Lal Ishq - 6 in Hindi Drama by jagni b books and stories PDF | लाल इश्क - 6

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लाल इश्क - 6


स्थान: 'द गॉथिक फोर्ट' - राणा मेंशन

समय: सुबह ५:३० बजे

आरंभी की नींद सूरज की कोमल किरणों से नहीं, बल्कि एक भयानक 'नाइटमेयर' की वजह से खुली। वह पसीने से तर-बतर, हाँफते हुए बिस्तर पर उठ बैठी। तभी हवा के झोंके के साथ एक रोंगटे खड़े कर देने वाली आवाज़ कमरे में दाखिल हुई।

"आह्ह्ह... सर... प्लीज... मर जाऊंगा... खुदा के लिए छोड़ दीजिए!"

"य... ये कैसी आवाज है?" वह बुदबुदाई। उसका दिमाग तेज़ी से दौड़ने लगा। 'आरंभी, शांत हो जा। शायद तू कोई सपना देख रही है। इस साइको किलर के डार्क एम्पायर में उसके, उन बेजान गार्ड्स और उसकी उस इमोशनलेस बहन के अलावा और कौन हो सकता है?'

लेकिन तभी फिर से वही दर्दनाक चीख सुनाई दी। आरंभी बिस्तर से उतरी और दबे पाँव खिड़की की ओर बढ़ी। उसने जैसे ही नीचे झाँका, उसका कलेजा मुंह को आ गया। नीचे गार्डन एरिया में किसी 'डार्क वेब' के लाइव स्नफ वीडियो जैसा मंज़र था। सामने खड़ा था आर्यवर्धन। वह इस वक्त कोई इंसान नहीं, बल्कि एक 'डेथ अल्गोरिदम' लग रहा था।

आरंभी पागलों की तरह दरवाजे की तरफ दौड़ी। उसने हैंडल को पूरी ताकत से घुमाया, पर वह टस से मस नहीं हुआ। दरवाजे के ऊपर लगे छोटे से पैनल पर एक 'Red लाइट' ब्लिंक कर रही थी— [ACCESS DENIED: LOCKED BY ADMIN]।

"नहीं... नहीं!" उसे समझ आ गया कि वह एक 'क्वॉरेंटाइन' ज़ोन में कैद है। वह वापस खिड़की की ओर भागी। नीचे की ऊंचाई देखकर उसकी रूह काँप उठी। उसने खिड़की के ठंडे फ्रेम को जकड़ लिया।

"नहीं आरंभी... तू पागल हो गई है क्या?" उसने खुद से फुसफुसाते हुए कहा। "यहाँ से नीचे कूदना मतलब खुद को 'डिलीट' करने जैसा है। एक गलत कदम और तू हमेशा के लिए 'शट-डाउन' हो जाएगी।"

तभी नीचे से एक हड्डी कड़कने की आवाज़ आई और उसके साथ ही एक लंबी, दर्दनाक कराह।

"लेकिन अगर मैं नहीं गई, तो वो उसे मार देगा!" उसके अंदर के एक हिस्से ने विद्रोह किया। "क्या तू वही आरंभी शास्त्री है जो कॉलेज में अन्याय के खिलाफ 'फायरवॉल' बन कर खड़ी रहती थी? या तू भी इस एस्टेट की अन्य 'प्रोग्राम्ड' कठपुतलियों की तरह अपनी आँखें मूंद लेगी? क्या तू एक 'मूक दर्शक' बनकर अपनी आत्मा को करप्ट होने देगी?"

उसने अपनी हथेलियों को खिड़की के कांच पर पटका। उसकी आँखों से आंसू टपक रहे थे, लेकिन उनमें अब डर के साथ-साथ एक अजीब सी जिद (Defiance) भी थी।

उसने दांत पीसते हुए नीचे खड़े उस काले साये को देखा।

 "आर्यवर्धन... तू खुद को इस दुनिया का 'एडमिन' समझता है न? तुझे लगता है तू किसी की भी लाइफ फाइल को जब चाहे 'परमानेंटली डिलीट कर सकता है?" उसने दांत पीसते हुए नीचे खड़े उस काले साये को देखा। "आज मैं तेरी इस 'अनडिफीटेड सिस्टम' में एक ऐसा 'बग' डालूँगी जिसे तू डिकोड नहीं कर पाएगा।"

आरंभी ने एक लंबी, गहरी सांस ली। उसने अपने भारी सिल्क रोब के कोनों को कसकर बांधा, ताकि वह कूदते वक्त उलझे नहीं। उसका दिल किसी 'ओवरक्लॉक्ड प्रोसेसर' की तरह धड़क रहा था।

"ये एक 'वन-वे कमांड' है आरंभी... एक बार कूद गई तो कोई 'Rollback नहीं होगा।"

उसने खिड़की की संकरी कगार (ledge) पर अपना एक पैर बाहर निकाला। ठंडी हवा ने उसके शरीर में कंपकंपी पैदा कर दी। नीचे की घास उसे किसी काली खाई की तरह बुला रही थी। उसने अपना दूसरा पैर भी बाहर निकाला और दीवार के सहारे खुद को संतुलित किया।

"थ्री... टू... वन... 'Force Start!"

उसने अपने डर को 'बायपास' किया और हवा में छलांग लगा दी। हवा उसके कानों के पास किसी तेज़ 'डेटा स्ट्रीम' की तरह गुज़री और अगले ही पल वह एक भारी आवाज़ के साथ नीचे घास के मैदान पर जा गिरी।

'थम्प!'

घास पर गिरने की वजह से उसकी जान तो बच गई, लेकिन उसकी पीठ और कोहनियों में एक तेज़ लहर दौड़ गई। 'बचाने चली थी और खुद ही डैमेज हो गई,' उसने खुद को कोसा, पर वक्त नहीं था। वह रेंगते हुए एक दीवार की ओट से बाहर आई।
वहां वह आदमी बुरी तरह बिलख रहा था। "सर... मुझे पैसों की ज़रूरत थी, इसलिए मैंने 'Core Data' लीक किया! प्लीज... मेरा परिवार है!"

आर्यवर्धन के चेहरे पर कोई भाव नहीं था। वह उस आदमी के पास झुका और बड़ी शालीनता से फुसफुसाया, "तुम्हारी वफादारी का 'Subscription' कल रात ही खत्म हो गया था। और मेरे सिस्टम में 'गद्दारी' के लिए कोई 'Undo' बटन नहीं होता।"

आरंभी की रूह कांप गई। उसने देखा, आर्यवर्धन ने एक धारदार खंजर निकाला और बिना एक पल की देरी किए, उसे उस आदमी के सीने में 'सर्जिकल प्रिसिजन' के साथ उतार दिया।

"म... मार दिया..." आरंभी के होंठों से शब्द निकलने से पहले ही खून का एक फव्वारा सीधे आर्यवर्धन के चेहरे पर उड़ा। आरंभी के हलक से एक दिल दहला देने वाली चीख निकल गई। "नहीइइइइ!"

आर्यवर्धन की नज़रें झटके से उसकी ओर घूमीं। उसके चेहरे पर खून की लकीरें उसे किसी 'डिजिटल डेमन' जैसा लुक दे रही थीं। उसने अपनी उंगली से चेहरे का खून पोंछा और उसे क्रूरता से चाट लिया।

"बॉस... आपकी बीवी। उसने सब देख लिया," एक गार्ड की आवाज़ गूँजी।

आर्यवर्धन के होंठों पर एक शैतानी मुस्कान उभरी। वह धीरे-धीरे, खंजर को अपनी उंगलियों में नचाते हुए आरंभी की ओर बढ़ने लगा। आरंभी पीछे हटने लगी, लेकिन डर के मारे उसकी 'सिस्टम' जैसे हैंग हो गई थी। वह कीचड़ और घास पर गिर पड़ी। आर्यवर्धन किसी साये की तरह उस पर हावी हो गया।

"Congratulations Mrs Rana... you have witnessed the 'live execution' of my empire again." वह बड़ी शांति से बोला।

आरंभी ने भागने की कोशिश की, लेकिन पैर फिसल गया। वह गिरने ही वाली थी कि आर्यवर्धन के फौलादी हाथों ने उसे कमर से जकड़कर संभाल लिया। तभी अचानक आरंभी को काव्या के शब्द याद आए— "मेरी सलाह मानिए- खिड़कियों की तरफ मत देखिएगा।" 

आर्यवर्धन ने अपना रक्तांजित हाथ उसके गाल पर फेरा। उसके गोरे गाल पर खून का एक वीभत्स निशान बन गया। "प...प्ली... प्लीज... मुझे..." वह कुछ बोल पाती, उससे पहले ही उसे गहरी मतली (nausea) महसूस हुई और उसने उसके जूतों के पास ही उल्टी कर दी।

आर्यवर्धन उसे किसी खराब मशीन की तरह देख रहा था। आरंभी की आँखों के सामने अंधेरा छाने लगा। उसके शरीर की सारी ऊर्जा खत्म हो गई थी और वह उस कातिल पति की बाहों में ही 'शट-डाउन' (बेहोश) हो गई।

बेहोश होने से पहले उसे उसके होंठों से निकले आखिरी शब्द सुनाई दिए— "वेलकम टू द डार्क वेब, माय वाईफ।"