आता है , जानवी अपना दोनो हाथ आदित्य को गले मे रखी थी और आदित्य को प्यार से दैख रही थी , तभी वहां पर रागिनी भी आ जाती है , रागिनी आदित्य और जानवी को सेफ दैखकर निश्चिंत हो जाती है और वहां से चली जाती है । इधर जानवी आदित्य से कहती है --

जानवी :- तुम्हें पता है आदित्य , मैं तुमसे बहुत नफरत करना चाहती हूँ , पर पता नही क्यों नही कर पाती , जब तुम्हारे पास थी तो अच्छा लगता था और जबसे तुमसे दुर आई हूँ तब से मेरा मन नही लगता , मुझे तुमसे झगड़ा करने का मन करता है ।

जानवी से इतना सुनकर आदित्य रुक जाता है और हैरानी से कहता है --

आदित्य: - झगड़ा ..?

जानवी :- हां तो और क्या । तुमसे प्यार है के नही पता नही पर तुम्हें देखते ही दिल मे हलचल होने लगती है ।

इतना सुनकर आदित्य को चेहरे मे मुस्कान आ जाता है , जानवी फिर कहती है --

जानवी :- तुम मुझे अपने से दुर क्यों जाने दिया ..?

जानवी ने आदित्य से बड़े ही मासुमियत से सवाल करती है , तो आदित्य कहता है --

आदित्य :- मैं क्या करता , तुम मुझसे दुर जो जाना चाहती थी ।

जानवी :- तुम मुझे वापस लेने क्यों नही आते हो ?

आदित्य :- तुमने मुझे वो हक दिया कहां जानवी ।

जानवी :- मैं वो सब नही जानती , मुझे तुम्हारे पास जाना है , तुम्हारे साथ रहना है , झगड़ा करना है तुमसे बहुत । कल तुम मुझे लेने आओगे ।

आदित्य :- मैं तुमसे झगड़ा नही कर सकता , थक गया हूँ मै झगड़ा करते - करते । अब और नही कर सकता ।

जनवी :- कैसे इंसान हो तुम .. एक लड़की का अधिकार को कैसे छिन सकते हो तुम , मैं तुम पर कैश कर दूगीं । 

आदित्य हैरान होकर कहता है --

आदित्य :- क्या कैश ..?

जानवी :- हां क्योकी तुम मेरा अधिकार छिन रहे हो । मुझे तुमसे बहुत शिकायते है , इसिलिए झगड़ा करना है ।

आदित्य जानवी को कार मे बैठाता है और वहां से जानवी के घर को जाने लगता है , तब जानवी फिर कहती है --


जानवी :- ये तुम मुझे कहां लेकर जा रहे हो ? दैखो मेरा फायदा मत उठाना । अगर मेरे साथ कुछ किया तो मैं .... तो मैं फिर केस कर दूगीं ।

आदित्य :- ठिक है , कर देना केस , पर मैं तुम्हारे साथ ऐसा कुछ भी नही करने वाला ।

जानवी :- क्यों ?

जानवी के सवाल से आदित्य घबरा जाता है और कहता है --

आदित्य :- क्यों का क्या मतलब ?

जानवी :- तुमने अभी कहा ना , के मेरे साथ कुथ करने का मन नही करता । क्यों नही मन करता ? 

जानवी आदित्य के करीब चली जाती है और फिर कहती है --

जानवी :- क्या मैं सुदंर नही हूँ ?

आदित्य जानवी की बात पर मुस्कुराता है तो जानवी फिर कहती है --

जानवी :- तुम्हें हसी आ रही है , मैं ना ... मैं ना .. तुम पे एक और केस करुगीं ।

आदित्य हंसते हूए कहता है --

आदित्य :- क्या .? एक और केस , पर वो किस लिए ?

जानवी :- वो इसीलिए के तुम मुझे दैखते नही हो ।

आदित्य :- जानवी तुम अभी नशे मे हो , अभी जो बोल रही हो नशे मे बोल रही हो , कल ये सब बदल चुका होगा । तो अब चुप रहो और घर चलो ।

जानवी :- तो ऐसा करो ना आदित्य के ये नशा कभी उतरे ही ना ।

जानवी की बात पर आदित्य इमोशनल हो जाता है और कार को रोककर जानवी की और दैखने लगता है । आदित्य जानवी की मासुम चेहरे को दैखता है और फिर कहता है -- 

आदित्य :- मैं भी तुम्हें पाना चाहता हूँ जानवी पर ऐसे नशे मे नही , जब तुम मुझे होस मे रहकर मुझसे प्यार इजहार ना करो ।

जानवी और आदित्य ओक दुसरे की और दैखने लगता है, तब जानवी कहती है --

जानवी :- मुझे खुद ही नही पता के मैं तुमसे प्यार करती हूँ नफरत , नफरत मैं करना चाहती हूँ पर कर नही पाती और प्यार करना नही चाहती पर फिर भी पता नही क्यों ऐसा लगता है जैसे तुम्हारे बिना मैं कुछ भी नही हूँ । ऐसा क्यों है आदित्य ?

तभी आदित्य कार रोकता है क्योकी जानवी का घर आ चुका था । आदित्य जानवी के चेहरे से बालो को बड़े प्यार से हटाता है और कहता है --

आदित्य :- ये सवाल तुम अपने दिल से करो , फिर वहां से जो जवाब आएगा , समझ लेना तुम वही चाहती हो । पर फिलहाल तुम्हारा घर आ गया । अब चलो ।

आदित्य निचे इतना चाहा तब जानवी आदित्य का हाथ पकड़ लेता है और आदित्य को अपमे करीब खींच लेती है और आदित्य के गाल पर एक किस कर देती है । आदित्य हैरानी से जानवी की और दैखता है , जानवी आदित्य की और दैखती है और एक मुस्कान देकर कहती है --

जानवी :- ये इसिलिए, क्योकी तुम हर बार मुझे प्रोटेक्ट किये हो ?

आदित्य समझ जाता है के जानवी के मन मे एब भी उसके लिए प्यार है । आदित्य जानवी के गाल को प्यार से सहलाता है और उसको माथे पर एक किस करता है और फिर कहता है --

 आदित्य :- मैं समझ सकता हूँ जानवी के तुमने मेरे साथ जो कुछ भी क्या ये डिवोर्स या कोर्ट मे जो कुछ भी हूआ , उसमे तुम्हारी कोई गलती नही है । बस मेरी किस्मत थोड़ी खराब है । जो मुझे तुमसे दुर कर रखा है । वरना मैं जानता हूँ के तुम भी मुझसे उतना ही प्यार करती हो जितना के मैं ।

आदित्य कुछ दैर तक जानवी को दैखते रहता है तब वहां पर अशोक आ जाता है । अशोक आदित्य की कार मे जानवी को दैखकर हैरान था , अशोक आदित्य के पास आता है , आदित्य कार से उतरता है और अशोक के पास जाता है , तब जानवी भी कार से उतरती है और लड़खड़ाने लगती है , तो अशोक आदित्य से पूछता है --

अशोक :- ये जानवी को क्या हूआ है ?

आदित्य :- वो जानवी को .....

अशोक फिर कहता है --

अशोक :- बेटा .. तुम और जानवी साथ मे ..?

आदित्य अशोक को सब बोलकर सुनाता है और वो मोबाइल भी अशोक को दे देता है , यो सब सुनकर अशोक बहुत गुस्सा हो जाता है और कहता है --

अशोक :- Thank you बेटा. . अगर तुम इस बार भी ना होते तो ... 

आदित्य :- मैं हमेशा जानवी के साथ हूँ । 

अशोक :- पर अब उस विकास को छोड़ूगां नही । इस बार मौं उसे जेल भेज कर ही रहूँगा ।

तभी जानवी आदित्य के पास आती है और उसके कंधे पर हाथ रखकर कहती है ।

जानवी :- क्या बाते हो रही है , ससुर और दामाद मे हां....!

जानवी से इतना सुनकर अशोक के चेहरे पर एक मुस्कान आ जाती है और आदित्य भी अपना सर निचे कर लेता है और मुस्कुराने लगता है , जानवी फिर कहती है --

जानवी :- कुछ Important बात हो रही है क्या ? चलो अंदर चलो मुझे बहुत भूख लगी है , माय डियर हसबैंड, मेरो लिए कुछ बना सकते हो , मुझे बहुत भूख लगी है ।

जानवी के ऐसे बरताव से आदित्य एक दम शॉक्ड था और जानवी के इतने प्यार से बोलने पर आदित्य Imotional भी था । अशोक भी जानवी के बरताव से हैरान था । 

सभी अंदर जाता है । जानवी आदित्य कंधे पर हाथ रखकर अदर जाती है और लड़खड़ाने लगती है तो जानवी रुक जाती है तो आदित्य जानवी से कहता है --

आदित्य :- क्या हुआ , तुम रुक क्यों गए ?

जानवी मुह बनाकर कहती है --

जानवी :- क्या तुम मुझसे प्यार नही करते ?

आदित्य आज जानवी के सवालों से हक्का - बक्का था , आदित्य मन ही सौचता है --

आदित्य :- ये जानवी को क्या हो गया है , कही इसो सब याद तो नही आ रहा है ।

जानवी फिर से कहती है --

जानवी :- जवाब क्यो नही दे रहे हो ? बोलो क्या तुम मुझसे प्यार नही करते ?

अशोक भी आदित्य के जवाब का इंतोजार कर रहा था । आदित्य जानवी के आंखो मे दैखता है और जानवी से कहता है --

आदित्य :- हां । बहुत करता हूँ ।

आदित्य से इतना सुनकर अशोक भी खुश हो जाता है , तब जानवी कहती है --

जानवी :- तो फिर तुम मुझे गौद मे उठाओ और अंदर ले चलो । मैं बहुत थक गई हूँ ।

आदित्य जानवी के बात पर हिचकिचाने लगता है और इधर - उधर दैखने लगता है , तब जानवी फिर कहती है --

जानवी :- कितना सौचते हो तुम ?

आदित्य :- वो जानवी ....

तब जानवी फिर कहती है --

जानवी :- तुम किससे डर रहे हो , मैं तुम्हारी पत्नी हूँ , तो फिर तुम डर क्यों रहे हो ?

आदित्य जानवी की और दैखता है और मन ही मन कहता है --

आदित्य :- आज तुम्हें क्या हो गया है जानवी । ये वक्त .. ऐसा लगता है जैसे , ये वक्त यही ठहर जाए और तुम और मैं ऐसे ही साथ रहे ।

आदित्य इतना सौच ही रहा था के जानवी फिर कहती है --
 
जानवी :- क्या हूआ उठाओ ।

जानवी के इतना कहने पर आदित्य जानवी को गौद मे उठा लोता है और अंदर जाने लगता है , दोनो ही एक दुसरे ती और प्यार से दैख रहा होता है और दोनो के चेहरे पर एक हल्की मुस्कान आ जाती है । अशोक उन दोनो को दैखकर खुश हो जाता है और भगवान से कहता है --

अशोक :- हे भगवान , इन दोनो का ये प्यार बना रहे , जानवी को उसकी याददाश्त लोटा दो प्रभु ।

To be continue.....846