Tere Mere Darmiyaan - 90 in Hindi Love Stories by CHIRANJIT TEWARY books and stories PDF | तेरे मेरे दरमियान - 90

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तेरे मेरे दरमियान - 90

आदित्य पुनम की और दैखता है और एक हल्की मुस्कान देता है और कहता है --

आदित्य :- बस यूं ही बेठा हूँ मां ।

कृतिका :- पता है आंटी , ये ऐसा ही करता है जब भी उदास होता है और चुप चाप अकेले बैठा रहता है । अब किसी के जाने से जिंदगी रुक तो नही जाती है ना आंटी । पर इसे कौन समझाये ।

रश्मि :- आदी भईया , कृतिका सही बोल रही है , जानवी के कारण आप अपने आपको क्यों तकलीफ दे रहे हो ।

आदित्य कहता है --

आदित्य :- मुझे इतना बुरा कभी नही लगता अगर जानवी मुझसे नळरत करती तो , पर बात ये है के वो मुझसे प्यार करती है और यो बात वो भूल चुकी है । मान लो अगर मैं उसे इस हालत मे छोड़कर चला जाऊ और वो विकास या किसी और से शादी कर ले फिर शादी के बाद उसकी याददाश्त वापस आ जाए तो सौचो उस पर क्या बीतेगी और वो मेरे बारे क्या सोचेगी । के मुझे तो सब पता था फिर भी मैने उसो अकेला छोड़ दिया ।

कृतिका :- और अगर उसकी याददाश्त कभी वापस ही ना आई तो ?

इस बार कृतिका ने जो पूछा उसका जवाब आदित्य के पास नही था । आदित्य चुप रहता है तब विद्युत कहता है --

विद्युत :- तुम लोगो का कहना सही है बेटा , तुम लोग उसकी दोस्त हो बल्की उसकी दुनिया का अहम हिस्सा हो तो मुझे पता है के तुम लोगो को आदित्य की चिंता है पर एक बात हमेशा याद रखना के अगर प्यार सच्चा हो तो वो जरुर मिलता है कोशिश करती रहनी चाहिए । 

विद्युत आदित्य के पास जाता है और फिर कहता है --

विद्युत :- अगर इसके नसीब मे जानवी है तो वो इसे मिलकर ही रहेगा । पर कोशिश करते रहना चाहिये , क्योकी जानवी आदित्य का प्यार है , बेटा हार मत मानो , मुझे भरोसा है के तुम मेरे बहू तो जरुर वापस लेकर आओगी ।

आदित्य कहता है --

आदित्य :- मैं भी यही सोच रहा हूँ पापा , अगर उसकी याददाश्त वापस नही आती है तो मैं खुद कोशिश करुगां उसे याद दिलाने की और फिर भी नही आता तो मै यहां से अपने नए प्रोजेक्ट के लिए चला जाउगां और अपने काम पर ध्यान दूगां । 

इतना बोलकर आदित्य वहां से चला जाता है ।

दुसरा दिन रात को जानवी विकास के साथ डिनर पर दाने के लिए तैयार हो रही थी और घर ये निकल जाती है , इधर विकास जानवी का ही वेट कर रहा था और अपने हाथ मे नशे ती दवाई को दैखकर हल्की मुस्कान के साथ कहता है --

विकास :- आज रात मैं जानवी के जवानी का मजा लूगां , बहुत नखरे दैख लिया उसका अब बस उसकी सारी घंमड आज रात को मैं कमरे मे उतार दूगां । जब उसे होश आएगी तब बहुत दैर हो चुका होगा और मैं उसके जवानी ता रस चख चुका होउगां ।

विकास इतना सौच ही रहा था के तभी कुछ दैर बाद वहां पर जानवी आ जाती है , जानवी को दैखकर विकास दवाई को छुपा लेता है , जानवी रेड साड़ी मे आई थी । जिसमे जानवी कमाल ती लग रही थी । जानवी को दैखकर विकास उसे दैखता ही रह जाता है और मन ही मन सोचता है ।

विकास :- आय हाय .. एक तो मैं इसके साथ वो सब करने ता सौच रहा हूँ और ये है के मुझे और उकसा रही है , आज तो कातिल लग रही है मेरी जानवी , आज रात को मुझपर कयामत आने वाली है ।

विकास मन ही मन बहुत कुछ सोचने लगा था और खुश हो रहा था ।
रेस्टोरेंट शांत था, रोशनी ज़रूरत से ज़्यादा हल्की । जानवी विकास के पास जाती है और वहां पर बैठ जाती है , विकास जानवी की तारिफ करते हूए कहता है --

विकास :- जानवी .. तुम इस साड़ी मे बहुत ज्यादा खुबसूरत लग रही हो ।

जानवी शरमाते हूए कहती है --

जानवी :- थेक्सं ।

विकास बार-बार मुस्कुरा रहा था, पर उसकी मुस्कान
आँखों तक नहीं पहुँच रही थी , विकास जानवी से कहता है --

विकास :- क्या पीओगी?”

उसने पूछा , जानवी ने मना किया , तो विकास ने ज़ोर नहीं दिया—
बस मुस्कुरा दिया और वही मुस्कान सबसे ज़्यादा डरावनी थी ।

इधर आदित्य का दोस्त रागिनी भी उसी रेस्टोरेंट पर आई हूई थी 
, रागिनी जानवी को विकास के साथ दैखकर हैरान थी । पर रागिनी वहां पर चुप होकर बैठ जाती है और उन दोनो को दैखती रहती है ।

रागिनी देखती है के विकास के एक हाथ मे कुछ था । जो विकास बार - बार निकालने की कोशिश कर रहा है । रागिनी को विकास पर शक होने लगा । तो रागिनी अपना फोन निकालती है और आदित्य को फोन करती है , तो उधर से आदित्य की आवाज आता है --

आदित्य :- हां रागिनी , बोलो । 

रागिनी :- आदित्य .. क्या तुम अभी युनिक रेस्टोरेंट आ सकते हो ?

आदित्य :- नही रागिनी मुझे अभी मेरी तबियत ठिक नही है , सॉरी रागिनी आज तुम चली जाओ मैं कल तुमसे मिलता हूँ ।

रागिनी :- मैं अपने लिए नही बुला रही हूँ इडियट, मैं जानती हूँ के तु जानवी से प्यार करता है , इसिलिए तुझपे चांस भी नही मार रही । वो जानवी को विकास के साथ दैखा इसिलिए तुझे फोन किया । वो दोनो यही पर है ।

आदित्य :- ओ तो मैं क्या करु ?

रागिनी आदित्य को सब बोलतर सुनाता है तो आदित्य विकास की चाल को समझ जाता है तो आदित्य कहता है तुम वही उन दोनो पर ध्यान रखो मैं अभी आता हूँ ।

इतना बोलकर आदित्य फोन काट देता है , तो इधर रागिनी हल्की मुस्कान के साथ कहती है --

रागिनी :- ये लो , जब मैेने कहा तो बीमारी का बहाना और जब जानवी की बात आई तब वो ठिक हो गए । वार रे प्यार , पता नही आदित्य से और क्या - क्या करवायेगा ।

इधर आदित्य घर से जल्दी से निकलता है उसो पता था के बस वहा वर कुछ ठीक नहीं है।

उसका दिल बिना वजह तेज़ धड़कने लगा , वो सीधे रेस्टोरेंट की ओर निकल पड़ा।
इधर रागिनी उन दोनो पर नजर गड़ाके बैठी थी , विकास बार - बार कुछ करने ती कोई कर रहा था पर कर नही पा रहा था । 

रागिनी कहती है --

रागिनी :- ये विकास क्या करने की कोशिश कर रहा है ?

तभी जानवी दुसरे तरफ देखती है तो तब विकास मौका पा कर उसके ड्रिंक्स मे नशीला पाउडर मिला देता है । ये रागिनी दैखकर चोंक जाती है और कहती है --

रागिनी :- ओ ... तो ये है इसका प्लान । तो ये विकास जानवी को बेहोस करके उसको साथ...

इतना बोलतर रागिनी चुप हो जाती है और फिर करती है --

रागिनी :- हे भगवान , अच्छा हूआ मैने आदित्य को बुला लिया वरना जानवी का आज बहुत बड़ा नुकसान हो जाता ।

जानवी ने बस एक घूँट लिया था फिर दूसरा और कुछ ही देर में
उसे अजीब-सा लगने लगा आवाज़ें दूर होती जा रही थीं और कमरा घूमने लगा।

ये दैखकर विकास मन ही मन मुस्कुरा रहा था । जानवी अपना सर पकड़ लेती है और कहती है --

जानवी :- मुझे… अच्छा नहीं लग रहा, ये क्या हो रहा है मेरे साथ । 

वो घबरा कर बोली।

विकास ने हाथ बढ़ाया और अनजान बनते हूए कहा --

विकास :- “सब ठीक है , तुम टेशंन मत हो ।

उसकी आवाज़ में अजीब-सी जल्दी थी।

जानवी उठने की कोशिश की पर उठ. ही पाई , लड़खड़ाती हूई वही पर बैठ गई । इसका सर बहुत चकराने लगा और बेहोसी आने लगा । जानवी विकास से कहती है --

जानवी :- विकास .. मुझे घर पहूँचा दो प्लिज , पत नही क्या लग रहा है । 

विकास जानवी से कहता है --

विकास :- ठिक है जानवी तुम टेशंन मत लो मैं हूँ यहां पर तुम्हारे साथ । अभी तुम्हारा तबियत ठिक नही है कुछ दैर आराम कर लो फिर चले जाना । 

इतना बोलकर विकास जानवी को अपने गोद मे उठाता है और इपर कमरे की और लेकर जाता है । रागिनी को पहले ही अंदाजा हो गया था के विकास जानवी के साथ ऐसी ही कुछ करने वाला है ।

इसिलिए रागिनी भी उसके पिछे - पिछे चली जाती है । विकास जानवी को एक कमरे के अदर लेकर जाता है और वहां को बेड पर सुला देता है , जानवी विकास से कहती है --

जानवी :- ये तुम मुझे कहा पर लेकर आए हो ?

विकास :- कही नही जानवी तुम कुछ दैर आराम करो फिर चले जाना । तुम्हारा तबियत ठिक नही है अभी कुछ गैर यही पर आराम करो । इसके बाद मैं तुम्हें घर छोड़ दुगाॉ ।

जानवी अब पुरी तरह होस मे नही थी और बिस्तर पर सोई हूई थी । विकास जो चाहता था वो सब ही हो रहा था ।

विकास जानवी तो दैखता है , विकास जानवी की साड़ी को उसके कमर से हटा देता है और उसे दैखता रहता है और कहता है --

विकास :- कब से जानवी. .... कब से मैं इस वक्त का इंतोजार कर रहा था । पर तुम्हारी मर्जी से यो सब करना चाहता था पर कोई बात नही , ऐसे ही सही । बस रात भर बाकी है उसके बाद कल सुबह तक तुम मेकी हो चुकी होगी ।
तुम्हारे पास और कोई रास्ता नही बचेगा , फिर तुम्हें मेरे पास आना ही पड़ेगा ।

विकास अपने फोन से जानवी का विडियो बनाने लग जाता है , पहले विकास जानवी के कमर को फिर साईड मे फोन को रख देता है ताकी उसका और जानवी का विडियो बना सके ।

फोन को रिकार्डिंग मोड मे करके विकास जानवी के करीब आ जाता है और जानवी की खुबसूरती को दैखता है फिर अपना होट जानवी से होंट के पास लेकर जाता है , जैसे ही विकास का होट जानवी के होंट के पास पहूँचता है के तभी वहां पर आदित्य आ जाता है । आदित्य दैखता है के विकास जानवी को किस करने के लिए आ ़गे बड़ रहा था । 

तभी आदित्य विकास का कॉलर को पकड़ता है और उसे जानवी से दुर फेंक देदा है । विकास जानवी से दुर जा गिरता है , विकास गुस्से उठता है को दैखता है के वहां पर आदित्य खड़ा था ।

आदित्य को दैखकर विकास हैरान था , विकास गुस्से से कहता है --

विकास :- तुम ? तुम्हारी हिम्मत कैसे हूई यहां पर आने की ।

आदित्य जानवी के साड़ी को ठिक कर रहा था । तभी विकास आदित्य के पास आता है और उसे पकड़कर उसे मारने जाता है तो आदित्य उसका हाथ पकड़ लेता है ओर विकास को एक जौरदार मुक्का मारता है , जिससे विकास कुछ दुर जाकर गिर जाता है ।

आदित्य की आँखें सीधे जानवी पर गईं , उसने देखा— जानवी ठीक नहीं है , आदित्य समझ गया था के जानवी को नशे की गवाई प्लाई गई है । 

आदित्य जानवी के गाल को छुकर उसे जगाने की कोशिश करता है---

आदित्य :- जानवी ... जानवी ... उठो जानवी ।

आदित्य को दैखकर विकास चौंक गया था और आदित्य से विकास कहता है --

विकास :- “तुम यहाँ क्या कर रहे हो?”

विकास ने सख्ती से पूछा।

आदित्य ने जवाब नहीं दिया वो सीधे जानवी के पास गया। एर उसे उठाने तो विकास नो कहा --

विकास :- “हाथ मत लगाओ जानवी को ।

विकास चिल्लाया।

आदित्य ने शांत लेकिन सख़्त आवाज़ में कहा—

आदित्य: - मुझे तुझ पर पहले से ही शक था के कभी ना कभी ऐसा ही हरकत जरुर करेगा । इसिलिए मेरी नजर हर पल तुझ रही । अब तेरा खेल खत्म हूआ विकास । अच्छा हूआ मैं सही समय पर पहूँच गया । जानवी वो ठीक नहीं है।

Note: - Jayshree s hadsni ji , antima ji , vaishnavi shukla ji , anamika kumari ji , vaibhavi tamboli ji ..or bhi mere pyare pathako , aaplogo ka bahot pyar or support rha hai mere is story par , jiske liye aap sab ka bahot - bahot dhanyavad,. Bas kuch he episodes bache hue hai . aap logo ka pyar dekhkar he aage likhne ke liye parotsahan milta hai . please follow kar le taki meri aane wali story bhi aap sab padh sako . or apka comment mujhe milta rahe . 🥰💕