अशोक फिर कहता है --
अशोक :- बेटा मैं तुम्हें बाद मे कॉल करता हूँ ।
आदित्य :- ठिक है पापा ।
अशोक फोन काट देता है और जानवी के पास चला जाता है , जानवी अपने कमरे मे थी , जानवी को बहोत दुख हूआ था उसके सपने उसका दिल टुट चुका था और अब जानवी फूट - फूट कर रो रही थी ।
अशोक जानवी के पास जाता है और जानवी के पास जाकर बैठ जाता है और कहता है ---
अशोक :- बेटा , क्या हो गया ! तुम ऐसे रो क्यों रही हो ? अभी आदित्य का कॉल आया था , तु वहां पर नही गई थी , क्या बात है बेटा ?
अशोक को पकड़कर जानवी रोने लगी । जानवी को ऐसे रोते दैखकर अशोक को बहोत बुरा लग रहा था । अशोक जानवी के गाल पर प्यार से अपना हाथ रखता है और जानवी से धिरे आवाज से पूछता है--
अशोक :- क्या बात है बेटा , तु ऐसे रो क्यो रही है ? तु तो आदित्य के वहां पर गई थी ना , आदित्य का भी कॉल आया था वो भी परेशान है ।
जानवी कुछ बोल नहीं पाई। वो बस उनके सीने से लगकर जोर-जोर से रोने लगी।
उसके पिता ने उसके सिर पर हाथ रखा…और जानवी से कहा --
अशोक :- “बोलो बेटी… किसने रुलाया तुम्हें? क्या हुआ?”
जानवी का दिल भर आया। आँसू रुकने का नाम नहीं ले रहे थे।
अशोक फिर जानवी से बड़े ही प्यार से पूछता है--
अशोक :- बेटी बात क्या है , क्या हूआ है तुम्हें ?
जानवी का गला भर आया जानवी अपनी टूटी हुई आवाज मे कहा --
जानवी :- पापा .. मैने उसे.....मैंने… मैंने उसे मोनिका के साथ देखा पापा…”
इतना बोलते ही जानवी का गला फिर भर गया।
जानवी :- “वो दोनों… एक साथ थे…और मैं… मैंने उन दोनो को एक साथ दैखा पापा ... उन दोनो को एक साथ दैखकर मैं समझ नहीं पा रही कि मुझे इतना दर्द क्यों हो रहा है। क्यों उसकी हर बात… हर हरकत… मेरे दिल को चुभ रही है?”
उसके पापा अशोक ने गहरी सांस ली। उन्हें समझ आ गया था…के जानवी ने मोनिका और आदित्य को एक साथ दैखा है जिस कारण से जानवी वहां से वापस यहां पर लौट आई है ।
जानवी :- पापा , मेरे साथ ही ऐसा क्यों होता है पापा , मैं उससे नफरत भी नही कर पा रही हूँ पापा ।
जानवी अशोक के सिने पर सर रख कर रोये जा रही थी । जानवी के पापा अशोक अपनी बेटी की ये हालत दैखकर उसे भी बहोत दुख हो रहा था ।
जानवी फिर अपने पापा से कहती है --
जानवी :- पापा , मुझे क्यों इतना दर्द हो रहा है , ऐसा ... ऐसा लग रहा है जैसे मेरा इस दुनिया मे और कोई अपना बचा ही नही है । आदित्य की चुप्पी , उसकी खामोशी और उसकी अच्छाई ने मेरा दिल बदल दिया पापा , क्यों ऐसा हो गया पापा !
अशोक :- ऐसा नही बोलते बेटी , मैं हूँ ना तेरे पास और दैखना एक दिन आदित्य को भी तुमसे प्यार हो जायेगा और वो भी ऐसे ही तुम्हारे लिए तड़पेगा । जब उसे पता चलेगा के तुम उससे कितना प्यार करती हो ।
जानवी: - नही पापा , अब मैं उन दोनो के बिच मे नही आना चाहती , शायद मैने ही दैर कर दी ।
अशोक :- बेटा हो सकता है जैसे तुम पहले आदित्य को बुरा समझती थी , वैसे ही आज भी तुम्हें कोई गलतफहमी हूआ हो ?
जानवी :- नही पापा , मैने जो दैखा उससे तो गलतफहमी का कोई सवाल ही नही रहता ।
अशोक :- बेटा कभी - कभी आंखो दैखा भी सच नही होता है ।
जानवी :- पर इस बार मेरे से कोई गलती नही हूई पापा । अब कोई गलतफहमी नही है , सब साफ हो गया है ।
जानवी फिर रोने लगती है , तब अशोक कहता है --
अशोक :- ठिक है बेटी , जैसी तुम्हारी मर्जी , अब से तुम यही रहोगी , अब तुम्हें वहां जाना की कोई जरुरत नही है । मैं आदित्य को समझा दूगां ।
जानवी :- नही पापा , मैं यहां नही रह सकती ।
अशोक :- क्यों बेटी , ये तो तेरा ही घर है ना , और वेसे भी तु वहां पर रहेगी तो तुझे और तकलीफ होगी ।
जानवी :- पापा , मैने आदित्य को बहोत दुख दिया है और फिर भी उसने मेरा बहोत साथ दिया है शायद इसिलिए ये मेरा कर्मा ही है , अब दुख की बारी मेरी है ।
अशोक :- पर बेटी ...!
जानवी :- पापा , आदित्य की जान को मेरी वजह से खतरा है और जब तक ये खतरा टल नही जाता है , मैं उसके साथ ही रहूंगी , इसके लिए चाहे मुझे कितना भी कुछ सहना क्यों ना पड़े ।
अशोक अपने चेहरे पर एक मुस्कान लाता है और जानवी के गाल पर हाथ रखकर कहता है --
अशोक :- ठिक है बेटा , I am proud of you बेटा ।
जानवी :- पापा , एक वादा किजिये, के ये सब आदित्य को आप नही बताएगें ।
अशोक :- ठिक है बेटी , नही बताउगां । चल अब अपने आंशु पोंछलो और सो जा ।
अशोक जानवी को वहां पर सुला देता है , और चादर औड़ाकर वहां से चला जाता है ।
दुसरे से दिन सुबह आदित्य का घर जहां पर आदित्य , कृतिका , रश्मि और रमेश एक बैठकर बातें कर रह रहा था , आदित्य ने उन सबको कल वाली घटना बोलकर सुना देता है , जिसे सुनकर कृतिका कहती है ---
कृतिका :- ये लड़की इतनी गिर जाएगी , कभी सोचा नही था , उसने तुम्हें सौचकर क्या रखी है , अरे उसके जैसे 100 लड़किया तुम्हारे घर की नौकर है , और उसकी इतनी हिम्मत के वो किसी और के बच्चे को तुम्हें अपनाने को बोल रही है ।
आदित्य :- वो मुझे धमकी दैकर गई है , पता नही अब वो क्या नाटक करने वाली है ।
कृतिका :- अरे छोड़ो उसे वो अब क्या ही कर लेगी , पर एक बात सच - सच बताना , क्या सच मे तुझे जानवी से प्यार हो गया है या तुने मोनिका से पिछा छुड़ाने के लिए कहा ।
कृतिका की बात पर सभी मन मे आश लिए आदित्य की और दैखे जा रहा था , तभी आदित्य के चेहरे पर एक हल्की मुस्कान आता है और कहता है --
आदित्य: - नही यार , ये बात सच मे कहा था । पता नही कब और कैसे मुझे जानवी से प्यार हो गया ।
कृतिका खुश होकर अपने दोनो हाथ को खुशी से उपर उठाकर सोफे से उठती है --
कृतिका :- येस...... क्या बात है फाईनली , तुम्हें प्यार हो ही गया ।
आदित्य :- हां , पर क्या फायदा , जानवी तो विकास से प्यार करती है ।
रश्मी :- हां तो क्या हूआ , जैसे तुम्हें प्यार हूआ है , वैसे ही एक दिन जानवी को भी तुमसे प्यार हो जाएगा ।
आदित्य :- तुम लोग बेकार के सपने दैख रहे हो । जानवी ने मुझसे खुद कहा है के वो मुझसे कभी भी प्यार नही करेगी ।
रश्मी :- क्या ये उसने खुद तुमसे रही है ?
आदित्य :- हां , उसने ही कहा है ।
रमेश :- तु इन सप की चिंता मत कर , जानवी को तुमसे प्यार कराने का काम हमारा है ।
रमेश के बात पर सभी हामी भर देता है तो आदित्य कहता है --
आदित्य :- तुम लोग ऐसा कुछ नही करोगे । और मैं जानवी से प्यार करता हूँ , ये बात उसो पता नही चलना चाहिए ।
आदित्य इतना बोलता ही है के तभी वहां पर जानवी आती है ।
जानवी आदित्य के घर आती है। हॉल में आदित्य के दोस्त बैठे थे, और माहौल पहले से ही भारी था।
जैसे ही जानवी अंदर आई—
आदित्य खड़ा हो गया, लेकिन इस बार उसने अपने अंदर का सच दबा लिया।
आदित्य (धीमे स्वर में, पर नज़रें चुराकर):
आदित्य :- “जानवी… वो कल मैने पापा को फोन किया था , वो तुम कल घर नही आई , तो ....
जानवी बिना कुछ कहे जाने लगती है तो आदित्य फिर कहता है --
आदित्य :- वो फोन पे सुना के तुम रो रही थी , बस यही जानना था के क्या हूआ था ।
आदित्य घबराते हूए जानवी से ये बात पुछ लेता है ।
आदित्य के दोस्त उसकी तरफ देखने लगे—जैसे वो उससे उम्मीद कर रहे हों कि वो अपना दिल खोल दे और प्यार का इज़हार कर दे ।
लेकिन आदित्य ने खुद को रोक लिया।
वह जानवी से प्यार करता था…पर यह सोचकर चुप था कि शायद जानवी की लाइफ में उसकी जगह नहीं है।
जानवी आदित्य को देख रही थी। उसकी आँखों में हल्का कंपन था—
पर उसने खुद को संभाल लिया।
उसने भी कोई सवाल नहीं पूछा।
न ही ये बताया कि उसने मोनिका को आदित्य के बिल्कुल करीब देखा था। न ही ये बताया कि वो उस रात कितना टूट गई थी।
वह बस हल्की आवाज़ में बोली—
जानवी :- वो कल रात विकास से झगड़ा हो गया था ।
जानवी से इतना सुनकर आदित्य आग बबुला हो गया , आदित्य गुस्सो से कहता है --
आदित्य :- मुझे तो पहले ही शक था के हो ना हो ये उसका ही काम है , मैने कल रात को उसे फोन भी किया था , पर उसने कहा के तुम वहां पर हो ही नही । अब मैं उसे नही छोड़ूगां ।
जानवी आदित्य को रोकती है और कहती है --
जानवी :- रुको ... ये मेरे और विकास के बिच का मामला है , तुम क्यों उलझ रहे हो और तुम होते कौन हो मेरे और विकास के बारे मे बोलने वाले , क्या हक है मुझपर तु्हारा ?
जानवी कल रात के कारण आदित्य से बहोत नाराज थी जिस कारण से उसके मुह से गुस्से से ये सब निकल रहा था , जानवी जैसे तैसे अपने आप को संभालती है , आदित्य धिरे से कहता है --
आदित्य :- मेरा वो मतलब नही था , कल रात को तुम आई नही थी तो टेंशन हो गई थी ।
जानवी :- मेरे बारे मे इतना सोचने की जरुरत नही है ।
आदित्य :- वो मैं ....असल मे कल मोनिका आई थी और .....
जानवी आदित्य की बात को पुरा होने से पहले ही बात को बिच मे काट देती है और जानवी चेहरे पर मजबूर मुस्कान लाते हुए कहा—
जानवी :- “मुझे किसी चीज़ की सफाई नहीं चाहिए। तुम्हारी निजी जिंदगी है… तुम्हें जिससे मिलना है मिलो । तुम जो चाहो कर सकते हो।”
To be continue....614