Tere Mere Darmiyaan - 75 in Hindi Love Stories by CHIRANJIT TEWARY books and stories PDF | तेरे मेरे दरमियान - 75

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तेरे मेरे दरमियान - 75

जानवी आदित्य की बात को पुरा होने से पहले ही बात को बिच मे काट देती है और जानवी चेहरे पर मजबूर मुस्कान लाते हुए कहा—

जानवी :- “मुझे किसी चीज़ की सफाई नहीं चाहिए। तुम्हारी निजी जिंदगी है… तुम्हें जिससे मिलना है मिलो । तुम जो चाहो कर सकते हो।”

जानवी से यह सुनकर आदित्य के सीने में दर्द उठा।
वह कहना चाहता था—

> "जानवी, मुझे सिर्फ तुमसे मतलब है… सिर्फ तुमसे!"
लेकिन उसने कुछ नहीं कहा। अपनी दिल की बात को आदित्य ने दिल मे ही रख लिया ।

जानवी की आँखें भर आईं, पर उसने चेहरा मोड़ लिया , ये कृतिका दैख लेती है और कृतिका ने महसूस किया कि दोनों कुछ छुपा रहे हैं।

वह मन ही मन बोली—
 कृतिका :- “इन दोनों को एक-दूसरे से बात करानी पड़ेगी, वरना ये प्यार की कहानी शुरू होने से पहले ही टूट जाएगी।”

जानवी वहां से जाने लगी तो आदित्य ने उसे रोककर सिर्फ इतना कहा—

आदित्य :- “अगर तुम्हें कभी कुछ पूछना हो, तो मैं यहीं हूँ।”

आदित्य अपनी दिल की बात बताना चाहता था पर बता नही पाया , जानवी के दिल में हल्का दर्द हुआ।
वह सोच रही थी—

जानवी :- "अगर तुम्हें सच में फर्क पड़ता… तो तुम खुद सब बताते।
तुम कहते कि तुम मेरे बारे में क्या महसूस करते हो…पर नही मैं गलत थी , कल रात जो मैने दैखा , उसके बाद अब कुछ कहने सुनने को रहा ही नही ।

लेकिन दोनों के बीच मौन दीवार बन चुका था। जानवी कमरे के अंदर चली जाती है ।

रमेश ने आदित्य की तरफ झुककर कंधे पर हाथ रखा—

रमेश (धीमे में): - “तू अभी भी नहीं बोलेगा? भाई, तेरी आँखें चीख-चीख कर कहती हैं कि तू जानवी से प्यार करता है।”

आदित्य ने गर्दन झुका ली।

आदित्य: - “यार… क्या फायदा? अगर उसे भी ऐसा ही महसूस होता…
तो वो मुझे छोड़कर नहीं जाती।”

रमेश हल्के से हँस पड़ा—

रमेश :- “अरे वो इसलिए गई थी क्योंकि वो भी तुझसे कुछ छुपा रही है। तू दोनों तरफ से बेवकूफ बन रहा है।”

आदित्य चौंक गया। उसे अब समझ मे ही नही आ रहा था के वो क्या करे ।

जानवी कमरे से बाहर निकल रही थी। उसके कदम भारी थे, आँखें नम थीं। दिल में सिर्फ एक बात थी—

> "क्यों मैं उसे कुछ नहीं बता पा रही? कल रात वाली बात मैं क्यों नही भूल पा रही हूँ , क्यों जब वो मेरे सामने आता है तो मेरा दिल हर बार जोर से धड़कता है?"

लेकिन उसने खुद को समझाया—

> “नहीं… मैं नहीं बताऊँगी कि मैंने उसे मोनिका के साथ देखा था।
अगर वह सच में मेरी परवाह करता…तो वह खुद समझाता और मुझे सब कहता ।

जानवी वहां से चली जाती है । शाम का समय था , करिब 8 बजे रहे थे जानवी केफे मे जाकर बैठ जाती है , जानवी का मन उदास और मन भारी था । तभी वहां मोनिका भी आ जाती है , मोनिका जानवी को दैखकर एक हल्की मुस्कान देती है और एक नई चाल मन मे लिए जानवी के पास जाती है ।

क्योकी कल पात को आदित्य ने मोनिका से कहा था के वो जानवी से प्यार करता है और मोनिका ये जानती थी के आदित्य ने जानवी को नही बताया होगा ।

यही सौचकर मोनिका जानवी के पास आती है और कहती है --

मोनिका :- अरे जानवी तुम यहां ?

मोनिका को दैखकर जानवी को कल रात वाली बात याद आ रही थी जिससे जानवी बहोत गुस्सा हो जाती है , जानवी का मन मोनिका को मारने का हो रहा था पर जैसे तेसे अपवे गुस्से को काबु मे करके जानवी मोनिका की बात का जवाब दिये बिना ही चुप थी ।

मोनिका जानवी की तरफ दैखती है , जानवी की आंखे रोने के कारण सुज चुकी थी और मन उदास था । जिसे दैखकर मोनिका जानवी से कहती है --

मोनिका :- ये क्या जानवी , तुम्हारा चेहरा ऐसे उतरा हूआ क्यों है ? आदित्य से झगड़ा हूआ है क्या ?

जानवी :- मेरा चेहरा जैसे भी हो तुमसे मतलब और वैसे भी मेरा भला आदित्य से झगड़ा क्यों होगा ।

मोनिका :- वो तुम और आदित्य एक ही घर मे रहती हो ना तो इसिलिए मैने पुछा ।

जानवी :- कहना क्या चाहती हो तुम ?

मेनिका अपनी चाल चलती है और कहती है --

मोनिका :- दैखो जानवी मुझे गलत मत समझो , पर जो लोग कहते है मैं वही कह रही हूँ ।

जानवी :- पहली मत बुझाओ और साफ - साफ कहो ।

मोनिका :- लोग कहते है के तुम दोनो तलाक के बाद भी एक साथ रहते हो और तुम दोनो के बिच वो सब भी होता है तलाक के बाद भी , तुम तो विकास से प्यार करती हो ना तो फिर यहां आदित्य के पास क्या कर रही हो ? क्या वो तुम्हें अपनाएगा जब उसे लोगो की बात को सुनना पड़ेगा ।

जानवी मोनिका पर गुस्सा होकर कहती है --

जानवी :- लोग मेरे बारे मे क्या सोचती है इससे तुम्हें कबसे फर्क पड़ने लगी । और जब तक कोर्ट से डिवोर्स Declared ना हो जाए तब तक वो मेरे पति है और मै उनकी पत्नी । लोगो का तो पता नही पर तुम्हें जरुर फर्क पड़ रहा होगा है ना । लोगो का नाम लेकर तुम अपना रोटी सेंक रही हो ।

मोनिका जानवी के बात पर घबरा जाती है --

मोनिका :- तुम कहना क्या चाहती हो ?

जानवी: - तुम मुझे बाहर निकालना चाहती हो ताकी तुम मेरे पति से रंगरलियां मना सको ! कुछ छुपाने की जरुरत नही है , मैने कल तुम दोनो को एक साथ दैख लिया था । शर्म नही आती तुम्हें कभी विक्की के पास तो कभी आदित्य के पास , कैसे कर लेती हो तुम ये सब ?

जानवी की बात पर मोनिका को गुस्सा तो आता है पर मोनिका चालाकी से कहती है --

मोनिका :- कल मैं रुकना कहां चाहती थी , वो तो आदित्य ने मुझे जनो ही नही दिया ।

ये सुनकर जानवी का चेहरा उतर जाता है मोनिका जानवी को भांप लेती है और बड़े ही चालाकी से कहती है --

मोनिका :- कल रात को मैं बारिस मे भिंग गई थी और आदित्य के सहारा लेने गई , आदित्य ने मेरा भीगां जिस्म दैखकर अपने आपको रोक नही पाया और मेरे साथ वो सब कर लिया । मैने उसो रोकने की बहोत कोशिश किया पर उसने मेरी एक ना सुनी और फिर मैं भी उसका साथ देने लगी ।

जानवी ये सब सुनकर स्तब्ध थी , उसकी आंखे छलकने लगी थी , दिलो मोनिका समझ जाती है के वार सही जगह पर हो रहा है , मोनिका अपनी अगली चाल चलती है और बहुत ही मीठे पर ज़हरीले स्वर में जानवी के कंधे पर हाथ रखते हुए बोली—

मोनिका : - “जानवी… मुझे पता है तुम बहुत समझदार हो। लेकिन आदित्य जैसा लड़का… उसे समझना थोड़ा मुश्किल होता है। वो जो बाहर दिखता है न, वो ही उसकी असलियत नहीं होती।”

जानवी चौंकी और कही ---

जानवी :- “तुम्हारा क्या मतलब है?”

मोनिका ने एक लंबी साँस ली, मानो बहुत दर्द छुपा रही हो वहां पर रमेश भी आ जाता है , रमोश जानवी और मोनिका को एक साथ दैखकर वही पास मे छुप जाता है , रमेश उन दोनो से इतना दुर था के रमेश को उन दोनो की आवाज सुनाई नही पड़ रही थी , मोनिका कहती है —

मोनिका : - “देखो, मैं ये सब इसलिए बोल रही हूँ क्योंकि मैं आदित्य को बहुत अच्छे से जानती हूँ। तुम शायद नहीं जानती लेकिन… वो कभी अपनी feelings साफ़ नहीं बोलता। और… वो जिस तरह मुझे कल रात देख रहा था…"

वो रुककर जानवी के चेहरे की प्रतिक्रिया पढ़ती है। जिसमे उसे जलन और गुस्सा साफ नजर आ रहा था ।

मोनिका: - “मुझे तो तब लगा जैसे… उसके दिल में अभी भी कहीं न कहीं मेरे लिए कुछ बचा है।”

जानवी की आँखें चौड़ी हो जाती हैं। उसके दिल में चुभन उठती है, लेकिन वह कुछ बोल नहीं पाती।

मोनिका ने चालाकी से उसकी खामोशी को कमजोरी समझा।

मोनिका (जैसे मज़बूरी में): - “जानवी… मैं तुम्हें डराना नहीं चाहती।
लेकिन मैं जानती हूँ कि तुम दोनों के बीच कुछ चल रहा है… या शायद तुम्हें लग रहा होगा कि चल रहा है। लेकिन सच मानो… आदित्य ऐसा लड़का नहीं जो किसी एक के लिए रुक जाए।”

जानवी का चेहरा साफ़ बता रहा था कि उसके दिल में तूफ़ान उठ चुका है।

मोनिका ने तीर को और गहरा किया और कहा —

मोनिका : - “और हाँ… कल रात जो हुआ… वो बस अचानक नहीं हुआ। आदित्य ने खुद मुझे रोक लिया था… अगर मैं चाहती, तो शायद उससे भी ज़्यादा हो जाता।”

अब जानवी का शरीर जैसे सुन्न पड़ गया। उसके हाथ काँपने लगे।

मोनिका ने उसकी पीठ पर हाथ रखते हुए कहा—

मोनिका: - “जानवी, तुम अच्छी हो, खूबसूरत हो… लेकिन आदित्य?
वो खुद नहीं जानता कि उसे क्या चाहिए। कहीं तुम उसका दूसरा option बनकर रह न जाओ…”

जानवी की आँखें भर आईं।

मोनिका ने चालाक मुस्कान छुपाते हुए कहा—

मोनिका : - “बस… ये सब तुम्हें बताना ज़रूरी था। क्योंकि मैं नहीं चाहती कि तुम किसी भी दर्द से गुज़रो, मैं जानती हूँ के आदित्य ने तुम्हें ये सब नही बताया होगा , क्योकी वो तुम्हें यूज करना चाहता है। ताकी विकास को लगे के तुम दोनो के बिच कुछ चल रहा है और वो तु्हें छोड़ दे फिर कोई भी अच्छा लड़का तुमसे शादी करेगा नही और तु्हारा एक ही ऑप्शन बचेगा , आदित्य ।

मोनिका मुड़कर बाहर चली जाती है, और जैसे ही दरवाज़े के बाहर पहुँचती है, उसके चेहरे पर एक शातिर, जीत का भाव उभर आता है।
मोनिका की बातो ने जानवी को पुरी तरह से तोड़ कर रख दिया । जानवी की आंखो से अपने आप आंशु बहने लगे थे ।

जानवी वहां से अपनी कार मे आकर बैठ गई और दरवाजा कर लिया दरवाजा बंद होने की छोटी-सी आवाज भी जानवी के दिल पर हथौड़े जैसी लगी।

वो कुछ पल तक वहीं बैठी रही…
बिना हिले, बिना पलक झपकाए। जैसे उसका दिमाग यह समझने की कोशिश कर रहा हो कि अभी-अभी क्या सुन लिया उसने।

धीरे-धीरे उसकी साँसें भारी होने लगीं , हाथ काँपने लगे , कंधे ढीले पड़ गए और अगले ही पल—
उसके सीने में दबा सारा दर्द एकाएक बाहर निकल आया।

जानवी कार की सिट पर बैठकर अपने दोनो दोनो हाथो से स्टेरिंग को पकड़कर फूट-फूटकर रोने लगी।

उसकी आवाज इतनी टूटी हुई थी कि जैसे शब्द भी उसके गले में घुट रहे थे।

जानवी :- “क्यों… क्यों ऐसा हो रहा है मेरे साथ…”

वो बार-बार बुदबुदाती रही।

आँसू उसके गालों से टपककर उसके हाथों पर गिर रहे थे, और वो हर आँसू उसके दिल का एक टुकड़ा बहाकर ले जा रहा था।

उसके दिमाग में एक साथ सब तस्वीरें घूमने लगीं—

आदित्य का उसके लिए खड़ा होना , उसके दर्द में उसका साथ देना , उसकी आँखों में दिखाई देने वाली सच्चाई

और फिर… वो रात… मोनिका के साथ , उसका दिल जैसे चाकू से कट रहा था।

जानवी :- “क्या मैं ही बेवकूफ़ थी… जो समझ नहीं पाई? क्या वो सच में मोनिका के लिए कुछ महसूस करता है? या… क्या मैं ही सिर्फ उसके लिए एक सहारा थी…?”

उसकी यह सोच और ज्यादा उसे अंदर से तोड़ रही थी।

उसने आँसू पोंछने की कोशिश की लेकिन आँसू उसकी पलकों से मानो बरसात की तरह बहते जा रहे थे , उसकी साँसें अनियंत्रित होकर तेज़ हो गईं।

जानवी :- “क्यों उसे देखकर… मेरा दिल ऐसे दर्द करता है , क्या ये… प्यार था?”

उसका दिल खुद से जवाब देने की कोशिश कर रहा था…
लेकिन दिमाग मोनिका की बातें दोहरा रहा था—

“तुम दूसरा option बनकर रह जाओगी…”
“उसने खुद मुझे रोका था…” “वो कभी किसी एक के लिए नहीं रुकता…”

हर शब्द खंजर की तरह चुभता गया।

जानवी ने अपना चेहरा अपने हाथों में छुपा लिया।
कार मे वो अकेली थी लेकिन उसके अंदर अकेलापन समंदर जैसा फैल चुका था।

उसकी सिसकियाँ धीमी होने लगीं…लेकिन अंदर का तूफ़ान और तेज़ हो चुका था।



To be continue...626