Bis Minit - So Mil - Ek Shart - 5 in Hindi Drama by Varun Vilom books and stories PDF | बीस मिनट - सौ मील - एक शर्त - अध्याय 5: प्रतुल मोतवाणी

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बीस मिनट - सौ मील - एक शर्त - अध्याय 5: प्रतुल मोतवाणी

सुबह के सात बजे।

अहमदाबाद के पॉश इलाके में फैला हुआ मोतवाणी हाउस—

ऊँची दीवारें। इलेक्ट्रॉनिक गेट।

अंदर लंबा ड्राइववे।

गेट तोड़ा नहीं गया था।

वह खुला था।

अंदर दर्जनों गाड़ियाँ खड़ी थीं।

आईटी विभाग।

सीबीआई।

स्थानीय पुलिस।

मुख्य दरवाज़े के भीतर अफ़रा-तफ़री थी।

दराज़ खुल रहे थे।

फाइलें बाहर आ रही थीं।

कंप्यूटर टर्मिनल्स से हार्ड-डिस्क निकाली जा रही थीं।

सील।

टेप।

मोहर।

दीवारों पर लगी पेंटिंग्स उतारी जा रही थीं।

ऊपर बेडरूम में तकिए फाड़े जा रहे थे।

गद्दे चीर दिए गए।

नोटों के बंडल बाहर गिरे।

लॉकर से हीरे-जवाहरात के केस निकले।

“पूरी रिपोर्ट तैयार करो,” किसी ने कहा।

इस सबके बीच—

ड्रॉइंग रूम के संगमरमर फर्श पर

प्रतुल मोतवाणी पैर मोड़कर बैठा था।

सामने ट्रे में चाय।

एक कटोरी नमकीन।

वह धीरे-धीरे चाय की चुस्की ले रहा था।

जैसे यह सब उसी के घर में नहीं, किसी और के यहाँ हो रहा हो।

सीबीआई इंस्पेक्टर तावड़े सामने आकर रुका।

“प्रतुल मोतवाणी,” उसने काग़ज़ पलटते हुए कहा,

“इनसाइडर ट्रेडिंग, हवाला ट्रांजैक्शन, फॉरेक्स मैनिपुलेशन—सबके दस्तावेज़ मिले हैं।”

प्रतुल ने नमकीन का दाना उठाया।

“इंस्पेक्टर साहब,” उसने शांत स्वर में कहा,

“आप लोग टाइम वेस्ट कर रहे हैं। कुछ प्रूव नहीं कर पाएँगे।”

तावड़े झुका।

कॉलर पकड़ा।

उसे ज़मीन से खींचकर खड़ा कर दिया।

“चीफ़ मैजिस्ट्रेट के सामने पेश करता हूँ,”

हथकड़ी क्लिक हुई।

“फिर देखेंगे।”

प्रतुल हँसा।

जैसे खेल शुरू हुआ हो।

अदालत

भीड़ भरा कोर्टरूम।

एक ओर प्रतुल की तरफ़ से वकीलों की फौज।

तीखे सूट। चमकते जूते। मोटी फाइलें।

दूसरी ओर सरकारी वकील—

चश्मा ठीक करते हुए, कागज़ों में धंसा हुआ।

“माननीय न्यायालय,” पब्लिक प्रॉसीक्यूटर बोला,

“यह एक संगठित आर्थिक अपराध है। देश की अर्थव्यवस्था से खिलवाड़।”

प्रतुल कटघरे की कुर्सी पर टिककर बैठा था।

चेहरे पर वही आधी मुस्कान।

उसके वकील खड़े हुए।

“माय लॉर्ड, ये सब अटकलें हैं। कोई सीधा प्रमाण नहीं। मेरे मुवक्किल का सहयोग पूरा है।”

जिरह शुरू हुई।

धारा।

उपधारा।

तारीख़ें।

लेन-देन।

ईमेल ट्रेल।

प्रतुल ने एक बार भी पलक नहीं झपकाई।

जज साहिबा नीलिमा देवी ने दलीलें सुनने के बाद आदेश पढ़ना शुरू किया—

“न्यायालय प्रारंभिक जाँच लंबित रहने तक आरोपी को न्यायिक हिरासत में…”

उसी क्षण उनका फ़ोन वाइब्रेट हुआ।

स्क्रीन पर एक संदेश उभरा—

“ऑनलाइन वाला सामान डिलीवर हो गया।”

उन्होंने स्क्रीन एक क्षण देखा।

बस एक क्षण।

होंठों पर आई रेखा तुरंत गायब हो गई।

उन्होंने चश्मा ठीक किया।

“सॉरी… मैं क्या कह रही थी?”

प्रतुल का लीड काउंसल तुरंत आगे बढ़ा।

“योर ऑनर, यदि आप अपेंडिक्स सी और डी देख लें…”

जज ने पन्ने पलटे—मानो देख रही हों।

लीड काउंसल नरम स्वर में बोला,

“प्रतुल भाई दिल के मरीज़ हैं। इनका सारा काम घर के होम ऑफिस से चलता है। बेल दी जाए।”

जज ने चश्मा मेज़ पर रख दिया।

बाहें मोड़ लीं।

“प्रतुल साहब,” उन्होंने तीखे स्वर में कहा,

“आप कई सौ करोड़ की संपत्ति के मालिक हैं। फिर ये सब? इतना लालच क्यों? मेरा बस चले तो आजीवन कारावास दे दूँ।”

कोर्ट में सन्नाटा।

इंस्पेक्टर तावड़े का सीना चौड़ा हो गया।

प्रतुल के चेहरे पर पहली बार हल्की रेखा खिंची।

मन ही मन सोचा—पैसे तो पहुँच गए…

जज ने आदेश लिखा।

“बेल की अपील ख़ारिज।”

सरकारी पक्ष में हलचल।

गेवल की आवाज़ गूँजी।

“ऑर्डर इन द कोर्ट।

बेल की अपील ख़ारिज।

किन्तु अभियुक्त की स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए—

पुलिस कस्टडी नहीं दी जाती।

आरोपी को हाउस अरेस्ट में रखा जाएगा जब तक जाँच चलेगी।”

कोर्ट स्थगित।

तावड़े का चेहरा उतर गया।

प्रतुल के वकीलों ने एक-दूसरे को देखा—हल्की संतुष्टि।

कटघरे में खड़ा प्रतुल मुस्कुराया।

अदालत के बाहर

मीडिया की भीड़।

कैमरे।

फ्लैश।

प्रतुल गाड़ी की ओर बढ़ रहा था।

तभी सफ़ेद खंभे के पास वह दिखी—

पिंक सूट-सलवार में जिगरा जोशी।

पाँच साल की गर्लफ्रेंड।

मंगेतर।

प्रतुल तेज़ी से उसकी ओर बढ़ा।

“अरे, तुम कब आई जिगरा?”

जिगरा पीछे हटी।

“रेहवा दो। मने स्पर्श न करा।”

प्रतुल ठिठका।

“जिगरा?”

“बस, प्रतुल। हो गया मेरा। तेरे इन फॉरेक्स-फ्रॉड के चक्कर में मेरी ज़िंदगी बर्बाद हो रही है। मैं वडोदरा जा रही हूँ। अपने पापा के पास।”

वह मुड़ गई।

प्रतुल आगे बढ़ा ही था कि इंस्पेक्टर तावड़े बीच में आ गया।

“अरे मजनू,” उसने व्यंग्य से कहा,

“पहले काग़ज़ी कार्यवाही होगी।

फिर एंकल मॉनिटर कसूँगा तेरे पैर में।”

प्रतुल ने दाँत भींच लिए।

पुलिस की गाड़ी का दरवाज़ा बंद हुआ।

अब वह अपने ही घर में क़ैद रहने वाला था।