जानवी :- अगर तुम दोबारा मेरे सामने आए तो कसम से मैं अपनी जान दे दूगी , आज के बाद अगर तुम्हारा चेहरा मेरे सामने भी आया तो उसी समय मैं अपनी जान दे दूगी । यही चाहते हो ना तुम ।
जानवी सी सांसे तेज हो जाती है और जौर - जौर से सांस लेने करती है , जानवी टुटती हूई आवाज से कहती है ---
जानवी ( आवाज निकल नही रही थी ) :- च....ले जाओ......यहां से .....!
जानवी ने काँपती आवाज़ में आदित्य की तरफ उंगली उठाई—
जानवी :- “प–पास… मत आओ… दूर जाओ…!”
उसकी आवाज़ कमज़ोर थी लेकिन गुस्सा उसकी आँखों में साफ दिख रहा था।
आदित्य: - न... नही जानवी , , ठिक है , म... मैं जाता हूँ । मैं जाता हूँ ।
आदित्य रागिनी को बुलाता है --
आदित्य :- रागिनी , दैखो ना जानवी को क्या हो रहा है ।
आदित्य की आवाज सुनकर रागिनी जल्दी से अंदर आती है और जानवी को पास जाती है ।
आदित्य कुर्सी से धीरे से उठता है , उसके पैर जैसे भारी हो जाते हैं।
जानवी की हालत देखकर रागिनी तेज़ी से उसके पास आती है।
वह जानवी का हाथ पकड़कर धीरे से उसके सिर पर हाथ फेरती है।
रागिनी (बहुत नरम स्वर में): - “जानवी… जानवी, शांति से… कुछ नहीं हुआ। वो तुम्हें कोई नुकसान नहीं पहुँचाएगा , ये आदित्य है… लेकिन अभी तुम उसे पहचान नहीं पा रही हो , ठीक है, ठीक है… आराम से साँस लो…”
रागिनी आदित्य को इशारे से पीछे हटने के लिए कहती है , आदित्य चुपचाप पीछे चला जाता है ताकि जानवी को और डर न लगे।
रागिनी फिर जानवी से कहती है—
रागिनी :- “जानवी, तुम्हारी साँसें इसलिए तेज़ हो रही हैं क्योंकि तुम घबरा गई हो…तुम्हारा दिमाग अभी रिकवर कर रहा है , मैं यहीं हूँ… तुम्हें कुछ नहीं होने दूँगी। सांत हो जाओ , सब ठिक हो जाएगा ।
जानवी धीरे-धीरे शांत होने लगती है, और कहती है ---
जानवी :- “ये आदमी फिर से यहां नही आना चाहिए ।”
रागिनी :- ठिक है , ठिक है , अब वो नही आएगा ।
रागिनी आदित्य की और मायुस होकर दैखती है जैसे रागिनी कह रही हो ---
I am sorry आदित्य ।
आदित्य दरवाजे पर पहुँचकर वह आख़िरी बार मुड़कर देखता है— शायद उसकी आँखों में वो प्यार फिर दिख जाए…पर जानवी ने चेहरा दूसरी ओर फेर लिया था।
आदित्य बाहर आता है , रागिनी बाहर आकर उसे देखकर रागिनी कहती है ---
रागिनी :- “बहुत मुश्किल है ना… जब वो सब भूल गई हो जो तुम्हारे लिए दुनिया था?”
आदित्य की आँखें लाल हैं, लेकिन आँसू नहीं गिर रहे।
आदित्य (टूटा हुआ) :- “वो मुझसे फिर से नफरत करती है…
फिर वही पुराने वाले दिन याद हैं उसे , मैं क्या करूँ, रागिनी? कैसे बताऊँ कि वो मुझे प्यार करती थी… कि उसने मेरे लिए जान तक दे दी… कि कल रात उसने— सब कुछ खत्म हो गया रागिनी ।
उसकी आवाज़ रुक जाती है , रागिनी उसके कंधे पर हाथ रखती है।
रागिनी :- “प्यार ख़त्म नहीं हुआ है, आदित्य…बस छुप गया है।
वो याद करेगी—धीरे-धीरे , तुम बस उसके पास रहो… भले वो तुम्हें दूर धकेले।”
आदित्य धीरे से सिर झुका देता है और कहता है --
आदित्य: - वो मुझे दैखना ही नही चाहती रागिना , ये सब क्या हो गया यार , कल जब मैं उसे I Love you बोलने वाला था तो उसने मुझसे कहा के अभी नही , बाद मे । पर आज उसे ये सब याद ही नही है ।
रागनी :- तुम चिंता मत करो सब ठिक हो जाएगा । पर मुझे तुम्हें बोलने मे बुरा लगता रहा है पर अभी तुम जानवी के पास मत जाओ ।
रागिनी से सुनकर आदित्य और भी मायुस हो जाता है , रागिनी आदित्य से कहती है --
रागिनी :- सॉरी आदित्य मैं समझ सकती हूँ के ये सब तुम्हारे लिए कितना मुश्किल है , पर एक डॉक्टर होने के नाते मुझे ये तुमसे कहना पड़ रहा है ।
आदित्य :- मैं समझ सकता हूँ ।
अशोक आदित्य के कंधे पर हाथ रखता है , तब आदित्य कहता है --
आदित्य :- पापा , अब जानवी को मैं आपके पास छोड़कर जा रहा हूँ । आप उसका ख्याल रखना और कभी भी मेरी जरुरत पड़े तो मुझे जरुर बताना , मैं हमेशा जानवी से आस पास ही रहूँगा , उसकी नजरो से छुपकर ।
आदित्य इतना बोलता है और वहां जाने लगता है तो उसके साथ कृतिका , रमेश और रश्मी भी चली जाती है ।
लोकेशन: हॉस्पिटल की पार्किंग — रात, हल्की हवा चल रही है।
आदित्य और उसके दोस्त जानवी के कमरे से बाहर निकलते ही मोनिका सामने आ जाती है।
मोनिका (हल्की मुस्कान के साथ, रास्ता रोकते हुए):
मोनिका: - “क्यों आदित्य… कैसा लग रहा है , वो जानवी… अब कुछ भी याद नहीं उसे। न प्यार… न वो रात… न तुम्हारा प्रपोजल।”
आदित्य (गुस्से से दाँत भींचकर):
आदित्य: - क्यों आई हो यहां , “तुम चाहती क्या हो मोनिका?”
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मोनिका (एक कदम करीब, होंठों पर खेलती मुस्कान):
मोनिका :- “बस… इतना कि तुम मान लो—तुम्हारी किस्मत में मैं हूँ, जानवी नहीं।”
आदित्य पलटकर जाने लगता है, लेकिन मोनिका उसका हाथ पकड़ लेती है।
मोनिका :- “जानवी कभी तुम्हें प्यार नहीं कर पाएगी, क्योंकि मैं उसे बताऊँगी कि तुम क्या हो। कैसे तुमने मुझे धोखा दिया।”
आदित्य: - धोका किस बात का धोका ?
आदित्य (झटके से हाथ छुड़ाता है):
आदित्य :- “सबसे बड़ा धोखा तो तुमने दिया था मोनिका , मुझसे भी… और इंसानियत से भी।”
मोनिका (हँसते हुए, लेकिन आँखों में जुनून):
मोनिका :- “और फिर भी… तुम आज भी मुझे भूल नहीं पाए।
आज भी तुम्हारी आँखों में मेरा डर दिखता है।”
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आदित्य (गंभीर होकर, धीमी आवाज में):
आदित्य :- “डर , तुमसे? नहीं मोनिका…मैं बस तुम्हारे झूठ और ज़हर से जानवी को बचाना चाहता हूँ। और अगर इसे तुम डर समझ रही हो तो तुम बहोत बड़ी बेवकुफ हो मोनिका ।
मोनिका का चेहरा पलभर में बदल जाता है… मुस्कान गायब… एक गहरी ईर्ष्या जग जाती है।
मोनिका: - ठिक है फिर “तो बचा लो। देखते हैं… वो फिर से तुम्हें प्यार करती है या नहीं। क्योंकि मैं उसे कभी नहीं करने दूँगी। पल उसके दिमाग मे तुम्हारे खिलाफ जहर भरुगीं , अगर तुम मेरे ना हूए तो मैं तुम्हें किसी और की होने भी नही दुगीं
आदित्य :- “तुम चाहो या नहीं…मैं जानवी को वापस उसकी ज़िंदगी, उसकी खुशियाँ और… मेरा प्यार दूँगा। वो मेरी ज़िम्मेदारी है—और तुमसे कहीं ज़्यादा मायने रखती है।”
मोनिका (चीखते हुए): - “तुम मेरे बिना जी ही नहीं सकते आदित्य!”
आदित्य (पीछे मुड़कर, ठंडे स्वर में): - “मैं तुम्हारे साथ तो मर भी नहीं सकता।”
रश्मी :- तुम किस तरह की लड़की हो मोनिका , ना शर्म ना लिहाज , कोई लड़की ऐसा कैसै कर सकती है ।
मोनिका: - ये मेरा मेटर है , इससे तुम लोग दुर ही रहो , ये मेरे और आदित्य के बिच का मामला है । तुम लोग इसमे मत पड़ो ।
रमेश :- तुम होती कौन हो ये बोलने वाली , किस हक से तुम ये कह रही हो । ना तुम आदित्य की कुछ लगती हो और ना ही हम लोगो के ।
मोनिका के हाथ कांप जाते हैं… आंखों में आग और आंसू एक-साथ।
वो देखती रहती है…आदित्य दूर चला जाता है , और मोनिका की आँखें पागलपन से भरने लगती हैं—
मोनिका (खुद से बड़बड़ाते हुए): - “जानवी… तुमसे न ये प्यार बर्दाश्त होगा…न मेरा खोना…अब खेल ना सिर्फ आदित्य का है… खेल तुम्हारा भी है।”
मोनिका हॉस्पिटल मे जानवी के कमरे के बाहर जाती है , वहां पर अभी कोई नही था , मोनिका बाहर से ही जानवी को दैखती है और कहती है --
मोनिका :- जानवी तुम्हारी याददाश्त जाना , मतलब मेरा और आदित्य की करिब आने की चांसेस का बड़ना । अब मैं ऐसा खेल खेलूगीं के तुम और आदित्य कभी एक नही हो पाओगी । उस आदित्य को मैं तुम्हारी नजरो से इतना गिरा दुगीं. इतना गिरा दूगीं के तुम उसके पास तो क्या , उसके शक्ल से भी नफरत करने लगोगी ।
मोनिका दैखती है के जानवी अपनी आंखे खोलती है और इधर उधर दैखने लगती है , तब मोनिका एक शैतानी मुस्कान देती है और अपने बेग से अपनी प्रेगनेंसी रिपोर्ट निकालती है और जानवी के कमरे मे चली जाती है , मोनिका को दैखकर जानवी कहती है --
जानवी :- मोनिका , तुम यहां पर ?
मोनिका :- हां , वो मैं कुछ टेस्ट कराने के लिए आई थी तो पता तला के तुम्हारा एक्सीडेंट हूआ है और तुम यही हो तो मैं तुमसे मिलने के लिए चली आई । कैसी तबियत है तुम्हारी?
एक गहरी सांस लेती है और. कहती है --
जानवी :- अभी ठिक हूँ ।
मोनिका :- ये सब कैसे हूआ ?
जानवी: - पता नही कुछ याद नही आ रहा है ।
मोनिका अपनी चाल चलती है और कहती है --
मोनिका :- कल मैं और तुम साथ मे बैठकर कॉफी सॉप मे बात कर रहे थे फिर आदित्य आया और आदित्य ने मुझे वहां से जाने के लिए कहा तो मैं वहां से चली गई , फिर बाद मे आदित्य को मैंने फोन किया तो उसमे तुम दोनो की झगड़े की आवाज आ रही थी ।
जानवी ये सुनकर हैरान थी के कल आदित्य उसके साथ था ।
जानवी मोनिका से पूछती है --
जानवी : - झगड़ा !
जानवी अपना सर पकड़ती है और कहती है --
जानवी :- उफ्फ, मुझे कुछ क्यों नही आ रहा है ।
मोनिका :- तुम ज्यादा परेशान मत हो , मैं बताती हूँ किस बात का झगड़ा हूआ है ।
जानवी हैरानी से पूछती है --
जानवी :- तुम्हें पता है ?
मोनिका :- हां , कल मैं तुम्हें आदित्य की सच्चाई बता रही थी , और जब उसे पता चला के मैं तुम्हें सब सच बताने गई थी , तो आदित्य तुमसे इसी बारे मे बात करने के लिए गया था ।
जानवी मोनिका से पूछती है --
जानवी :- सच्चाई कैसी सच्चाई ....
मोनिका :- वो विक्की और मेरा ब्रेकअप हो गया था ।
जानवी :- ब्रेकअप पर क्यों ?
मोनिका जानबुझकर चुप रहती है , तब जानवी दोबारा पूछती है --
जानवी :- मैने कुछ पूछा मोनिका !
मोनिका :- वो ... वो मैं प्रेग्नेंट हो गई थी इसिलिए ।
जानवी :- प्रेग्नेंट ! तो इसमे ब्रेकअप क्यों किया ?
मोनिका :- वो इसलिए, क्योकी मेरे पेट मे आदित्य का बच्चा है ।
जानवी ये सुनकर चोंक गई थी , जानवी कहती है --
जानवी :- क्या आदित्य, पर आदित्य से कैसे ?
मोनिका :- तुम दोनो के शादी के बाद एक दिन आदित्य मेरे पास आया और उसने मुझसे कहा के तुम आदित्य को अपने करीब आने नही देती और फिर आदित्य मेरे पास आकर मुझसे प्यार करता हूँ , तुम्हारे बिना मर जाउगां बोलके मेरे आगे पिछे घुमने लगा , मैं उसे बार - बार मना करने लगी और कहने लगी के तुम जानवी को धोका क्यों दे रहे हो , तुम्हारी शादी हो गई है तो आदित्य कहने लगा के वो तुम्हें डिवोर्स दे देगा । और एक रात हम दोनो साथ मे थे और फिर आदित्य मेरे करिब आया और फिर हमारे बिच वो सब हो गया और मैं प्रेगनेंट हो गई ।
मोनिका जानवी को अपना रिपोर्ट दिखाती है और कहती है --
मोनिका :- ये दैखो , मेरी प्रेगनेंसी रिपोर्ट ।
जानवी रिपोर्ट दैखकर चोंक गई थी । मोनिका फिर कहती है ।
मोनिका :- मैंने अपनी प्रेग्नेंट की बात आदित्य को बताया तो उसने मुझसे शादी करने को मना कर दिया और इस बच्चे को भी अपनाने से मना कर दिया ।
जानवी :- क्या ?
मोनिका अपनी आंखो मे झुटी आंशु लाती है और कहती है ।
मोनिका :- हां जानवी , उसने मेरी जिंदगी बर्बाद कर दिया है , जब मुझे पता चला के मैं आदित्य के बच्चे की माँ बनने वाली हूँ तो मैने विक्की से ब्रेक अप कर लिया और अब आदित्य ये मानने से इनकार कर रहा है के ये बच्चा उसका है । वो तुमसे सिर्फ तुम्हारे पैसे के लिए है , इसिलिए वो मुझे अब अपना नही रहा है । यही बात कल मैने तुम्हें बतायी और तुमने आदित्य को बहोत समझाया भी और आदित्य और तुम्हारा इसी बात पर झगड़ा हो रहा था , पर फेन पर जिस तरह से तुम्हारी चिखने की आवाज आई , मुझे तो आदित्य पर शक हो रहा है , के कही उसने तो तुम्हें ....!
मोनिका की बात को सुनकर जानवी को आदित्य पर बहोत गुस्सा आने लगा था । तभी वहां पर सिस्टर आती है जो दैखती है के जानवी की हार्टबीट और पल्स हाई हो रही थी और मोनिका जोर - जोर से सांस ले रही है , वो सिस्टर मोनिका ये कहती है --
सिस्टर :- आप ये क्या कर रही हो , पेसेंट की हालत ठिक नही है और आप यहां पर उससे क्या बात कर लहे हो ? जाईए , आप बाहर जाईए ।
मोनिका वहां से उठती है और बाहर आ जाती है , अब मोनिका के चेहरे पर एक हल्की मुस्कान थी , क्योकी मोनिका ने अपना पहला चाल चल दिया था । जानवी के दिल मे आदित्य के लिए नफरत पैदा कर दिया था ।
इधर आदित्य अपने घर पर उदास बैठा था , वहां पर रश्मि , कृतिका और रमेश भी चुपचाप बैठा था तभी वहां अशोक आदित्य के पास आता है और उसके पास बैठकर आदित्य के कंधे पर हाथ रखता है अशोक को दैखकर आदित्य अपने जगह से उठ जाता है और कहता है ---
आदित्य :- अरे पापा , आप यहां ?
To be continue.....685