लड़की ने आरव की तरफ देखा।
उस नज़र में पहली बार सुकून था।
“क्योंकि अब कोई मुझे देख रहा है…
कोई जो मुझे याद रखेगा।”
साया तिलमिला उठा।
“मोहब्बत?”
उसकी आवाज़ ज़हर से भरी थी।
“मोहब्बत रूहों को कमज़ोर बना देती है।”
“या आज़ाद,”
आरव ने कहा।
एक तेज़ झटका लगा।
फ्रेम की दरार और चौड़ी हो गई।
लेकिन इस बार—
उसमें से रौशनी निकल रही थी।
लड़की ने आरव का हाथ पकड़ा—
पहली बार उसका स्पर्श महसूस हुआ।
ठंडा नहीं…
बल्कि हैरान कर देने वाला सजीव।
“अगर यह दरार पूरी खुल गई,”
वह बोली,
“तो या तो मैं मुक्त हो जाऊँगी…
या हमेशा के लिए मिट जाऊँगी।”
आरव की आँखें भर आईं।
“और तीसरा रास्ता?”
वह हल्की-सी मुस्कुराई।
“तीसरा रास्ता…
सिर्फ़ तब होगा जब तुम डरोगे नहीं।”
साया चीख़ उठा।
कमरा हिलने लगा।
कैनवस से रंग टपकने लगे—
जैसे किसी की यादें बह रही हों।
आरव ने लड़की का हाथ और कसकर पकड़ लिया।
उस पल उसे समझ आ गया—
यह इश्क़ अब सिर्फ सायों में नहीं था।
यह इश्क़ अब चुनाव माँग रहा था।
तीसरे रास्ते की क़ीमत**
रात आज कुछ अलग थी।
यह न तो पूरी तरह खामोश थी, न ही शोर से भरी।
ऐसा लग रहा था जैसे अंधेरा खुद किसी फैसले का इंतज़ार कर रहा हो।
आरव अपनी वर्कशॉप में अकेला खड़ा था।
चारों तरफ़ अधूरी पेंटिंग्स थीं—
कुछ पर चेहरे अधूरे थे,
कुछ पर आँखें बनी थीं लेकिन नज़र नहीं थी।
बीच में वही पेंटिंग थी—
जिसने उसकी ज़िंदगी बदल दी थी।
उसके सामने वह लड़की खड़ी थी।
अब वह पहले की तरह धुंधली नहीं थी।
उसके चेहरे पर जीवन की झलक थी,
लेकिन आँखों में डर अब भी ज़िंदा था।
“आज की रात आख़िरी हो सकती है,”
उसने धीमे से कहा।
आरव ने उसकी तरफ़ देखा।
“या नई शुरुआत की पहली।”
लड़की हल्का-सा मुस्कुराई,
लेकिन उस मुस्कान में सुकून नहीं था।
तभी—
पेंटिंग के फ्रेम में तेज़ कंपन हुआ।
दीवारों पर टंगी बाकी तस्वीरें हिलने लगीं।
हवा अचानक ठंडी हो गई।
एक काला साया
धीरे-धीरे पेंटिंग से बाहर निकला।
उसकी कोई साफ़ शक्ल नहीं थी—
बस अंधेरा था,
और उस अंधेरे में एक आवाज़।
“तुम दोनों बहुत दूर आ गए हो,”
साये की आवाज़ गूँजी।
“अब पीछे लौटने का रास्ता नहीं है।”
आरव का दिल तेज़ धड़कने लगा,
लेकिन उसने खुद को संभाला।
“तुमने उसे कैद किया,”
आरव ने कहा,
“लेकिन अब तुम्हारा वक़्त ख़त्म हो चुका है।”
साया हँसा।
वह हँसी कमरे की दीवारों से टकराकर लौट आई।
“इंसान हमेशा यही भूल करता है,”
साया बोला।
“उसे लगता है कि मोहब्बत ताक़त है।”
लड़की आगे बढ़ी।
उसकी आवाज़ काँप रही थी,
लेकिन नज़रें स्थिर थीं।
“तुमने मुझे रंगों में बाँधा,”
उसने कहा,
“क्योंकि मैं तुम्हारा सच जान गई थी।”
कमरा अचानक बदलने लगा।
दीवारें गायब होने लगीं।
चारों ओर रंगों की दुनिया फैल गई।
आरव और वह लड़की
अब पेंटिंग के भीतर खड़े थे।
साये ने हाथ उठाया।
हवा में तीन चमकते हुए रास्ते उभरे।
“देखो,”
साया बोला।
“तीन रास्ते—
तीन अंजाम।”
पहला रास्ता काला था।
उसमें चीख़ें थीं,
खामोशी थी।
“पहला रास्ता,”
साया बोला,
“वह यहीं क़ैद रहे।
और तुम ज़िंदगी भर उसे देखते रहो—
छू नहीं पाओगे।”
लड़की की आँखें भर आईं।
दूसरा रास्ता उजला था,
लेकिन ठंडा।
“दूसरा रास्ता,”
साया बोला,
“पेंटिंग टूटे।
रूह आज़ाद हो।
लेकिन वह तुम्हें भूल जाए।”
आरव का सीना भारी हो गया।
“और तीसरा?”
लड़की ने पूछा।
साया मुस्कुराया।
“तीसरा रास्ता वही चुनता है
जो सबसे ज़्यादा खोने को तैयार हो।”
आरव ने उसकी तरफ़ देखा।
वह कुछ कहना चाहती थी,
लेकिन शब्द नहीं निकले।
“अगर मेरी आज़ादी की क़ीमत
तुम्हारी यादें हैं,”
लड़की ने टूटती आवाज़ में कहा,
“तो मैं क़ैद ही ठीक हूँ।”
आरव का दिल जैसे फट गया।
वह आगे बढ़ा।
“नहीं,”
उसने साफ़ कहा।
“मोहब्बत का मतलब
किसी को रोकना नहीं होता।”
उसने साये की तरफ़ देखा।
“अगर तीसरा रास्ता बलिदान है—
तो मैं तैयार हूँ।”
साया ठिठक गया।
“तुम समझते हो
यादें मिटने का मतलब क्या है?”
आरव ने सिर हिलाया।
“मैं उसे भूल जाऊँगा।
उसकी आवाज़,
उसका नाम,
यह एहसास…”
उसकी आँखें नम हो गईं।
“लेकिन वह ज़िंदा रहेगी।”
लड़की आगे बढ़ी।
उसने पहली बार आरव का हाथ पकड़ा।
“शायद तुम मुझे कभी पहचान नहीं पाओगे,”
उसने कहा।
“लेकिन शायद दिल…
कुछ देर के लिए रुक जाएगा।”
एक तेज़ चमक हुई।
पेंटिंग टूट गई।
रंग ज़मीन पर फैल गए।
साया चीख़ता हुआ
अंधेरे में घुल गया।
सुबह—
सूरज की किरणें
वर्कशॉप में उतर आईं।
आरव फर्श पर बैठा था।
आँखें खुली थीं,
लेकिन यादें नहीं थीं।
उसने टूटी पेंटिंग को देखा।
सीने में अजीब-सा दर्द उठा।
“लगता है,”
उसने खुद से कहा,
“कुछ बहुत अपना…
छूट गया है।”
उसी पल दरवाज़ा खुला।
एक लड़की अंदर आई।
आज़ाद।
ज़िंदा।
अनजान।
उसकी नज़र आरव से टकराई।
दोनों एक पल को ठहर गए।
कोई याद नहीं थी—
लेकिन दिल
पहली बार
ज़ोर से धड़क उठा।
और सायों के बीच
इश्क़
फिर से साँस लेने लगा।