Ashvdhaama: Ek yug purush - 11 in Hindi Science-Fiction by bhagwat singh naruka books and stories PDF | Ashvdhaama: एक युग पुरुष - 11

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Ashvdhaama: एक युग पुरुष - 11



हिंदुकुश पर्वत की गहरी घाटियों के बीच, बर्फ से भरा एक सूना इलाक़ा था

कुंजर पास, जहाँ आज भी कई जगहों पर कोई इंसान पैर नहीं रखता।

रात का समय था।

आसमान बादलों से भरा, हवा में बर्फ की ठंडक,

और घाटी के सन्नाटे में सिर्फ़ एक आवाज़ गूँज रही थी
खुरच-खुरच… पत्थर में कुछ खोदा जा रहा था।

तीन लोग काले जैकेट पहने, सिर पर नाइट-विज़न गॉगल्स लगाए, एक प्राचीन चट्टान को सावधानी से काट रहे थे।

उनका लीडर—ज़ाराक , 45 साल का, दाढ़ी में सफ़ेद लकीरें, दुनिया के कई “ब्लैक-लिस्टेड” संगठनों से जुड़ा एक रहस्यमयी नाम।

उसके हाथ में एक पुरानी, लेदर-कवर डायरी थी

जिस पर संस्कृत में लिखा था

“गांधार तत्सर्वम्… असुर-वंश।”

उसका एक साथी बोला,

“खान साहब, यकीन है कि यही जगह है? हमने पहले भी तीन लोकेशन खोदी थीं…”

ज़ाराक ने धीमे स्वर में लेकिन ठंडे लहज़े में कहा

“ वह चीज़ साधारण नहीं है।

अश्वत्थामा के आख़िरी दर्शन यहीं के आसपास हुए थे। 

और जिसने पाया उसे अमरता मिली।

ऐसी चीज़ छुपाने के लिए पहाड़ ही काफी होते हैं।”

उनके पीछे खड़ी एक महिला काले दुुपट्टे, तेज़ आँखें, और बंदूक लटकाए

नाम सिरिना, बोली:

“पर हमें किसने बताया कि अश्वत्थामा सच में जिंदा है?

क्या ये सिर्फ़ मिथक नहीं?”

ज़ाराक के चेहरे पर हल्की मुस्कान आई।

वह डायरी के पन्नों को पलटकर बोला

“यह डायरी किसी पुरोहित की नहीं,

किसी सैनिक की नहीं…

ये डायरी खुद गांधार के अंतिम राजकुमार शकुनी के परिवार के वंशज की है।”

सिरिना चौंक गई।

“शकुनी? वो तो… महाभारत का…”

ज़ाराक ने बात पूरी की

“उसका वंश आज भी ज़िंदा है।

भारत, अफ़ग़ानिस्तान और पाकिस्तान के कई पहाड़ी कबीलों में बिखरा हुआ।

और उनमें से कुछ… आज भी पूर्वजों की इच्छाएँ पूरी करना चाहते हैं।”

उसने चट्टान को ध्यान से देखा

उसी वक्त भीतर से एक अजीब सी धप-धप की आवाज़ आई।

साथी घबरा गया,

“सर, यह कोई जानवर है क्या? अंदर गुफ़ा लगती है…”

ज़ाराक ने रीढ़ सीधी करते हुए आदेश दिया

“कटिंग तेज़ करो। अंदर वही है जिसकी हमें तलाश है।”

उसने मोबाइल स्क्रीन खोली

एक गुप्त मेसेज चमका

“Red Group, ISIS-K, Al-Ansar और Khalistani नेटवर्क 

सभी को वही चाहिए  अश्वत्थामा की मणि,

क्योंकि जिसके पास वह होगी…

वह किसी भी सैनिक, किसी भी एजेंट, किसी भी लोकतंत्र से नहीं हारेगा।”

सिरिना ने धीमे स्वर में कहा,

“इसका मतलब… सभी दैत्यअसुर संगठन एक ही लक्ष्य के लिए मिल रहे हैं?”

ज़ाराक:

“हाँ। क्योंकि असुर वंश आज भी मौजूद है।

वे खुद को असुरों का पुनर्जीवित रूप कहते हैं।

उनका मकसद है

पूरे विश्व का विनाश शैतानी ताकत का राज 

और अश्वत्थामा का पुनरागमन।

सिरिना की आवाज़ काँप गई,

“अगर वे मणि पा गए तो?”

ज़ाराक ने आँखें संकरी कर लीं

“तो दुनिया में कोई एजेंसी, कोई मिलिट्री,

कोई हथियार उन्हें रोक नहीं पाएगा।

यह सिर्फ़ भारत का मुद्दा नहीं संपूर्ण इतिहास बदल जाएगा।”

 भारत के लोगों के लिए ये आस्था है उनके पुराण है लेकिन हमारा भी उन से संबंध है भले ही हम इतने वर्षों से अलग रहे हो ।

तभी

धड़ाम!!

चट्टान का बड़ा हिस्सा टूटकर गिरा और सामने एक सँकरी गुफ़ा दिखाई दी।

भीतर से ठंडी हवा का झोंका निकला।

लेकिन हवा के साथ कुछ और भी आया

एक गहरी, रहस्यमयी गंध, जिसे ज़ाराक ने तुरंत पहचान लिया।

“प्राचीन पूजा-स्थलों की गंध…

ठीक वही…

जिसका ज़िक्र डायरी में था।”

वे तीनों टॉर्च लेकर भीतर घुसे।

गुफ़ा की दीवारों पर नुकीले, पुराने चिन्ह उकेरे थे।

कुछ हास्यजनक, कुछ डरावने…

लेकिन एक चिन्ह ज़ाराक ने छूते ही ठिठक गया

वह था

“त्रिशूल के बीच बंद आँखों वाला व्यक्ति 

अश्वत्थामा का चिह्न।”

सिरिना ने कँपकँपाती आवाज़ में पूछा,

“क्या यह… वही है?”

ज़ाराक ने बुदबुदाया

“हाँ।

ये बताता है कि इस घाटी में कभी अश्वत्थामा आया था।

हो सकता है… यहाँ मणि छुपी हो।”

गुफ़ा थोड़ा आगे जाकर दो भागों में बँटती थी।

ज़ाराक ने अपने दोनों साथियों को अलग-अलग हिस्सों में भेज दिया।

कुछ ही समय बाद

पाछड़ वाले रास्ते से चीख सुनाई दी।

सिरिना दौड़कर गई

साथी ज़मीन पर पड़ा था, आँखें फटी हुई, शरीर ठंडा।

उसकी गर्दन पर उँगलियों के गहरे निशान थे।

ऐसे निशान… जिन्हें इंसान नहीं छोड़ सकते।

सिरिना हाँफते हुए बोली,

“खान साहब… ये किसने किया?”

ज़ाराक की आँखें डरी नहीं, बल्कि चमक उठीं।

“ये इंसान का काम नहीं…

ये उसी के आने का संकेत है।

वह जाग गया है।”उसकी शक्ति यही है वो चाहे यहां नहीं है 

हवा में अचानक सीटी जैसी आवाज़ गूँजी

जैसे कोई बहुत पुरानी, टूटी साँसें ले रहा हो।

गुफ़ा की दीवारें हल्के-हल्के काँपने लगीं।

सिरिना ने डरते हुए पूछा

“क्या… अश्वत्थामा यहाँ है?”

ज़ाराक ने डायरी को सीने से लगाते हुए कहा

“हाँ।

असुर-वंश का अंतिम दूत…

हजारों साल पुराना योद्धा…

जो अमर है, क्रोध से भरा है…

और जो अपने श्राप से मुक्ति पाने के लिए

एक ही चीज़ खोज रहा है

अपनी मणि।”

तभी टॉर्च अपने आप बंद हो गईं।

गुफ़ा एकदम अँधेरे में डूब गई।

और अँधेरे में


एक बहुत धीमी, दर्दनाक आवाज़ गूँजी

“मैं… अभी… भी…

यहीं… हूँ…”लेकिन वो नहीं जिसकी तुम तलाश में हो ,

लौट जाओ अगर अपनी जान प्यारी है तो

सिरिना का दिल रुक-सा गया।

ज़ाराक मुस्कुराया

“हम सही जगह आए हैं।”


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