अगली सुबह का सूरज त्रिशा और राजन के लिए एक नई उम्मीदों के साथ आया है। कल की रात त्रिशा के लिए सही मायने में उसकी खूबसूरत रात थी।आसमान में उगते सूरज की लालिमा ने जब खिड़की से उनके कमरे में प्रवेश किया तो त्रिशा की आंख धीरे से खुली।
उसकी आंख खुली तो उसने खुद को राजन की बाहों में कैद पाया। कल रात खाना खाने के बाद राजन त्रिशा के शरीर की सिकाई कर रहा था और उसके बाद कल फिर एक बार उन्होंने अपने वैवाहिक जीवन का आनंद लिया पर कल त्रिशा पर कोई जोर जबरदस्ती नहीं थी। इस बार त्रिशा ने अपने पति के पुरुषार्थ को नहीं बल्कि उसके प्रेम को महसूस किया। उसके सान्निध्य में जो सुख मिलता है उसे महसूस किया। कल की रात में राजन ने उसके शरीर पर नहीं बल्कि उसकी आत्मा पर लगे सारे ज़ख्मों पर मरहम लगा दिया था।
उसने खुद को चादर में समेटा और करवट बदल कर राजन को देखने लगी, पता नहीं कैसे राजन को उसके जागने का अहसास हुआ और उसने त्रिशा को अपनी ओर खींच कर अपने सीने से लगा लिया। और लजाई शरमाई त्रिशा अपने पति के गले लग गई।
कुछ देर यूं ही रहने के बाद त्रिशा ने धीरे से राजन से कहा," छोड़िए मुझे जाना है, नहीं तो देर हो जाएगी।।।"
अपनी बाहों में पड़ी पत्नी के बालों से खेलता हुआ राजन बोला, " हां, आज तो वैसे भी हम देर नहीं कर सकते क्योंकि आज तो तुम्हें पग फेरे की रस्म के लिए वापिस अपने घर जो जाना है।"
त्रिशा ने हां में गर्दन हिलाकर जवाब दिया। और फिर एक बार उठने की नाकामयाब कोशिश करते हुए बोली," मम्मी ने कहा था कि पापा और मामा सुबह जल्दी ही आने वाले है इसलिए मम्मी जी ने कल पहले ही बोला था कि हम दोनों को सुबह जल्दी तैयार होना है "
इतना कहकर उसने फिर एकबार उठने की कोशिश की पर त्रिशा ने महसूस किया की वो जितना ज्यादा राजन की पकड़ से उठने की कोशिश कर रही है, राजन उसे उतना ही ज्यादा कस कर पकड़ रहा है।
''क्या कर रहे हो आप भी ???? छोड़िए ना।।।।।।। आपको उठना नहीं है क्या?????" त्रिशा ने शरमाते हुए कहा और फिर एक बार उठने की कोशिश करने लगी।
लेकिन राजन ने बिना कोई जवाब दिए उसे फिर एक बार त्रिशा अपनी दोनों बाहों में कस लिया। इस बार वह धीरे से उसके माथे को चूमने लगा। और फिर धीरे धीरे उसके हाथ उसके शरीर के बाकी हिस्सों तक भी जाने लगे।
" आप भी ना!!!!! क्या कर रहे हो आप ???? भूल गए क्या मम्मी जी ने क्या कहा था???? जल्दी उठना है!!!!!" अपने पति के स्पर्श से अपने शरीर में एक कंपन सा महसूस करने के बाद त्रिशा उसकी बाहों में धीरे से पिघलने लगी।
"त्रिशा, अभी सुबह के पांच ही बजे है। तुम्हारे पापा चाहे कितना ही सुबह जल्दी क्यों ना आने वाले हो सुबह 6 बजे तो अपनी बेटी की ससुराल नहीं आएंगे। इसलिए उनकी टेंशन छोड़ो और मेरे पास रहो।" उसने फिर एक बार अपने हाथों से उसे तंग करते हुए कहा।
" अरे छोड़िए ना!!!!! " राजन की छेड़खानी से शर्माते हुए त्रिशा ने धीरे से बोला।
"अरे, किस बेवकूफ का मन करेगा साहब, उठने का जब इतनी खूबसूरत सी नई नई बीवी उसके पास हो तो।।।।"
"और वैसे भी तुम्हें तो बस अपने घर वापिस जान जाने की लग रही है, ये नहीं की पति के पास रह लूं, उसे थोड़ा सा प्यार कर लूं। "
" और वैसे भी जा तो रही हो ना तुम वहां महीने भर के लिए इसलिए जाने से पहले का जितना टाइम है कम से कम वो तो मेरे साथ बिता लो।।।।। फिर तो वैसे भी मुझे तुम्हें देखने के लिए भी इंतजार करना पड़ेगा।" इतना कहते हुए राजन ने अपने हाथों को त्रिशा के बालों में फेरते हुए उसे प्यार से चूमा हुए कहा जिसके जवाब मे वो बस खुशी और लाज से अपने पति की बाहों में सिमट के रह गई।
और फिर एक बार दोनों पति पत्नी प्रेम के उन सुखद पालो का, उन सुख भरे लम्हों का आनन्द लेने के बाद आलस्य से थक कर बिस्तर पर पड़ गए ।
राजन ने फिर से एक घंटे बाद का अलार्म लगाया और दोनों थोड़ी देर के लिए एक दूसरे के आलिंगन में आंखे मूंद कर लेट गए । ठीक एक घंटे बाद अलार्म फिर से अपने टाईम पर बजा और इस बार बिना किसी नखरें के वो दोनों उठ कर तैयार होने लगे।
पहले त्रिशा उठी और फ्रेश होकर नहाने चली गयी और उसके नहा कर बाहर आने के बाद जब तक त्रिशा ने अपनी साड़ी बांधी तब तक राजन भी फ्रेश होकर नहा कर बाहर आ गया।
आठ बजे से पहले दोनों पति पत्नी पूरी तरह से रेडी हो चुके थे। आज भी अपनी शादी वाले दिन की तरह दोनों ने मैचिंग के रंग के कपड़े पहने हुए है। जहां त्रिशा की साडी का रंग रोयल ब्लू था वहीं उसका ब्लाउज लाइट पिंक रंग का है। वहीं राजन ने लाइट पिंक कलर की शर्ट और ब्लू कलर की जीन्स पहन रखी है। त्रिशा की रॉयल ब्लू साड़ी में लाइट पिंक कलर का बॉर्डर है और साथ ही पूरे पल्ले पर छोटे छोटे उसी पिंक रंग के धागे की कड़ाई के फूल बन है जो बहुत ही खूबसूरत लग रह है। वहीं राजन की पिंक शर्ट में रोयल ब्लू कलर का प्रिंट है जो त्रिशा की साड़ी के रंग से मेल खा रहा है और साथ में दोनों कमाल ही लग रहे है।
" मेरी बीवी तो कुछ ज्यादा ही सुंदर लग रही है आज!!!!!!" राजन ने त्रिशा को देखकर कहां जो शीशे के आगे खड़ी होकर अपने आप को अभी भी संवारने में लगी थी।
अपनी तारिफ सुनकर त्रिशा के गाल शर्म से लाल हो गए, पलकें झुक गई और होठों पर मुस्कान खिल गई।
लेकिन वो कोई जवाब देती उससे पहले ही त्रिशा की सास की आवाज नीचे से आई," राजन, त्रिशा!!!! बेटा जल्दी से नाश्ता कर लो फिर त्रिशा के पापा आने वाले है!!!!!! नीचे से बुलावा आने के बाद ना चाहते हुए भी बेचारे राजन को नीचे जाना पड़ा।
जब वो दोनों नीचे हॉल में पहुंचे नाश्ता पहले से ही तैयार था दोनों ने आराम से साथ में नाश्ता किया और इतने में त्रिशा के पापा, उसके मामा भी आ गए।