Narbhakshi Rakshas in Hindi Horror Stories by Vedant Kana books and stories PDF | Narbhakshi Rakshas

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Narbhakshi Rakshas

सन् 1920 के आसपास की बात है, जब गाँवों में रात सच में अंधेरी हुआ करती थी और लोग सूरज ढलते ही अपने दरवाजे बंद कर लेते थे। उस समय गुजरात के एक छोटे से गाँव रतनपुर में एक अजीब खौफ फैल गया था।

लोग कहते थे कि जंगल के पार एक नरभक्षी शैतान रहता है, जो हर अमावस्या की रात किसी एक इंसान को अपना शिकार बना लेता है। शुरू में लोगों ने इसे बस अफवाह समझा, लेकिन जब गाँव के तीन लोग लगातार तीन महीनों में गायब हो गए, तब हर किसी के चेहरे पर डर साफ दिखने लगा।

गाँव के बाहर घना जंगल था, जहाँ दिन में भी धूप पूरी तरह जमीन तक नहीं पहुँचती थी। रात होते ही वहाँ से अजीब सी आवाजें आने लगतीं। जैसे कोई भारी साँस ले रहा हो, जैसे सूखी टहनियाँ किसी के पैरों के नीचे टूट रही हों।

एक रात, रामलाल नाम का एक किसान अपने खेत से देर से घर लौट रहा था। रास्ता उसी जंगल के किनारे से होकर जाता था। जैसे ही वह वहाँ पहुँचा, उसे महसूस हुआ कि कोई उसका पीछा कर रहा है। उसने कदम तेज किए, लेकिन पीछे से आती भारी साँसों की आवाज भी तेज हो गई।

अचानक एक ठंडी हवा चली और उसके हाथ की लालटेन बुझ गई। अंधेरा इतना गहरा था कि उसे अपने हाथ तक नहीं दिख रहे थे। तभी उसके कान के पास किसी ने बहुत धीमी आवाज में कहा, “तू आ ही गया...” रामलाल के शरीर में जैसे जान ही नहीं रही। वह भागने की कोशिश करने लगा, लेकिन उसका पैर किसी चीज में उलझ गया और वह जमीन पर गिर पड़ा। उसने घबराकर पीछे देखा, और जो उसने देखा, उससे उसका खून जम गया।

एक लंबा काला साया, जिसकी आँखें अंगारों की तरह चमक रही थीं, उसके ठीक सामने खड़ा था। उसके मुँह से खून टपक रहा था, और उसके दाँत किसी जानवर से भी ज्यादा तेज थे। वह शैतान धीरे धीरे उसकी ओर बढ़ा।

रामलाल चीखने की कोशिश करता रहा, लेकिन उसकी आवाज जैसे गले में ही अटक गई। अगले दिन सुबह, गाँव वालों को रामलाल की लाश जंगल के किनारे मिली, उसका शरीर बुरी तरह नोचा हुआ था, जैसे किसी ने उसे जिंदा ही खा लिया हो।

अब गाँव में डर और भी गहरा हो गया। लोग रात को बाहर निकलना बंद कर चुके थे। लेकिन इसी बीच गाँव में एक नया आदमी आया, जिसका नाम था हरिदास। वह खुद को तांत्रिक बताता था और कहता था कि वह उस नरभक्षी शैतान को खत्म कर सकता है। गाँव वाले पहले तो डर गए, लेकिन फिर उम्मीद की एक किरण दिखी। उन्होंने हरिदास को गाँव में रुकने दिया और उससे मदद की गुहार लगाई।

हरिदास ने कहा कि अगली अमावस्या की रात वह जंगल में जाकर उस शैतान का सामना करेगा। रात आई, और पूरा गाँव अपने घरों में बंद हो गया। हरिदास अकेला लालटेन लेकर जंगल की ओर बढ़ गया। उसने एक जगह पर बैठकर कुछ मंत्र पढ़ने शुरू किए। हवा अचानक तेज हो गई, पेड़ों की टहनियाँ जोर जोर से हिलने लगीं। तभी वही भारी साँसों की आवाज फिर से गूँजने लगा।

हरिदास मुस्कुराया और बोला, “मैं जानता हूँ तू यहीं है।” कुछ ही पलों में वह काला साया उसके सामने आ खड़ा हुआ। लेकिन इस बार कुछ अलग था। हरिदास डरने की बजाय शांत था। उसने अपनी आँखें बंद कीं और धीरे से बोला, “तू बहुत समय से भूखा है... लेकिन अब समय आ गया है कि तू आजाद हो जाए।”

यह सुनते ही वह शैतान जोर से चिल्लाया, और उसकी आवाज में दर्द साफ झलक रहा था। अचानक उसका रूप बदलने लगा। उसकी काली परछाई धीरे धीरे हटने लगी, और उसके अंदर से एक इंसान का चेहरा दिखाई देने लगा। वह कोई और नहीं, बल्कि गाँव का ही पुराना मुखिया था, जो सालों पहले अचानक गायब हो गया था।

हरिदास ने गाँव वालों को बुलाया और सच बताया। उसने कहा कि यह कोई शैतान नहीं, बल्कि एक अभिशाप है। सालों पहले उस मुखिया ने अपने स्वार्थ के लिए एक काला अनुष्ठान किया था, जिसमें उसे मानव मांस खाने की शर्त पर अमरता मिलती थी। लेकिन वह धीरे धीरे खुद ही उस शैतान में बदल गया।

गाँव वाले यह सुनकर सन्न रह गए। उन्होंने सोचा कि अब सब खत्म हो जाएगा। हरिदास ने कहा कि वह इस अभिशाप को खत्म कर देगा। उसने एक आखिरी मंत्र पढ़ा, और वह काला साया एक जोरदार चीख के साथ हवा में गायब हो गया। सब कुछ शांत हो गया।

गाँव वालों ने राहत की साँस ली। उन्होंने हरिदास का धन्यवाद किया और उसे अपना रक्षक मान लिया। लेकिन उसी रात, जब हरिदास अकेला अपने कमरे में बैठा था, उसने आईने में देखा। उसकी आँखें हल्की लाल चमक रही थीं। उसके होंठों पर एक अजीब सी मुस्कान थी।

वह धीरे से खुद से बोला, “अभिशाप खत्म नहीं हुआ... बस नया शरीर मिल गया है।” बाहर कहीं दूर से फिर वही भारी साँसों की आवाज गूँजने लगी, और गाँव एक बार फिर उसी अनदेखे डर के साए में आ गया, जिसका अंत अभी भी कहीं नजर नहीं आता था।