सुमित ने प्रीतम को ऊपर से नीचे तक देखा और आकाश की ओर देखकर बोला जाओ नीलिमा को लेके आओ।
आकाश ने बेला से जाकर कहा,नीलिमा ओर बेला चाय नाश्ता लेकर आई।नीलिमा ओर प्रीतम की आंख से आंख मिली और दोनों मुस्कुरा दिए।
उसकी मुस्कुराहट में जो खुशी जो प्यार नजर आ रहा था वो वहां बैठे सब लोगों ने देखा। मनीष ने नीलिमा को देखा और मन ही मन खुश हुआ कि उसके बेटे की पसंद लाजवाब हैं।
सब को चाय नाश्ता देने के बाद सुमित ने नीलिमा को उसके पास बैठा दिया और बोला देख मनीष ये हैं मेरी बेटी नीलिमा ।
मनीष ने कहा हम्म वैसे लड़की तो बहुत अच्छी है हमे तो पसंद है तुम बताओ तुम्हे हमारा लड़का कैसा लगा?
ये सुनते ही सुमित हंसकर बोला वैसे लड़का भी बहुत अच्छा है हमे भी पसंद है बस एक कमी है।
ये सुनते ही सबके चहेरे उतर गए और मनीष बोला कमी ?कैसी कमी ?
सबके चेहरे की ओर देखकर सुमित जोर से हंसा और बोला कमी ये है कि वो तुम्हारा बेटा है।
अरे भाई में मजाक कर रहा हु तुम सबके चेहरे तो देखो सुमित हंसते हुए बोला ये सुन सब हंस पड़े।
कोई खुश नहीं था तो वो थे अनुज ओर रमा वो मुंह फुलाए कमरे में बैठे थे और सुमित ने भी उसे बुलाना जरूरी ना समझा।
अनुज फोन पे किसी से बात कर रहा था ओर उसे कोई इंस्ट्रक्शन दे रहा था फोन रखते ही रमा ने कहा देखा अपने भाई को हमारा सारा प्लान चौपट कर दिया।
अनुज ने कहा तुम इतना क्यू सोच रही हो सब ठीक हो जाएगा।
कुछ देर की बात चित के बाद नीलिमा ओर प्रीतम का रिश्ता पक्का हो गया। नीलिमा ओर प्रीतम की तो खुशी का ठिकाना ना रहा।
लंच के बाद प्रीतम,विष्णु ओर मनीष घर के लिए निकल गए। कार मनीष ड्राइव कर रहा था।वहा से निकलने के कुछ देर बाद मनीष ने साइड व्यू मिरर में देखा तो उसे दो ब्लैक कार पीछे आती हुई दिखी,ये देख मनीष थोड़ा घबरा गया।
उसने बीच में ही लेफ्ट टर्न ले लिया तो विष्णु ने कहा पापा यहां क्यू टर्न लिया? मनीष ने कहा यहां से शार्टकट लिया है जल्दी पहुंच जाएंगे।
कुछ देर बाद मनीष ने फिर से देखा तो अब भी वो कारे उसके पीछे ही थी अब उसे कन्फर्म हो गया कि कोई उसका पीछा कर रहा है।
मनीष को बार बार साइड व्यू मिरर में देखता देख प्रीतम ने पीछे मूड के देखा दो कार उसके पीछे थी,उसे भी लगा कि कुछ तो बात है पर अचानक एक पतली गली जिसमें एक कार ठीक से मुश्किल से चल सकती थी उसकी ओर इशारा करते हुए कहा पापा यहां से चलो ये इससे भी शार्टकट हैं।
मनीष को भी पता चल गया कि प्रीतम जान चुका है मनीष ने हामी भरी और ओर कार उस गली में ले ली।
गली के अंदर जाते ही एक तेज आवाज सुनाई दी वो बंदूक से चली गोली की थी ये सुन प्रीतम ओर मनीष के दिल धक से रह गए प्रीतम ने पीछे मूड कर देखा तो कार सीधे रस्ते पर जा रही थी और उसने देखा कि उन लोगों के हाथ में बंदूकें थी।
तीनों घर तो पहुंच गए पर उसके दिल में एक सवाल खड़ा हो गया कि वो कौन थे?
प्रीतम ने मनीष को घर पहुंच के पहले हुए हादसे के बारे में भी बताया अब मनीष के दिल में डर बैठ गया ओर उसके चहेरे पे चिंता की लकीरें उभर आई।