Trisha - 35 in Hindi Women Focused by vrinda books and stories PDF | त्रिशा... - 35

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त्रिशा... - 35

बीती रात की यादों के सजीव होते ही त्रिशा के मन में कड़वाहट भर गई। वह खुद के लिए बहुत हीन सा महसूस करने लगी। खैर जो भी हो यह सिंदूर तो उसे लगाना ही था। त्रिशा ने सिंदूर लगाया और सिर पर पल्ला करके तैयार होकर बैठ गई और इंतजार करने‌ लगी किसी के आने और उसे नीचे ले जाने का। 

त्रिशा बैठकर खुद को सामने लगे आईने में देखने लगी और अपने मन में चल रही विचारों के बारे में  सोचने लगी। उसके मन में उठ रहे सभी विचारों की अब खिचड़ी पक चुकी थी। सारी बात आपस में उलझ सी गई थी। उसके मन और दिमाग  के अंदर लगातार उत्पन्न होते विचारो से इतना शोर हो चुका था कि अब किसी भी एक आवाज को सुन पाना और यह समझ पाना  उसके लिए नामुमकिन सा हो गया।  

"अरे वाह त्रिशा, तुम तो पहले से ही तैयार होकर बैठी हो!!!! मैं तो तुम्हारी मदद करने आई थी।।।" त्रिशा की बुआ ने कमरे में दाखिल होते हुए कहा। 

उनकी आवाज से त्रिशा अपने विचारों से बाहर निकली और उनकी ओर देख कर उसने एक नकली मुस्कान दी। 

" तुम तो बहुत सुंदर लग रही हो!!!!!! नजर न लगे मेरी बच्ची को!!!" बुआ जी ने उसकी नजर उतारते हुए कहा। 

"अच्छा चलो अब ना अपना चेहरा घूंघट से ढक लो और मेरे साथ नीचे चलो। नीचे सब लोग आ गए है और तुम्हारे इस चांद से चेहरे को देखने के लिए बेसब्र हो रहे है।"  बुआ ने त्रिशा से कहा और त्रिशा ने उनके कहे अनुसार अपना चेहरा घूंघट से ढक लिया और फिर बुआ उसे लेकर नीचे आ गई जहां पहले से ही बहुत सी औरते मौजूद थी। 

नीचे आकर त्रिशा ने अपनी सास के बताने पर एक एक कर वहां आई महिलाओं के पैर छुए। सभी ने उसे आशीर्वाद दिया और आखिर में त्रिशा को एक जगह पर बिठा दिया गया। जिसके बाद मुंह दिखाई शुरु हुई। 

बारी बारी से एक एक कर, आई हुई सभी महिलाओं ने आकर उसका घूंघट हटाकर उसकी मुंह दिखाई करी और उसकी  तारीफ करते हुए बहुत सारे आशीर्वाद के साथ शगुन के लिफाफे त्रिशा को दिए। 

यह सब कुछ लगभग आधे-  एक घंटे तक चलता रहा। उसके बाद जब वहां त्रिशा का काम खत्म हो गया तो उसे वापिस उसके कमरे में भेज दिया गया। त्रिशा वापिस अपने कमरे में आई और जैसा उसकी सास ने ऊपर आने से पहले कहा था ठीक वैसे ही उसने अपनी सारी ज्वैलरी उतार कर अलमारी के लोकर  में रख, आलमारी में ताला लगा चाबी अपने पर्स में डाल ली‌। उसके बाद वह आराम से बिस्तर पर  बैड के सिरहाने से सहारा लेकर अपनी आंखे बंद करके बैठ गई।  

उसका शरीर अभी भी टूट सा रहा था। शरीर के नीचले भाग, पीठ, छाती आदी में अभी भी उसे दर्द महसूस हो रहा था इसलिए वो आंखे बंद करके ऐसे ही बैठ गई और उसे पता भी ना चला कि कब उसकी आंख लग गई और वो सो गई। 

बैठे बैठे सो रही त्रिशा को नींद में ही महसूस हुआ जैसे किसी ने अपनी हथेली से पहले उसके माथे, फिर उसके दोनों गालों  को एक एक करके छुआ जिससे वह घबरा कर डर के मारे उठ गई और उसने एकदम से अपनी  आंखे खोल‌ ली।

 आंखे खुलने के बाद उसने अपने सामने राजन को खड़ा पाया जो उनकी आखिरी बातचीत के बाद से ना जाने कहां गायब हो गया था और तबसे अब दिखाई दिया है।  

त्रिशा को एकदम से डरा और घबराया देख कर राजन ने उसे पानी का गिलास देते हुए कहा," अरे‌ तुम घबरा क्यों रही हो इतना????? डरो मत।।।।।और मुझे गलत मत समझना  वो तुम ऐसे बैठे बैठे सो रही थी तो मुझे चिंता हो गई कि कहीं तुम बीमार  तो नहीं  हो गई।  इसलिए मैं बस वही चैक कर रहा था कि तुम ठीक तो हो ना।।।।।।" राजन ने अपनी सफाई देते हुए कहा। 

त्रिशा ने राजन के हाथ से पानी का गिलास लिया और फिर उसमें से थोड़ा सा पानी पीकर गिलास साईड में रख दिया‌ और चुप चाप बैठ गई। 

उसे चुपचाप बैठा देखकर राजन ने टेबल की ओर इशारा करके उससे बोला," त्रिशा, खाना ठंडा हो रहा है। खाना खा लो।।।।।।।" 

त्रिशा ने टेबल की ओर देखा तो वहां खाने की दो प्लेट रखी थी। उन दो प्लेटों को देखकर त्रिशा को पुनः कल की बात याद आ गई और वह कटाक्ष करते हुए बोली," मैं आपसे पहले कैसे खा सकती हूं????? आप तो पति हो ना मेरे। मैं आपसे पहले खाऊंगी तो आप तो फिर खाने के साथ चांटा खिला दोगे मुझे।  तो आप मुझसे पहले खा लो !!" 

"अरे यार, माफ कर दो मुझे।।।। तुम अभी तक कल की बात से गुस्सा हो क्या???? मुझे सच में नहीं याद कि कल क्या हुआ था और कल मैनें क्या क्या कहा और मैने क्या बोला और क्या रिएक्ट किया। पर हां  मैं तुम्हें यह जरुर बता सकता हूं कि तुम मुझसे पहले भी खा सकती हो और मेरे साथ भी खा सकती हो!!!!!!" राजन ने खाने की प्लेट हाथ में उठाते हुए त्रिशा के सामने बैठते हुए कहा। 

राजन को यूं करते देख त्रिशा कुछ ना बोली बस चुपचाप देखती रही। उसकी आंखों के आगे ही राजन खाने की एक प्लेट लेकर उसके आगे बैठ गया और उसमें से उसने रोटी का एक टुकड़ा सब्जी के‌ साथ कौर बना कर त्रिशा की ओर बढ़ाते हुए कहा,"और अगर तुम चाहो तो ऐसे मेरे हाथ से भी खा सकती हो वो भी मुझसे पहले!!!!!!! "