Trisha - 25 in Hindi Women Focused by vrinda books and stories PDF | त्रिशा... - 25

The Author
Featured Books
Categories
Share

त्रिशा... - 25

जगमग जगमग लाईट और रंग बिरंगे फूलों से से इस समय पूरा मैरिज होम और त्रिशा का घर सजा हुई है। शादी की रस्मों को पूरा करने के लिए राजन का परिवार एक दिन पहले ही पूना से कानपुर आ गया था। सारी बरातियों के लिए मैरिज होम के कमरों में इंतजाम कर दिया गया था और  त्रिशा के पिता, मामा, और दोनों बड़े भाई सुबह से वही थे‌। 

शाम का समय आते आते मैरिज होम में भी चहल पहल बढ़ गई। सभी लोग शाम की तैयारी के लिए लगे पड़े थे। जहां एक ओर मैरिज होम में लड़के वालों ने अपनी रस्में शुरु कर दी थी वहीं त्रिशा के घर भी शादी से पहले की रस्में चल रही थी। सभी रस्में जैसे हल्दी, तेल, मंडप पूजन लगभग पूरी हो चुकी थी अब बस गौरी पूजन रह गया था जिसके लिए त्रिशा को तैयार किया जा रहा था। 

हर बार की तरह महक और मोनिका त्रिशा को तैयार कर रहे थे और इसके लिए त्रिशा को अभी लाल रंग कि प्लेन साड़ी पहनाई गई जिसपर गोल्डन रंग का बार्डर है। 
तैयार होने के बाद त्रिशा के साथ कुछ लड़कियों का समूह  था‌ जिनमें से चार लड़कियों ने चार कोने एक लाल चुन्नी के पकड़  रखे थे। उस लाल चूनर के नीचे पूजा की थाली हाथ में पकड़ कर त्रिशा चल रही थी और उसके साथ कुवांरी लड़कियां थी जो देवी गौरी के भजन गाते चल रही थी। 

मंदिर पहुंचकर त्रिशा ने गौरी शंकर की पूजा करी और फिर वह वापस घर आ गए जहां से महक और त्रिशा को कार से चेतन ब्यूटी पार्लर पर तैयार होने के लिए छोड़ कर आया। पार्लर पर पहुंचते ही त्रिशा का मैक अप शुरु हुआ और उसे हिम्मत देने के लिए महक भी वहीं तैयार हो रही है। 



लगभग चार घंटों के बाद त्रिशा पूरी तरह से तैयार थी। आज त्रिशा की सुंदरता किसी स्वर्ग की अप्सरा से कम नहीं थी। आज वो बहुत ही सुंदर लग रही थी। आज के दिन के लिए कल्पेश ने मार्केट से सबसे अलग और मंहगा लंहगा खरीदा था। जिस लहंगे को देखकर पार्लर में काम करने वाली लड़कियां भी वाह कहने से रह ना पाई। 

त्रिशा का लंहगा मैचिंग वैडिंग आउटफिट था और यह कल्पेश को इतना पसंद आया था कि यह उन्होनें बजट के बाहर होने पर भी 45000 रुपये में खरीदा।  कल्पना और त्रिशा ने उन्हें मना भी किया पर कल्पेश ने यह कह कर टाल दिया कि एकलौती बेटी है मेरी इसलिए इसकी शादी में सब बेस्ट ही होना चाहिए। 

त्रिशा के लंहगे के साथ साथ राजन की शेरवानी भी कल्पेश ने ही ली थी।  राजन और त्रिशा दोनों  के ही कपड़े कलर कोरडीनेशन में थे। राजन की शेरवानी चटक नीले  कलर की थी जिसमें डार्क गुलाबी रंग के फूल पूरी शेरवानी पर थे और हर फूल का बार्डर गोल्डन कलर का था। उसी के साथ नीचे गोल्डन कलर का पैजामा था और साथ ही फूल के ही रंग का दुप्पटा था जिसपर शेरवानी के नीले कलर का बार्डर था। और साथ ही लाल रंग का सेहरा था। कुल मिलाकर पूरी शेरवानी बहुत सुंदर थी। 

राजन की शेरवानी के कलर का ही त्रिशा का भी लंहगा था।  जिसका लंहगा और ब्लाउज गोल्डन कलर का था। और पूरा लंहगा डार्क गुलाबी और  चटक नीले रंग के छोटे और बड़े फूलों से भरा पड़ा था। नीले और गुलाबी फूलों के बीच की बची हुई जगह से लहंगे का गोल्डन कलर दिख रहा था। और आज त्रिशा के ऊपर यह लंहगा बहुत खिल रहा था‌। त्रिशा को देखकर ऐसा लग रहा था कि मानों यह लंहगा त्रिशा के लिए बना हो। 

लंहगे के साथ दो चुन्नियां भी थी गुलाबी और नीले रंग की। नीले रंग की चुन्नी जहां त्रिशा के हाथ और ब्लाउज के ऊपर सेट कर खुला फ्री हैंड छोड़ दी  गई थी वहीं गुलाबी रंग की चुन्नी सिर पर। त्रिशा के बालों को ऊंचे जूडे में बांधे गया था।  उसकी चुन्नी को सिर पर सेट करने से पहले ज्वैलरी पहनाई गई जो मल्टीकलर की थी। 

त्रिशा के गले में एक छोटा हार और एक लंबा हैवी रानी हार पहनाया गया। कानों में मैचिंग के लंबे लंबे झाले, हाथों में हाथफूल और अंगूठियों के साथ साथ गोल्डन कलर के कलीरे और शादी का चूड़ा पहनाया गया। कमर में करधनी और सिर पर मांग टीका और  माथा पट्टी। 

त्रिशा जब पूरी तरह से तैयार होकर आई तो महक अपनी नजर उसपर से हटा ही नही पाई। महक त्रिशा को बचपन से जानती है। उसने शुरु से त्रिशा को बहुत सादे ढंग से रहते देखा है लेकिन आज उसे यूं सजा धजा देखकर वह एक पल को चौंक गई। उसकी सीधी सादी सी त्रिशा सजने संवरने पर सुंदर लगेगी यह महक जानती तो थी पर वह इतनी सुंदर लगेगी यह तो उसकी भी  कल्पना से परा था।  

"तुम तो आज कयामत ढाह रही हो त्रिशा सच में!!!!!!!!!"  महक ने खुशी से चहकते हुए त्रिशा को गले लगाते हुए कहा जिसपर जवाब में त्रिशा भी मुस्करा दी।