Tere Mere Darmiyaan - 87 in Hindi Love Stories by CHIRANJIT TEWARY books and stories PDF | तेरे मेरे दरमियान - 87

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तेरे मेरे दरमियान - 87

जानवी :- मैंने तो उसे छोड़ दिया था, पर फिर भी मुझे उसकी इतनी फिक्र क्यों हो रही है ?

वो बुदबुदाई।

जानवी :- “फिर ये खालीपन क्यों है?”

तभी अचानक फोन की स्क्रीन जल उठी , जानवी को लगा के आदित्य का मेसेज होगा , जानवी खुशी से फोन की तरफ देखती है पर किसी का मैसेज नहीं था। 

फिर भी जानवी का दिल एक पल के लिए तेज़ धड़का। उसे खुद पर गुस्सा आया।

जानवी :- “मैं क्या उम्मीद कर रही हूँ? 

उसने फोन पलटकर रख दिया।

लेकिन मन…मन अब भी फोन की तरफ देख रहा था।
उसे याद आया—कभी वो बीमार होती थी, तो कोई चुपचाप दवा पानी के साथ रख देता था। कोई उसकी खामोशी पढ़ लेता था।
नाम याद नहीं था, पर एहसास बहुत अपना था। उसकी सांसें भारी हो गईं। जानवी कहती है ---

जानवी :- आखिर वो कौन है जिसके लिए मेरा दिल इतना बैचेन हो रहा है ?

दिमाग कह रहा था— आदित्य दूर रहना ही ठीक है। सब कुछ बहुत टूट चुका है , लेकिन दिल… दिल को कोई तर्क समझ नहीं आता।
दिल बस किसी को ढूंढ रहा था।

तभी एक आँसू उसकी पलकों से फिसल गया।
फिर दूसरा। जानवी ने खुद को समेटने की कोशिश की, लेकिन नाकाम रही। जानवी अपना आंशु पोछती है और कहती है ---

जानवी :- ये आंशु ... अगर ये प्यार नहीं है…” ( वो रोते हुए बोली )
तो फिर ये दर्द क्यों है?

जानवी को कुछ समझ मे नही आ रहा था , जानवी अपने अतित को याद करने की कोशिश कर रही थी पर उसे एक धुधंला सा चेहरा ही दिख रहा था ।

उसे एहसास होने लगा—यादें भले ही अधूरी हों, पर दिल ने
कभी आदित्य को छोड़ा ही नहीं। शायद उसका दिल उसे पहले से जानता था। शायद प्यार याददाश्त का मोहताज नहीं होता। जानवी ने खिड़की बंद की। लाइट बुझाई। बिस्तर पर लेटी, पर नींद नहीं आई।
आँखें बंद करते ही एक ही सवाल मन में गूंजता रहा—
जानवी :- “अगर मैंने उसे गलत समझा…तो क्या वो अब भी मेरा इंतज़ार कर रहा होगा? 

और इसी सवाल के साथ उसकी बेचैनी और गहरी हो गई और फिर कब उसकी निंद लग गई उसे पता ही नही चला ।

दुसरे दिन विक्की अपने ऑफिस के केबिन में अकेला बैठा था।
टेबल पर पड़ा फोन लगातार जल-बुझ रहा था।

“कोर्ट ने मोनिका की प्रेगनेंसी की जांच का आदेश दिया है।”
ये लाइन उसके दिमाग में हथौड़े की तरह बज रही थी। उसका हाथ काँप गया और धिरे बुदबुदाया ---

विक्की :- “अगर ये शमिका को पता चल गया…”

उसने खुद से बुदबुदाया।

शमिका। जिसके नाम पर उसका बिज़नेस खड़ा था , जिसके भरोसे उसने दुनिया में अपनी पहचान बनाई थी।

विक्की जानता था—जांच का मतलब था , डीएनए । विक्की बहोत परेशान हो गया , विक्की को लगा था के मोनिका ने Abortion करा लिया होगा , पर ऐसा ना होने पर विक्की को मोनिका पर बहोत गुस्सा आ रहा था ।

जैसे ही मेडिकल रिकॉर्ड बाहर आई तो सच का बाहर आना तय था ,
और सच का मतलब था— उसका सब कुछ खत्म। उसने गुस्से में फोन उठाया और मोनिका का नंबर डायल कर दिया।

इधर मोनिका का फोन रिंग होने लगता है , मोनिका विक्की का नम्बर दैथकर समझ जाती है के विक्की उसे क्यों कॉल रहा है , मोनिका फोन को देखकर उसे विक्की पर गुस्सा आनो लगता है क्योकी विक्की ने जो उसको साथ किया था ये सब उसी का फल था । मोनिका फोन रिसिव करती है और कहती है --

मोनिका :- बोलो , अब क्यों फोन क्या है ?

विक्की :- “तुम्हें अक़्ल नहीं है क्या?!”

फोन उठते ही विक्की चिल्लाया। मोनिका सन्न रह गई , विक्की फिर कहता है ---

विक्की :- “तुम्हें कोर्ट में जाने की ज़रूरत ही क्या थी?”

वो लगभग गरज रहा था और बार - बार गुस्सा होकर कहता है --

विक्की :- “मैंने कहा था ना—चुप रहो, Abortion का लो , सब संभल जाएगा!” पर नही तुम्हों तो .... । क्या जरुरत थी ये सब करने की ?

मोनिका :- “विक्की… मैंने—”
मोनिका की आवाज़ काँप रही थी।

विक्की :- “चुप!”
विक्की ने बात को काट दिया।

विक्की :- “तुम्हारी वजह से मेरी ज़िंदगी बर्बाद होने वाली है। मैने तुम्हें पैसे दिए , अगर और चाहिए था तो बोल देती , पर ये ड्रामा करने की क्या जरुरत थी ।

विक्की :- “तुम जानती हो अगर जांच हुई तो क्या होगा?

उसकी आवाज़ ज़हर से भरी थी।

विक्की :- “सबको पता चल जाएगा कि बच्चा किसका है और शमिका अगर एक बार जान गई, तो ना सिर्फ़ रिश्ता खत्म होगा—मेरा बिज़नेस भी डूब जाएगा।”

विक्की अपना सर पकड़कर कहता है --

विक्की :- “मैंने तुम्हें सिर्फ़ टाइम पास समझा था, पर तुमने उसे प्यार समझ लिया—ये तुम्हारी गलती है तुम्हें तो एक अम्ल बॉयफ्रेंड चाहिए था ना , अपने शौक पुरे करने के लिए और मुझे एक लड़की चाहिये था टाईमपास करने की । तो हम दोनो ने ही अपने - अपने फायदे के लिए एक दुसरे का इस्तेमाल किया । तो फिर इसमे ना तुम्हारी गलती है और ना मेरा , फिर भी मैने तुम्हें 10 लाख दिया , एक रात के लिए 10 लाख और बदले मे तुमने क्या किया , मुझे फसाने की कोशिश ।

विक्की से इतना सुमकर मोनिका के कानों में सीटी-सी बजने लगी।

मोनिका विक्की से कहती है --

मोनिका :- “मैंने तुम पर भरोसा किया था और तुमने क्या किया , मेरा नशा होने का फायदा उठाया और कहते हो गलती दोनो की है ।

विक्की :- “भरोसा?”
विक्की हँस पड़ा।
विक्की :- “तुम जैसी लड़कियाँ भरोसे के काबिल नहीं होती , तुम्हें क्या लगता था , के मैं तुम पर लाखो रुपये सिर्फ ऐसे ही खर्च करता था । नही मोनिका , मैने कहा ना , तुम्हें एक अमीर बॉयफ्रेंड चाहिए था और मुझे तुमसे एक रात । 

मोनिका: - मैने तुम पर भरोसा करके बहोत बड़ी गलती की है , और आगे अब जो भी होगा वो अच्छा ही होगा ।

विक्की :- “सुनो,”

विक्की की आवाज़ सख़्त हो गई।
 विक्की :- तुन्हारी इसी बेवकूफी के कारण अगर एक भी शब्द शमिका तक पहुँचा—तो याद रखना, मैं तुम्हें कहिका नही छोड़ूगां और ये मत भूलो—मैंने तुम्हें पैसे दिए थे।”

विक्की ने फोन काट दिया। मोनिका हाथ में फोन पकड़े
खामोश बैठी रही। आँखों से आँसू नहीं निकले—क्योंकि अब आँसू भी
थक चुके थे।

उधर विक्की आईने के सामने खड़ा था। अपने ही चेहरे को देखता हुआ बोला—

विक्की :- “मुझे बचना है… किसी भी कीमत पर , ये बात शमिका तक नही पहूँचनी चाहिए ।

उस पल वो जानता था—अगर जांच हुई, तो मोनिका नहीं—वो खुद फँसेगा।

मोनिका के सामने अब दो ही रास्ते थे—सच कबूल करना
या इस झूठ में और गहराई तक डूब जाना पर कब तक मोनिका झुट को दबा के रखता ।


इधर विक्की अपने घर मे बैठा था तभी शमिका वहां पर आ जाती है , शमिका को दैखकर विक्की तो पहले बहोत डर जाता है , विक्की घबराते हूए शमिका से कहता है --

विक्की :- श... शमिका , तुम यहां , इस वक्त ?

शमिका :- क्यों मैं यहां नही आ सकती ?

विक्की :- नही .. मेरा वो मतलब नही था ।

शमिका :- सुबह से तुम्हारा फोन ट्राय कर रहा हूँ । कहां थे तुम , सुबह से ना कोई फोन कॉल और ना कोई मेसेज , मैं तुम्हारे आफिस भी गई थी पर वहां पर पता चला के तुम जल्दी नकल गए हो , मुझे तुम्हाकी फिक्र होने लगी तो मैं यहां पर आ गई ।

विक्की :- हां ... वो मुझे थोड़ा ठिक नही लग रहा था , इसिलिए मैं यहां पर आ गया । 

शमिका :- क्या हूआ , सब ठिक तो है ना ?

विक्की :- हां .. सब ठिक है , तुम चितां मत करो , आओ बैठो ।

शमिका विक्की के पास बैठ जाती है तभी विक्की के फोन पर एक मेसेज आता है , विक्की फटाक से फोन उठा लेता है ताकी शमिका को ना दिखे । ये दैखकर शमिका को कुछ अजीब सा लगा । विक्की शमिका से छुपाकर मेसेज पड़ने लगता है । मेसेज पड़ने के बाद विक्की अपना फोन के स्क्रीन को उल्टा कर के टेबल पर रखता है ताकी शमिका को ना दिखे ।

दुसरे दिन भी ऐसा ही होता है , जब भी शमिका विक्की के ाथ होती , विक्की शमिका से अपना फोन छुपाकर रखता था । ये सब शमिका कुछ अजीब सा लग रहा था । शमिका दैखती है के पिछले कुछ दिनों से विक्की वैसा नहीं था।
वो फोन को हमेशा उल्टा रखता। मैसेज आते ही स्क्रीन से दूर चला जाता। कॉल्स बालकनी में जाकर लेने लगा था।शमिका ने कुछ नहीं कहा— बस नोटिस करती रही।

एक दिन शमिका विक्की के घर मे उसका वेट कर रही थी , विक्की देर से घर लौटा , आज विक्की शमिका का कॉल तक नही उठाया था और ना ही मेसेज किया था , पहले वो मैसेज करता था—

विक्की घर आता है और दैखता है के शमिका पहले से ही उसके घर पर बैठी है तो विक्की शमिका को दैखकर हैरान हो जाता है और कहता है --

विक्की :- श.. शमिका , तुम यहां पर ?

ये सुनकरव शमिका विक्की से कहती है --

शमिका :- जब भी मैं यहां पर आती हूँ , तुम्हें शायद मेरा आना अच्छा नही लगता है ।

 जब शमिका ने पूछा, वो हड़बड़ा गया।

विक्की :- नही , ऐसी कोई बात नही है , वो नेटवर्क नहीं था , बस इसिलिए आज बात नही हो पाया ।

शमिका ने बिना कुछ कहे सिर हिलाया। पर उसके मन में एक लाइन गूंज गई—

शमिका :- नेटवर्क नहीं था या कुछ और बात है।

शमिका विक्की के पास जाकर कहती है --

शमिका :- विक्की, कुछ दिन बाद हम शादी करने वाले है , तुम सच तो बोल रहे हो ना ? या फिर तुम किसी और लड़की से ...

विक्की :- नही शमिका. . ये तुम क्या बोल रही हो ? मैं सिर्फ तुमसे प्यार करता हूँ ।

शमिका :- तो फिर तुम कुछ दिन से मुझसे दुर - दुर क्यों रहने लगे । क्या बात है जो तुमसे ऐसा करा रही है ।

विक्की मन ही मन सौचता है --

" ये शमिका से अब मैं क्या बताउ के मैं उससे इसलिए दुर रहता हूँ ताकी मेरे बारे मे उसे पता ना चले ।

तभी विक्की के फोन पर मोनिका का कॉल आता है , विक्की मोनिका का कॉल दैखकर चोंक जाता है । मोबाईल काफी दैर तक रिंग होता है पर विक्की ती हिम्मत नही होती को फोन को रिसिव करे ।

मोनिका बार - बार फोन किये जा रही थी , और विक्की फोन को साइलेंट कर देता । ये दैखकर शमिका विक्की सो कहती है --

शमिका :- क्या हूआ तुम फोन रिसिव क्यों नही कर रहे हो ? किसका फोन है ?

विक्की :- कुछ नही बस ऐसे ही वो मेरा एक दोस्त का फोन है ।

शमिका :- तो उठा लो , हो सकता है कोई जरुरी काम हो तभी वो इतनी बार कॉल कर रहा है ।

विक्की :- नही वो बस ऐसे ही परेशान करता रहता है , तुम.... तुम छोड़ो ना ये सब ।

तभी एक बार और कॉल आता है , तो विक्की शमिका की और दैखता है और कहता है --
विक्की :- एक मिनट मैं अभी आया ।

इतना बोलकर विक्की अपना फोन उठाता है और वहां से शमिका से कुछ दुर चला जाता है । ये दैखकर शमिका हैरान थी , उसे ये समझ मे नही आ रहा था के आखिर दोस्त से ऐसा क्या बात करेगा के मुझे सुना नही सकता ।

विक्की कुछ दुर जाता है और फौन रिसिव करके दांत भिचतें हूँ दबी आवाज मे कहता है --

विक्की :- तुम... मैने कितनी बार कहा है के तुम मुझे कॉल मत करना , जब मैं तुम्हारा कॉल नही उठा रहा हूँ तो बार - बार कॉल करने की क्या जरुरत है ।

मोनिका :- तुमने चो मेरे साथ किया है , उसके लिए तुम्हें शर्म नही आती , और जब मैं कॉल रही हूँ तब तुम्हें बुरा लग रहा है । आज मैं जो इतनी बड़ी मुसीबत मे फंस गई हूँ उसकी वजह सिर्फ तुम हो । तुमने शादी से मना कर दिया, और जब मेरे पास कोई रास्ता नही बचा तब मैं सबसे झुट बोलकर आदित्य से शादी करना चाहा , ताकी मेरा और इस बच्चे की जिंदगी सुधर जाएगी । 

विक्की :- तुम इस मुसीबत मे खुद फसी हो ना की मेरे वजह से , मैने तुम्हें पहले ही कहा था के Abortion करा लो पर नही तुम्हें तो इस बच्चे को लेकर शादी करनी है । तुम्हें पैसा भी दिया ताकी तुम उस पैसे से कुछ कर सको ।


To be continue.....795