(सुबह। सुनीति आईने के सामने खड़ी है। उसका चेहरा थोड़ा थका हुआ, पर आँखों में अजीब चमक।)
सुनीति (खुद से) बोली -
“पता नहीं क्यों…आज दिल कुछ अलग ही महसूस कर रहा है।”
(वो हल्की-सी चक्कर खाकर कुर्सी पकड़ लेती है।)
(किचन से कौशिक दौड़कर आता है।)
कौशिक (घबराकर) बोला -
“सुनीति! क्या हुआ?
तबियत ठीक नहीं है क्या?”
सुनीति (धीमे से मुस्कुराकर) बोली -
“नहीं…बस… कुछ अलग-सा लग रहा है।”
(कौशिक उसका हाथ थाम लेता है। उसकी धड़कन तेज़ हो जाती है।)
(क्लिनिक।
दोनों पास-पास बैठे हैं।)
(डॉक्टर रिपोर्ट देखती है, फिर मुस्कुरा देती है।)
डॉक्टर बोली -
“Congratulations…
आप माँ बनने वाली हैं।”
(सुनीति की आँखें भर आती हैं। कौशिक कुछ पल बोल ही नहीं पाता।)
(क्लिनिक के बाहर। सुनीति बेंच पर बैठ जाती है।)
सुनीति (काँपती आवाज़ में) बोली -
“कौशिक जी…क्या ये सच है?
हम… हम तो सोचते थे…”
(कौशिक घुटनों के बल उसके सामने बैठ जाता है।)
कौशिक बोला कि
“हाँ…ये सच है।
हमारी ज़िंदगी ने हमसे हार मान ली।”
(वो उसका माथा चूम लेता है।)
(घर।
सुनीति बिस्तर पर लेटी है।)
(वो अपने पेट पर हाथ रखती है। उसकी हथेली काँप रही है।)
सुनीति (आँसू भरी मुस्कान के साथ) बोली -
“इतना कुछ सहने के बाद… भगवान ने हमें ये तोहफ़ा दिया?”
(कौशिक उसके पीछे आकर बैठ जाता है और उसके हाथ पर अपना हाथ रख देता है।)
(अचानक सुनीति की आँखें फैल जाती हैं।)
सुनीति (धीरे से) बोली -
“कौशिक जी…कुछ…कुछ हिला…”
(कौशिक की साँस अटक जाती है।)
कौशिक बोला -
“क्या?
सच?”
(वो भी अपना हाथ रखता है।)
(एक हल्की-सी हरकत।)
(दोनों की आँखों से आँसू बह निकलते हैं।)
सुनीति (रोते हुए) बोली -
“जिस दुनिया ने हमसे सब छीन लिया था…
उसी दुनिया ने हमें ये दे दिया।”
कौशिक (भर्राई आवाज़ में) बोला -
“ये हमारी पहली खुशी है, सुनीति…तुम्हारी गोद में।”
(वो उसे कसकर सीने से लगा लेता है।)
(कमरे में शांति। दीपक जल रहा है।)
कौशिक बोला -
“मैं वादा करता हूँ…हमारा बच्चा कभी अदृश्य दर्द नहीं देखेगा।”
सुनीति बोली -
“और उसे बताया जाएगा कि उसका जन्म प्यार और बलिदान से हुआ है।”
कभी अदृश्य हो चुके दो दिलों को ज़िंदगी ने अब एक नई पहचान दी थी।
सुनीति की गोद में अब सिर्फ़ सुकून नहीं था—
एक नई ज़िंदगी थी।
नौ महीने बाद
(अस्पताल का कमरा। हल्की रोशनी। एक नवजात की हल्की-सी रोने की आवाज़ गूंजती है।)
डॉक्टर (मुस्कुराते हुए) बोलीं -
“बधाई हो…आपके घर एक प्यारी-सी बेटी आई है।”
(सुनीति थकी हुई है, पर उसकी आँखों में चमक है।)
सुनीति (कमज़ोर पर खुश आवाज़ में) बोली -
“कौशिक जी…हमारी… बेटी…”
(कौशिक की आँखें भर आती हैं। वो कांपते हाथों से बच्ची को देखता है।)
(कमरे में शांति। कौशिक सुनीति के पास बैठा है।)
कौशिक बोला -
“इसने हमारी ज़िंदगी में रोशनी भर दी है।”
सुनीति (मुस्कुराकर) बोली -
“इसका नाम होगा…सीया।”
(कौशिक सिर हिलाता है।)
कौशिक बोला -
“सीया…हमारी जीत।”
(कुछ दिन बाद। नया फ्लैट। घर में हल्की खुशबू, दीपक जला हुआ।)
(सुनीति सीया को झूले में सुलाती है। कौशिक उसे दूर से देखता है—उसकी आँखों में गहरा प्यार।)
(कौशिक धीरे-धीरे सुनीति के पास आता है।)
कौशिक (धीमे स्वर में) बोला -
“तुमने…सब कुछ सहा है, सुनीति।”
(वो उसके चेहरे को थाम लेता है और उसके होंठों पर एक गहरा, भावनाओं से भरा चुंबन देता है।)
(सुनीति कोई विरोध नहीं करती बस उस पल को महसूस करती है।)
(कई मिनट बाद कौशिक धीरे से पीछे हटता है।)
सुनीति (हल्की सांस लेते हुए) बोली -
“कभी-कभी बिना कहे भी सब समझ में आ जाता है।”
(कुछ देर बाद। कौशिक सीया को गोद में उठाता है।)
(घर का मंदिर। दीपक, अगरबत्ती।)
कौशिक (नम आँखों से) बोला -
“भगवान…इस बच्ची को हर अदृश्य दर्द से बचाना।”
(सुनीति पास खड़ी है। उसकी आँखों से शांति झलकती है।)
सुनीति बोली -
“अब हमारी दुनिया पूरी है।”
एक कहानी जो अदृश्य से शुरू हुई थी, आज एक नन्ही-सी मुस्कान पर आकर थम गई।
सुनीति और कौशिक ने विज्ञान, डर और बलिदान से लड़कर
प्यार को जीतते देखा।
और सीया उनके प्रेम की सबसे सुंदर, सबसे दृश्य पहचान बन गई।
🌼 THE END 🌼