मोनिका वहां से उठती है और बाहर आ जाती है , अब मोनिका के चेहरे पर एक हल्की मुस्कान थी , क्योकी मोनिका ने अपना पहला चाल चल दिया था । जानवी के दिल मे आदित्य के लिए नफरत पैदा कर दिया था ।
इधर आदित्य अपने घर पर उदास बैठा था , वहां पर रश्मि , कृतिका और रमेश भी चुपचाप बैठा था तभी वहां अशोक आदित्य के पास आता है और उसके पास बैठकर आदित्य के कंधे पर हाथ रखता है अशोक को दैखकर आदित्य अपने जगह से उठ जाता है और कहता है ---
आदित्य :- अरे पापा , आप यहां ?
अशोक :- हां बेटा , मुझे तुमसे कुछ बात करनी है । इसिलिए मैं यहां पर आया हूँ ।
आदित्य :- अ....हां ... कहिए ना क्या बात है ।
अशोक :- बेटा , मैने आज डॉक्टर से बात किया और जानवी को भी दैखा , वो अभी जिस कंडीसन मे है , वो तुम्हें पंसद करती है ये बात वो पुरी तरह से भूल चुकी है ।
आदित्य इस बात पर और भी मायुस हो जाता है , अशोक अपनी बात जारी रखते हूए कहता है ---
अशोक :- बेटा ... मुझे गलत मत समझना , मैं जानवी को यहां से लेकर अपने घर ले जाना चाहता हूँ ।
अशोक से इतना सुनकर आदित्य को ऐसा लगा जैसे कोई उसकी खुशी , उसका दिल उससे दूर ले जाने की बात कर रहा हो , पर आदित्य कुछ नही पा रहा था क्योकी हॉस्पिटल मे जानवी ने खुद उसे उससे दुर रहने को बोला था ।
तभी कृतिका कहती है --
कृतिका :- ये आप क्या बोल रहे हो अंकल , अगर जानवी यहां से चली जाएगी , तो फिर वो तो आदित्य से और दूर हो जाएगी और अगर जानवी यहां पर रही तो उसे पिछली बाते याद आने की चांसेस ज्यादा होगी ।
अशोक :- बेटा , मैं नही जानता हूँ के मैं ये अच्छा कर लहा हूँ या बुरा , पर एक बाप होने के नाते मैं उसे और प्रॉब्लम मे नही दैख सकता , जानवी पिछली बाते भूल चुकी है और अगर अब वो यहां पर रही तो पता नही वो गुस्से मे क्या करोगी ।
कृतिका :- पर अंकल ....!
कृतिका कुछ बोलना चाहती थी पर आदित्य कृतिका की हाथ को पकड़कर उसे और कुछ बोलने से मना कर देता है । और फिर आदित्य कहता है --
आदित्य :- आपको जैसा ठिक लगे पापा , आप जानवी को अपने साथ ले जा सकते हो । वैसे भी हमारा हमने डिवोर्स पेपर पर साईन कर दिया है तो अब जानवी पर मेरा कोई हक तो बनता नही है ।
आदित्य की बात पर अशोक को भी बहोत दुख होता है पर वो भी करता भी क्या । अशोक कहता है --
अशोक :- मैं हमेशा से ही ये चाहा है तुम और जानवी एक साथ रहो , पर शायद नियती को ये मंजूर नही । मैं मजबूर हूँ बेटा , मुझे उसे अपने साथ ले जाना ही होगा ।
अशोक आदित्य के सामने हाथ जोड़ता है तो आदित्य अशोक का हाथ झट से पकड़ लेता है और वहां से चला जाता है । अशोक भी भारी मन से वहां से चला जाता है ।
कृतिका और बाकी सभी भी बहोत दुखी होता है । रात हो चुका था करीब 11 बज रहा था , आदित्य अपना फोन निकालता है और रागिना को कॉल करता है ।
रागिनी :- हां आदित्य बोलो ।
आदित्य :- रागिनी वो जानवी कैसी है ?
रागिनी :- वो बिलकुल ठिक है , तुम टेंशन मत लो ।
आदित्य :- हां ठिक है ।
आदित्य रोज रागिनी और वहां के नर्स से रोज कभी मिलकर तो कभी फोन पर जानवी की सेहत का खबर लेता । कुछ दिन बाद आदित्य दोबारा रागिनी को कॉल करता है --
रागिनी फोन रिसिव करती है ऐर आदित्य के बोलने से पहले ही कहती है ---
रागिनी :- आदित्य ... जानवी बिल्कुल ठिक है , स्वस्थ है , और कल उसे डिसचार्ज भी मिल जाएगा , और कुछ पूछना है ?
आदित्य :- नही वो , बस यही जानना था । , पर तुम्हें कैसे पता के मैं यही पूछने वाला हूँ ?
रागिनी :- तुम हर रोज एक सवाल करते हो । तुम मेरा हसबैंड क्यों नही बना आदित्य ?
आदित्य :- क्योंकी तु मेरे से भी अच्छा डिजर्व करती है ।
रागिनी :- बहाना बनाना तो कोई तुमसे सीखे । सच मे , मुझे जानवी से जलन होती है , के जो लड़का बचपन से मेरे साथ रहा वो मुझे नही मिला और भी तो किसे जो तुम्हें अपना मानती ही नही ।
आदित्य :- दैखना एक दिन वो जरुर आएगी ।
रागिनी :- मैं भी यही चाहता हूँ आदित्य, के वो तुम्हारे पास आ जाए ।
आदित्य :- अच्छा ठिक है अब मैं रखता हूँ ।
रागिनी :- ओके , बाय ।
दुसरे दिन अशोक ने डॉक्टर की इजाज़त मिलते ही वह जानवी को अपने घर ले जाने के लिए हॉस्पिटल से बाहर आया । जानवी अब भी बहोत कमजोर थी इसिलिए अशोक उसे संभलकर कार तक ले कर आया था ।
अशोक नहीं चाहता था कि जानवी उस आदमी के पास रहे
जिसे देखकर उसकी बेटी की साँसें तेज़ हो जाती थीं,
जिससे उसे डर लगता था, और जिसे अब उसका दिल पहचानने से इनकार कर रहा था।
अशोक जानवी से कहता है --
अशोक :- चले बेटा ?
जानवी :- पापा मुझे आदित्य के घर पर लेकर चलो ।
अशोक हैरान हो जाता है , अशोक जानवी से पुछता है --
अशोक :- पर बेटा , तुं तो वहां पर जाना ही नही चाहती हो ना ?
जानवी :- हां पापा ।
अशोक :- तो फिर अब क्यों ?
जानवी :- मेरा कुछ सामान वहां पर है , जिसे मैं वहां पर नही रख सकती । उस इंसांन के पास मेरा एक भी सामान नही रहेगा ।
अशोक :- ओके बेटा , पर अभी हम घर चलते है उसके बाद मैं वो सब लेकर आऊगां ।
जानवी :- नही पापा , आप चिंता मत करो , मैं बिल्कुल ठिक हूँ । आप चलो वहां पर ।
आदित्य घर के बाहर खड़ा रह गया। न कोई शिकायत, न कोई सवाल। बस चेहरे पर एक उदासी , तभी वहां पर अशोक की कार आकर रुकती है , आदित्य दैखता है के उसमे जानवी बैठी थी ।
आदित्य जानवी को दैखकर खुश हो गया था , उसे लगा के जानवी यही पर रहने के लिए आई है , कृतिका , रमोश और रश्मि भी बाहर आ गया था , आदित्य जैसे ही कार की तरफ अपना कदम बड़ाता हा कार से अशोक उतरता है , आदित्य अपने बज़ते कदमो को रोक लेता है ।
आदित्य अशोक के पास आता है और अशोक आदित्य से कहता है --
अशोक :- वो... जानवी ने कहा के तुम्हारे घर चलना है तो ...
आदित्य के चेहरे पर एक खुशी झलक उठी ।
आदित्य :- हां , तो जानवी बैठी क्यों है ।
इतना बोलकर आदित्य जानवी की और बड़ने लगता है तो अशोक आदित्य के हाथ को पकड़कर उसे रोक लेता है , और ना मे इशारा करके कहता है --
अशोक :- नही बेटा । वो यहां पर सिर्फ अपना सामान लेने आई है ।
आदित्य के दिल को ये सुनकर बहोत दुख हूआ ।
आदित्य :- ओ , सॉरी सर .. आप जाओ ।
अशोक अंदर चला जाता है , जानवी के सामान को लेने , आदित्य जानवी की और दैखता है , पर जानवी एक बार भी ना आदित्य की ओर , और ना ही घर की दैखती है ।
उसने बस दूर से जानवी को देखा—जो उसकी तरफ देखे बिना गाड़ी में बैठी थी । अशोक अंदर से आता है और जानवी का सामान गाड़ी मे चड़ा कर कार को स्टार्ट करता है , आदित्य जानवी की और दैखते रहता है इस आस मे के जानवी एक बार आदित्य की और दैखे पर जानवी एक बार भी आदित्य की और नही दैखता है । और वहां से चली जाती है , आदित्य को बहोत दुख हूआ के जिस प्यार के लिए उसने इतना कुछ क्या आज वही उससे दुर चला गया ।
उस दिन के बाद आदित्य ने कभी भी जानवी से जबरदस्ती मिलने की कोशिश नहीं की।
वह समझ गया था—अब प्यार साबित करने का तरीका बदल चुका है , वह बस इतना करता है , रोज़ उसके घर के बाहर से निकलता है , मंदिर में जाकर उसके लिए दिया जलाता है , प्रार्थना करता है ताकी उसकी याददास्त जल्दी वापस आ जाए ।
वही गाना सुनता है जो जानवी को पसंद था , और हर रात खुद से एक ही बात कहता है—
आदित्य :- “अगर वो मुझे भूल चुकी है, तो मैं उसे दोबारा जीतूँगा… बिना याद दिलाए।”
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इधर जानवी अपने घरके गार्डन मे बैठी थी , उसको पास लो सब कुछ था जिसे वो चाहती थी , विकास था , घर था और सबसे बड़ी बात आदित्य से छुटकारा पा चुकी थी । पर फिर भी उसका मन असाॉत था , इसे हर वक्त खाली खाली सा लगने लगा था , सब कुछ पास होते हूए भी एक खाली पन था । उसे बार-बार ऐसा लगता है— जैसे उसकी ज़िंदगी का कोई हिस्सा कहीं छूट गया हो।
कुछ गाने सुनकर उसकी आँखें भर आती हैं , कुछ जगहों के नाम सुनकर सिर दर्द होने लगता है , कभी-कभी नींद में उसे एक ही सपने आती , वही जब जानवी आदित्य को बचाती है —
रात हो चुकी थी जानवी अपने कमरे मे सो रही थी । तभी जानवी को सपने मे वो पल याद आता है जब वो ट्रक आदित्य को मारने के लिए आ रहा था । जानवी सपने मे ही आदित्य को धक्का देती है और चिल्लातीकर उठकर बैठ जाती है --
जानवी: - आदित्य ......!
जानवी अपने आसा पास दैखती है तो वहां पर कोई नही था , उसके चेहरे पर पसीने की बड़ी बड़ी बूंदे टपक रही थी । जानवी अपने चेहरे से पसीने को पोछती है और वहां पर रखी पानी को पिता है और कहती है ---
जानवी :- ये कैसा सपना था , जो रोज - रोज मुझे परेशान करता है! मैं आदित्य को क्यों बचा रही थी ?
जानवी के पास अपने सवाल की जवाब नही था इसिलिए जानवी फिर से सोने कोशिश करती है और उसकी आंख लग जाती है , सुबह जानवी अपना चेक- अप के लिए हॉस्पिटल रागिनी के पास जाती है , जहां पर रागिनी जानवी की चेक - अप करती है और कहती है --
रागिनी :- हम्म । अब तुम बिल्कुल नॉर्मल हो ।
जानवी :- डॉक्टर , उस दिन जोसकुछ भी हूआ था , क्या वो मुझे कभी याद आएगा ?
रागिनी :- ये कहना मुश्किल होगा , कभी भी आ सकती है या फिर ही भी ।
जानवी :- डॉक्टर मुझे हर रात सिर्फ ओक ही सपना आता है ।
रागिनी :- सपना ! कैसा सपना ?
जानवी :- मैं दैखती हूँ के एक ट्रक आदित्य को मारने आ रही है और मैं उसे बचा रही हूँ ।
रागिनी :- ये तुम रोज दैखती हो ?
जानवी:- हां , रोज यही सपना मुझे सोने नही देती । ये कैसा सपना है डॉक्टर ?
रागिनी :- हो सकता है के उस दिन तुम दोनो के साथ यही हूआ हो , तुम उसे बचा लेती हो और ट्रक ने फिर तुम्हें टक्कर मारा हो , दिस वजह से तुम हॉस्पिटल मे थी ।
रागिनी की बात पर जानवी सोचने पर मजबुर थी , जानवी मन ही मन सौचती है --
जानवी :- क्या ये सच है या मेरा वहम ।
रागिनी यह सब नोटिस करती है। और हल्की मुस्कान के साथ सोचती है ---
रागिनी :- आदित्य का प्यार तुम्हें उसे भूलने नही देगा । तभी जानवी वहां पर रखी फाईल को दैखती है । जानवी अस्पताल की फाइल देखती है , उसमे उसकी रिपोर्ट थी , जानवी को उसमे बार-बार एक ही नाम दिखता है—
Emergency Contact: Aditya
उसका दिल अजीब तरह से धड़कता है पर दिमाग मना करता है , लेकिन दिल पहली बार खामोशी से कहता है --
जानवी :- क्या मैं आदित्य को पहचानने मे कोई गलती कर रही हूँ ।
वह रागिनी से पूछती है—
जानवी :- क्या… आदित्य ने मुझे यहां पर लाया था ?
रागिनी सच छुपाती नही और कहती है --
रागिनी :- हां । पर भी तुम्हें याद नहीं।”
उस दिन के बाद जानवी रोज याद करने की कोशिश करती पर उसे कुछ यात नही आता ।
जानवी उस जगह पर जाती है जहां पर उसका एक्सीडेंट हूआ था , वहां जाकर वो जगह को दैखती है सब कुछ याद करने की कोशिश करती है पर उसे कुछ याद नही आ रहा था ।
मोनिका यह सब देख रही होती है।
वह जानती है— अगर जानवी की याद वापस आ गई,
तो उसका खेल खत्म। मोनिका जानवी के पास सहानुभूति बनकर आती है और कहती है --
मोनिका: - अरे जानवी तुम यहां ?
जानवी :- अच्छा हूआ मोनिका तुम मुझे मिल गई । उस दिन तुम भी यही पर थी ना , यही वो जगह है ना ?
मोनिका :- हां जगह तो यही है पर तुम यहां पर क्या ढुंढ रही हो ?
जानवी :- अपने आप को ढुंढ रही हूँ । याद करने की कोशिश कर रही हूँ ।
ये सुनकर मोनिका चोंक जाती है और मन ही मन कहती है --
मोनिका :- ये जानवी तो यहां तक पहूँच गई , मुझे लगा था के प्रेग्नेंसी की झुटी बात बताउंगी तो ये आदित्य से दुर हो जाएगी , पर ये तो वो सब याद करने की कोशिश करती है , नही नही एगर ऐसा हो गया , तो मेरा खेल खत्म हो जाएगा । तभी मोनिका कहती है --
मोनिका :- मुझे सब याद है , तुम मुझसे पूछो ना , आदित्य ने एक्सीडेंट से पहले तुम्हें धोखा दिया था।” और तुम टेशन मे थी उसके बाद तुम्हारा एक्सीडेंट हूआ था ।
वह झूठे सबूत दिखाती है—कुछ बदले हुए मैसेज ,आधी-अधूरी तस्वीरें
और कहती है --
मोनिका :- ये दैखो उसने मुझसे शादी का वादा किया था , फिर मेरे साथ वो सब किया और मुझे धोका दिया , फिर उसने तुम्हारी शादी रोकी , ताकी तुम विकास के साथ शादी करके चली ना जाओ , जिससे उसकी प्लानिंग फेल हो जाती और तुम्हारी सारा पैसा उसके हाथो से चला जाता । वो मुझसे कहता के एक बार जानवी की प्रॉपटी मेरी हो जाए उसके बाद वो यो शहर छोड़ देगा । शायद इसिलिए उस दिन जब तुम उसे छोड़ने की बात करी तो उसे लगा के उसके हाथ से सब कुछ चला जाएगा , इसलिए उसने तुम्हें रास्ते से हटाने की कोशिश करा होगा ।
To be continue.....699