देर रात तक प्रीतम करवटें बदलता रहा पर उसे नींद नहीं आई।
सुबह जब नीलिमा की आंख खुली तो देखा सुमित उसके बिस्तर के पास बैठे बैठे ही सो गया था।उसने धीरे से जगाया, पापा ...पापा आप यहां क्यू सोए हैं?क्या हुआ?
सुमित ने धीरे से आंख खोली और नीलिमा की ओर देखा,कल रात जो भी हुआ वो अभी भी सुमित की आंखों के सामन तेर रहा था,नीलिमा की सुजी हुए आंखे देखकर उसका दिल कांप उठा।
जिस बेटी को उसने आज तक ऊंची आवाज में बुलाया तक नहीं था उसपे उसका हाथ उठा कैसे? ऊपर नीलिमा के शांत रवैये ने उसे ओर अधिक धक्का पहुंचाया।
सुमित को सोच में डूबा देख नीलिमा ने उसका हाथ पकड़ते हुए कहा में जानती हूं पापा आप रात वाली बात को लेके परेशान है,पर अब मुझे बिलकुल भी डर नहीं है क्योंकि आप मेरे साथ है,ओर आप प्रीतम को एक बार मिल लेंगे तो आप भी मेरी ओर से निश्चित हो जाएंगे ।
ये कहते ही सुमित ने उसे अपने सीने से लगा लिया।मेरी बच्ची बस इतना ही उसके मुंह से निकल सका।
कमरे के अंदर का ये भावुक दृश्य बेला ने देखा और वो भी भावुक हो गई फिर खुद को संभालते हुए बोली उठ गए आप लोग !चलो नाश्ता तैयार है,नीलिमा जाओ बेटा जल्दी से फ्रेश हो जाओ और अच्छे से रेडी हो जाओ और आप भी कमरे में चलके फ्रेश हो जाइए वो लोग आते ही होंगे।
नीलिमा उठ कर बाथरूम में चली गई और सुमित अपने कमरे में। कुछ देर बाद सुमित डाइनिंग टेबल पर नाश्ता करने बैठा। रमा ओर अनुज भी आकर बैठ गए तभी बेला ने आवाज लगाई बच्चों चलो नाश्ता रेडी है।
तन्मय ओर आकाश अपने कमरे से बाहर आए,रात को जो हुआ उसके बाद आकाश भी वही रुक गया था।
थोड़ी देर बाद नीलिमा आई उसे देख रमा ओर अनुज की आंखे फैल गई नीले रंग का सलवार सूट,चहेरे पे हल्का सा मेकअप होंठो पर लिपस्टिक ओर खुल्ले बाल।
उसे रूप में देखकर रमा झल्ला उठी पर बोली,कुछ शरम बची है या नहीं ? अभी रात को भाई साहब ने इतना सुनाया पीटा फिर भी अक्ल नहीं आई? सब चुप रहे कोई कुछ नहीं बोला जैसे किसीने कुछ सुना ही नहीं।
किसी को बोलता ना देख अनुज भी बोला ये सारा साज श्रृंगार किस के लिए है?तुम्हे अपने कमरे में होना चाहिए था ओर तुम यहां बेशरमो की तरह आज धज के आई हो। ये सब सुन नीलिमा वही रुक गई।
अब सुमित चुप नहीं रह सकता था,वो बोला नीलिमा आजाओ बेटा नाश्ता ठंडा हो रहा है,ओर ये मेरे घर का मामला है किसी बाहर वाले को उसमें दखल देने की जरूरत नहीं है।
ये सुनते ही रमा ओर अनुज हक्काबक्का रह गए की कल रात को जिस भाई ने इस लड़की पे हाथ उठाया था वो अब उसे इतने प्यार से बुला रहा है। अनुज बोला लेकिन भैया.....तुमने सुना नहीं मैने अभी अभी क्या कहा? सुमित बात खत्म करने से पहले ही बोल पड़ा।
सब ने नाश्ता किया ओर इस तरफ प्रीतम मनीष ओर विष्णु नीलिमा के घर के लिए निकल गए।
सुमित सोफे पर बैठा फोन पे कुछ कर रहा था बाजू में आकाश ओर तन्मय भी बैठे हुए थे तभी डोरबेल बजी। तन्मय बोला लगता हैं वो लोग आ गए में जाकर दरवाजा खोलता हु ऐसा कह वो दरवाजा खोलने चला गया।
दरवाजा खोला तो प्रीतम विष्णु ओर मनीष खड़े थे तन्मय ने मनीष को नमस्ते किया ओर अंदर ले आया,सुमित खड़ा हो गया ओर जैसे ही उसने मनीष को देखा वो मुस्कुरा दिया और हाथ मिला के स्वागत किया ओर बिठाया।
तभी आकाश ने उन लोगों की ओर हाथ करते हुए कहा मामा ये प्रीतम,ये विष्णु ओर ये मनीष अंकल।
मनीष मेहता !मेहता इंडस्ट्री के मालिक वो इंसान जो अपने गुस्से पे कभी कंट्रोल नहीं कर पाता था पर एक खूबसूरत लड़की ने उसकी जिंदगी बदल दी और उसे इस ऊंचाई तक पहुंचाया है। जिसे थैंक्यू बोलना खुद की इंसल्ट लगता था।
ये सुन सब चोक गए खास कर के मनीष! उसने सुमित को गौर से देखा और बोला वर्मा तू ? सुमित हंस पड़ा और बोला देखा खा गया ना धोखा,नहीं पहचाना तूने मुझे।
मनीष हंसता हुआ बोला काफी अच्छी बॉडी बनाली है तूने तो पहचान में ही नहीं आ रहा।उसे ऐसे बाते करता देख सब कन्फ्यूज हो गए ओर विष्णु बोला पापा अंकल आप एक दूसरे को जानते हो?
मनीष हंसते हुए बोला हा बेटा हम स्कूल में साथ साथ पढ़े है। इसका मतलब आप दोस्त है? तन्मय ने भी पिच लिया तो सुमित बोला दोस्त तो नहीं थे पर एकदूसरे की हेल्प हमेशा करते थे और टीचर से बेवजह शिकायत करके एकदूसरे को पिटवाते भी थे ।
सब हंस पड़े और सुमित बोला प्रीतम तुम्हारा बेटा है ? मनीष ने कहा हा मेरा बड़ा बेटा ओर ये विष्णु छोटा बेटा ।