Tere Mere Darmiyaan - 89 in Hindi Love Stories by CHIRANJIT TEWARY books and stories PDF | तेरे मेरे दरमियान - 89

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तेरे मेरे दरमियान - 89

विकास :- मतलब साफ है जानवी , तुम्हारे दिल मे मेरे लिए प्यार है ही नही । मुझे तो लगता है के तुम उस आदित्य से प्यार करती हो ।

विकास से इतना सुनकर जानवी अब दुविधा मे थी । जानवी विकास के बात का कोई जवाब नही दे पाता है । और जब से जानवी आदित्य के घर से वापिस आई है तब से जानवी को बहोत अकेला पन सा लगने लगा था । 

जानवी के चुप्पी पर विकास फिर से कहता है --

विकास :- क्या हूआ .. मैं जानता हूँ के तुम्हारे पास मेरे सवाल का कोई नही है । दुनिया मे एक मैं ही ऐसा इंसान हूँ जो अपनी गर्लफ्रेंड को छुआ तक नही है क्योकी मैं जिससे प्यार करता हूँ वो मुझसे प्यार ही नही करती ।

विकास जानवी को Imotional blackmail कर रहा था । क्योकी विकास को आज जानवी के साथ सब कुछ करना था , क्योकी अगर विकास जानवी के साथ अगर एक बार सबकुछ कर लेता है तो जानवी के पास विकास के साथ शादी करने के अलावा और कोई Option नही बचेगा ।

विकास की बात को सुनकर जानवी भी कंफ्युज हो जाती है , जानवी को कुछ समझ मे नही आ रहा था के वो क्या करे ।
क्योकी जानवी जानती थी के विकास जो बोल रहा है वो भी सही बोल रहा है , पर जानवी अब भी Confuse थी । 

विकास जानवी के इसी Confusion का फायदा उठाना चाहता था और विकास फिर से जानवी के करीब चला जाता है और जानवी के कमर पर हाथ रखकर उसे किस करने के लिए उसके होंट के करीब ले जाने लगता है । 

जानवी इस बार विकास को मना नही कर पाती और अपनी आंखे बंद कर लेती है , जैसै ही जानवी अपनी आंखे बंद करती है तो जानवी को आदित्य का मुस्कुराता हूआ चेहरा उसे दिखाई देने लगता है और वो पल याद आता है जब जानवी आदित्य के तरफ आ रही ट्रक को दैखकर उसे बचाने के भागती है और चिल्लाकर आदित्य को धक्का देती है ।

जानवी :- आदित्य ......!

विकास के होंट अब जानवी के होंट को करिब पहूँच चुका था पर उसो पहले जानवी आदित्य का नाम चिल्लाकर कहती है और विकास को जौर से धक्का दे देती है , जिससे विकास जानवी से दुर जाकर जमीन पर गिर जाता है ।

जानवी अपनी आंखे खोल लेती है और अपने सर को पकड़ कर हैरानी से इधर - उधर दैखती है । जानवी को कुछ समझ मे नही आ रहा था के ये सब उसके साथ क्या हो रहा है ।

जानवी के चिल्लाने की आवाज सुनकर अशोक भी भागकर आता है , जानवी विकास को जमीन पर गिरा दैखकर भागकर विकास के पास जाती है और विकास को उठाते हूए कहती है--

जानवी :- अरे विकास , तुम यहां पर कैसे गिर गए ?

अशोक तबतक दरवाजे तक आ चुका था और वही पर खड़ा हो जाता है , विकास जानवी के सवाल से हैरान था , क्योकी जानवी ने ही विकास को धक्का दिया और जानवी ही उससे पूछ रहा है के वो कैसे गिरा । विकास जानवी की और हैरानी से दैखता है और अपने जगह से खड़ा हो जाता है ।

जानवी :- तुम भी ना अपना ध्यान रखा करो , कही पर भी गिर जाते हो । तुम ठिक तो हो ना ?

अशोक विकास की हैरान भरी आंखो को दैखकर समझ जाता के वहां पर क्या हूआ होगा । विकास जानवी के बात का जवाब देता है और कहता है --

विकास :- जानवी .. क्या तुम्हें सच मे नही पता के मैं यहां पर कैसे गिरा ?

जानवी हैरानी से कहती है --

जानवी :- ये तुम कैसी बात कर रहे हो विकास ? अगर मुझे पता होता तो मैं तुमसे पूछती क्या ?

विकास हैरान था उसे समझ मे नही आ रहा था के क्या बोले क्या करे ? 

अशोक विकास की हालत दैखकर मन ही मन मुस्कुरा रहा था , विकास अशोक की मुस्कान को दैखकर बहोत जल रहा था । जानवी विकास से कहती है --

जानवी :- तुम खड़े क्यों हो बैठो हो ना ? 

विकास जानवी के इस तरह के बर्ताव से हैरान था और डरा भी था । विकास मन ही मन सौचता है --

" अगर मैं यहां पर रहा तो पता नही आगे और क्या - क्या हो जाएगा । एक तो खुद मुझे धक्का देती है और फिर मुझसे ही पूछती है क्या हूआ , मेरा यहां से निकलना ही ठिक होगा , इसे किसी और दिन दैख लूगां । "

विकास को इतना गहरी सौच मे डूबा दैखकर जानवी कहती है ---

अनिका :- क्या बात है विकास , तुम किस सौच मे पड़ गए हो ?

विकास :- नही कुछ नही , वो मुझे थोड़ा काम है मुझे जाना होगा ।

इतना बोलकर विकास वहां से जाने लगता है तो विकास दैखता है दरवाजे पर अशोक चेहरे पर मुस्कान लिये उसकी और दैख रहा था , मानो अशोक उसे चिड़ा रहा हो । ये दैखकर विकास को गुस्सा तो बहोत आता है पर वो कर भी क्या सकता था , विकास वहां से चुप चाप निकल जाता है ।

अशोक जानवी के पास आता है और कहता है --

अशोक :- बेटा जानवी , क्या हूआ ? तुम ठिक हो ना ?

जानवी अपना सर पकड़कर बैठ जाती है और कहती है --

जानवी :- पता नही पापा , पर मुझे ऐसा लगा जैसे कोई बड़ी गाड़ी आदित्य की और आती है और मैं उसे बचा रही हूँ ।

अशोक हैरान होकर कहता है --

अशोक :- क्या ..? 

जानवी :- हां पापा , पता नही क्यों पर मुझे ऐसा लगा । जानते हो पापा , मैं उस आदित्य से बहोत नफरत करती हूँ , पर पता नही क्यूं फिर भी हर समय उसके ही ख्याल आते है मन मे । 

अशोक पूछता है --

अशोक :- अच्छा, पर ऐसा क्यों लगता है तुम्हें बेटा ?

जानवी :- पता नही पापा , पर पता नही क्यों , मुझे ऐसा लगता है जैसे उसका और मेरा और गहरा रिस्ता है । पापा ऐसा क्यों हो रहा है मेरे साथ ?

अशोक जानवी के पास बैठ जाता है और उसके सर पर हाथ फैेरते हूए कहता है --

अशोक :- अच्छा पहले मुझे ये बताओ के क्या तुम्हारे दिल मे उसके लिए कुछ फिलिंग आती है ?

जानवी :- मुझे कुछ भी समझ मे नही आ रहा है पापा । मैं उससे नफरत करना चाहता हूँ , पर पापा पता नही क्यों मैं .... 

इतना बोलकर जानवी चुप हो जाती है , तब अशोक हल्की मुस्कान लिए कहता है --

अशोक :- दैखो बेटा , हो सकता के एक्सीडेंट से पहले तुम आदित्य से प्यार करने लगी थी और एक्सीडेंट के बाद तो तुम कुछ बाते भूल गई हो , तो हो सकता है के तुम वही बात भूल गई हो ।

जानवी :- नही पापा , ऐसा कैसे हो सकता है , मैने तो कभी उससे प्यार किया ही नही , उस जैसे लालची इंसान से मैं कभी प्यार कर ही नही सकती । दैखा ना आपने कैसे कोर्ट मे उसने तमासा बनाया , किस लिए सिर्फ पैसो के लिए ।

अशोक :- बेटा , माम लिया के आदित्य बहोत बुरा लड़का है उसे पैसे की लालच है , पर बैठा मैं तुमसे एक बात जानना चाहता हूँ के तुम लगभग 4 महिने उसके साथ रही , तो क्या तुम्हें कभी भी उसके साथ अनसेफ जैसा कुछ लगा ?

अशोक की बात को सुनकर जानवी सौच मे पड़ गई । क्योकी जानवी जानती थी के आदित्य कभी इसे परेशान नही किया , बस्ती जानवी ने ही उसे बहोत परेशान किया था । पर फिर भी आदित्य उसे कुछ नही कहा , हमेशा आदित्य को आंखो पर जानवी के लिए एक रिस्पेक्ट था ।

अशोक फिर कहता है --

अशोक :- बेटा .. आदित्य ना तो लालची है और ना ही आवारा , वो बहोत अच्छा लड़का है बेटा । तुम विकास के बारे मे बात कर रही हो ना , तो बताओ किसके साथ तुम्हें ज्यादा सेफ महसूस होता है ?

जानवी सोचती है के वो जब भी विकास के साथ रही है उसे विकास का गलत Intension ही दिखा है , जानवी जब भी आदित्य के साथ रही है तो जानवी अपने आपको बहोत सेफ महसूस किया है । 

अशोक :- बेटा , किसी को गलत ठहरा बहुत ही आसान है , पर किसी के कहने से या बोलने से कोई बुरा नही बन जाता है , तुम्हारी प्रॉबल्म यही पर है के तुम्हें जैसे लोगो ने आदित्य को बारे मे बताया तुमने वैसे नजर से ही उसे दैखा । कभी मन मे सौच के दैखना के तुम्हारा मन क्या कहता है । उसके बाद कोई डिसीजन लेना ।

अशोक जानवी को बहुत ही प्यार से समझाता है और वहां से तला जाता है । जानवी अलोक के बातो पर सोचने लग जाता है , जानवी कभी मोनिका ती बात को याद करता है तो कभी विकास के बातो पर उन दोनो ने हर समय ही आदित्य की बुराई ही किया है , पर जैसा उन दोनो ने कहा , जानवी को कभी आदित्य ऐसा लगा ही नही । 

जानवी को अब समझ मे नही आ रहा था के वो क्या करे । जानवी अपने आप से सवाल करके कहती है --

जानवी :- कही ऐसा तो कुछ नही के इस एक्सीडेंट के कारण मैं कुछ अच्छी बात को याद नही कर पा रही हूँ , मुझे कुछ समय और इंतेजार कर लेना चाहिए ।

इधर विकास अपने घर मे गुस्से से बोखलाया हूआ था और गुस्से से अपने आप से कहता है --

विकास :- पता नही ये जानवी अपने आप को क्या समझती है , अरे उसके जैसी तो मुझे यूं मिल जाएगी यूं , उसकी इतनी नखरे सहता भी नही पर उसकी दौलत के कारण मैं चुप - चाप सब सहता रहा हूँ । वरना उसे कबका छोड़ देता है या मार देता । 

विकास अपने कमरे मे इधर उधर घुमता है और फिक कहता है --

विकास :- नही नही , मुझे कुछ सोचना होगा , ज्यादा समय नही है मेरे पास , अगर उसे सब याद आ गया तो बहुत बड़ी प्रॉबल्म खड़ी हो जाएगी , जानवी हमेशा के लिए मेरे हाथ से निकल जाएगी । 

विकास कुछ सौचता है और एक हल्की मु्साकन देकर अपना फोन निकालता है और जानवी को कॉल लगता है , इधर जानवी दैखती है विकास का कॉल तो जानवी कॉल रिसिव करती है और कहती है --

जानवी :- हां विकास बोलो , क्या बात है ?

विकास :- क्या बात है जानवी, तुम मुझसे अब भी नाराज हो क्या ?

जानवी एक गहरी सांस लेता है और कहता है --

जानवी :- नही ऐसी कोई बात नही है । पर फिक दुबारा से ऐसा कभी मत करना ।

विकास :- नही जानवी , मैं तुमसे माफी मांगने के लिए ही कॉल किया था । 

जानवी :- It's ok विकास , मैं भी तुम्हें Sorry बोलती हूँ । पता नही मुझे क्या हो गया था ।

विकास :- कोई बात नही ऐसा हो जाता है कभी - कभी । जानवी कल डिनर के लिए मिले ?

विकास के बात पर जानवी सोचने लगती है , तो विकास फिर कहता है --

विकास :- जानवी , इतना भी क्या सोचना । भरोसा नही रहा क्या मुझ पर ?

जानवी :- नही विकास वो बात नही है , मैं बस समथ नही पा रही हूँ मैं क्या करु , कभी लगता है सब सही है । फिर कभी लगता है के गलत हो रहा है ।

विकास :- क्या सही या गलत जानवी ?

जानवी :- एक्सीडेंट के बाद मैं काफी कुछ भूल चुकी हूँ तो वही जर लगता है , कौई भी डिसीजन लेने पहले डरती हूँ ।

विकास :- तुम अब भी आदित्य के बारे मे सोच रही हो जानवी ?

जानवी :- नही सोचने वाली कुछ नही है । बस मेरी याददाश्त के कराण थोड़ी परेशान हूँ ।

विकास :- अच्छा वो सब ठीक है , दैखना तुम्हाकी याददाश्त जल्द ही वापस आ जाएगी । पर दैखो , मैं तुमसे दुर अब रह नही पा रहा हूँ । मेरा क्या कसूर है जानवी , जो मुझे ही बार - बार तुमसे दुर . रहना पड़ रहा है । 

विकास जान बुझकर जानवी से इस तरह की Imotional बाते बोल रहा था । विकास फिर कहता है --

विकास :- प्यार मे दर्द तो होता है जानता था पर मुझे इतना सहना पड़ेगा ये नही जानता था । तुमसे बहुत प्यार करता हूँ जानवी और तुम ही बताओ कब तक दुर रहूँगा मे तुमसे । तुम्हारी याददाश्त चली गई , इसमे सबसे ज्यादा दिक्कत किसे हूआ , मुझे जानवी । अब तुम्हारे करीब नही आ सकता ठिक है पर तुम्हारे साथ तो रह सकता हूँ । यही बहुत है जानवी मेरे लिए ।

विकास की Imotional बातो ने जानवी पर असर करने लगा था । जानवी को लगने लगा के विकास सच मे उससे बहुत प्यार करता है । तभी जानवी कहती है --

जानवी :- ठिक है विकास , कल मैं आउगीं । अब तुम और मैं साथ रहेगें । पर एक सर्त पर ।

विकास :- हां बाबा पता है । नही करुगां ऐसा वैसा कुछ ।

जानवी एक हल्की मुस्कान देती है और कहती है --

जानवी :- ठिक है , बॉय , मलते है कल ।

विकास :- बॉय जानवी , लव यू ।

इतना बोलकर विकास फोन काट देता है और एक शैतानी हसी दैकर कहता है --

विकास :- कल रात तुम मेरी बाहों मे होगी जानवी और उसको बाद तुम मजबुर हो जाओगी मुझसे शादी करने को । बस कल रात का इंतोजार है ।

इधर आदित्य गार्डन मे बैठा था तो आदित्य की पूनम , कृतिका , रश्मि और रमेश , तिरु , विद्युत और अनय सभी उसके पास आते है ।

पूनम आदित्य से कहती है --

पूनम :- बेटा क्या कर रहे हो यहां पर अकेले ।

आदित्य पुनम की और दैखता है और एक हल्की मुस्कान देता है और कहता है --

आदित्य :- बस यूं ही बेठा हूँ मां ।

To be continue.....821