💓{हम फिर से मिले मगर इस तरह}💓
🌹{ऐपीसोड़ - 12}🌹
अरुण सुबह उठा तो वही भयानक सपने से उसकी आंखे खुली उसका शरीर पसीने, खोफ और घबराहट से भरा हुआ था,उसकी दिल की धड़कने आज भी भी तेज चल रही थी, उसकी सांसे उखड़ रही थी, उसका दम सा घूट रहा था कैसे भी करके उसने खुद को सम्भाला और अपने आप को शांत किया, मगर आज जो सपना उसने देखा वह उस पिछले सपने से अलग था या उस सपने का अगला हिस्सा था,
“ कुछ लोग उसे उठाकर एक जीप मे ले जा रहे थे उसके शरीर से बहुत खून बह रहा था उसकी आंखे बंद हुई जा रही थी, उसकी सांसे धीमे चलने रही, उसका शरीर ठंडा पड़ने लगा था, मगर तब भी उसकी नजर किसी को ढूंढ रही थी, फिर जीप किसी हॉस्पीटल के सामने रुकी उसे कुछ लोगो ने जीप से निकाला और एक स्टेचर पर उसे लिटाकर अन्दर ले गये उसके पिछे ही पिछे स्टेचर पर कोई और भी आया वह भी बहुत जख्मी था उसका भी बहुत खून बहर रहा था, उसकी सांसे चल रही थी, मगर बैहोश था,उसने उसे देखा, एक चैन की सांस ली ये वोही था जिसको उसकी नजरे ढूढ़ रही थी,
फिर अरूण को आपरेशन ठेटर मे ले जाया गया, कुछ लोग उसका इलाज कर रहे थे ये शायद डाक्टर थे, अरुण उन डॉक्टर्स और उस कमरे मे मोजूद मशीनो की आवाजो को सून पा रहा था, फिर उसकी आंखी धीरे धीरे बन्द हो रही थी, उसकी सांसे उखड़ने लगी थी, उसके दिल की धड़कन कम हो रही थी, डाक्टरो ने उसके सिने पर इल्केट्रिक शोक दिये, मगर उसकी धड़कन रुक गई, सांसे थम गई, उसके सामने अंधेरा छा गया” वह झटके से सपने से बाहर आया .
वह सोचता है,, आखिर ये सपने उसे क्यू आ रहे है क्यू वही एक्सिडेट बार बार उसके सपने मे क्यू आ रहा है और इस बार तो वह एक होस्पीटल के ऑपरेशन ठेटर ले गया, और वह दूसरा शक्स कौन था मेरे साथ क्यू मुझे उसकी चिन्ता हो रही थी, आखिर इन सब सपनो का मतलब क्या है, मै जब से यहा आया हूं तभी से ये स डरावने सपने मुझे आ रहे है तो क्या ये इसी जगह की वजह से है या फिर मेरा कोई वेहम है, जो कुछ भी मुझे यहा से जल्दी से जल्दी जाना होगा, मगर रूपाली क्या उसको कैसे भूल जाऊ, उसे ऐसे कैसे छोड़ जाऊ, उसके दिल मे मेरे लिए आज भी जो मोहब्बत है, वो अभी तक कम नही हुई उसे यू उदास करके नही जाना जाता उसे मुझे सब साफ साफ बताना होगा ताकी मै जब यहा से जाऊ फिर से उसका दिल ना दुखे मेरी वजह से, मै उसे हंसता मुस्कुराता देखना चाहता हूं, जिसकी वो हकदार है .
फिर उसे याद आता है कि रुपाली उससे कल दोपहर मिलने नही आयी थी तो वह जल्दी से अपना हाथ मुंह धोकर अपनी जेक्ट उठा वहा से उस तालाब की ओर जाने लगता है, उसने दरवाजा खोला ही था कि दरवाजे के सामने रुपाली खड़ी दिखाई दी, रूपाली का वहा देखकर चोक गया .
इतना चोक क्यू रहे हो मै रुपाली ही हूं कोई भूत प्रेत नही, चलो हटो रस्ता दो मुझे अन्दर आने दो बाहर बहुत ठंड है,,, रूपाली हंसकर कहा.
फिर वह घर के अन्दर आ जाती है, अन्दर आकर घर मे देखती है तो सारा बिखरा पड़ा कही किताबे पड़ी थी कही, कही पेपर, कही कॉफी का मग, कही कपड़े पड़े थे वह अरुण की ओर नजरे घूमाकर देखती है जो उसके पिछे पिछे अन्दर कमरे मे आ गया था और मुस्कुराकर कहता है,, आओ इधर आकर बैठो रूपाली .
रूपाली,, बैठ जाऊ बैठने की जगह कहा है बताओ मुझे भला ऐसे भी कोई रहता है, कही कपड़े पड़े, कही कॉफी के मग पड़े है, कही तुम्हारे ये पेपर बिखरे पड़े है, अरुण तुम सभ्य तरीके से रहना कब सिखोगे, कॉलेज मे भी येही हाल था तुम्हारा हमेशा ऐसी ही हालत करके रखते थे तुमने अपने रूम की .
फिर तुम आती थी काम वाली बाई बनकर झाडू पोछा लगाने फिर मेरे कमरे को साफ करती थी एक दम प्ररोफेशन बाई की तरह,, अरुण हंसकर कहा .
अरुण तुम ना एक नम्बर के कमीने हो तुम्हे शर्म नही आती मुझे बाई कहते हुए, मै अभी बताती हूँ तुम्हे,, रुपाली ने गुस्से मुंह बनाकर कहा और एक पंछ दिया अरुण के पेट पर .
वह जोर से चिल्लाया,, क्या जोर से मार जोन सिना की अम्मा ने मेरा पूरजा पूरजा हिल गया, “आर यू शोर तुमने खाना कम कर दिया” तुम्हारे पंछ ने नही लगता कि तुम इतनी सिल्म ट्रिम हो तुम्हारा पंछ एक दम पहलवान के माफिक है .
रूपाली गुस्से से,, अरुण तुम नही सुधरने वाले आज तुम्हे अच्छी तरह बताती हूं मै क्या हूँ, वह अरुण की ओर गुस्से बढ़ती है तो अरुण हंसता हुआ पिछे की जाता है तभी रूपाली की एक पैर वहा रखी कुर्सी पर फस जाता है वह निचे गिरने वाली होती है लेकिन सिधा अरुण की बाहो मे जा गिरी अरुण उसे सम्भालता है, अरुण के हाथ रूपाली की कमर को पकड़े थे उसकी बोड़ी पिछे की ओर मुड़ी थी
अरुण उसे पकड़े हुए उसकी ओर हल्का सा झुका था दोनो की आंखे मिलती है, अरुण फिर से रूपाली के मासूम से चेहरे को देखकर उसमे खो गया और रूपाली भी अरुण की बाहो मे समाये हुए बस अरूण को ही देखे जा रही थी दोनो के लिए मानो वक्त थम गया था, दोनो के दिल ने रफ्तार पकड़ ली, दोनो की आंखे एक दूसरे से मिली हुई थी, रूपाली अपने आप को अरुण की ओर धीरे धीरे ले जाने लगी अरुण का चेहरा भी रूपाली के करीब होता चला गया, दोनो के होठो के दरमिया बहुत ही कम फासला था दोनो एक दूसरे की सांसे को महसूस कर सकते थे पर तब ही ठंडी हवा के एक झोके ने अरुण का ध्यान हटाया वह रूपाली से जल्दी से अलग हुआ, और अपने आप को सम्भाला, रुपाली भी अरुण से अलग खड़ी उसको देखकर हल्का सा मुस्कुराती है, अरुण उसको यू मुस्कुराता देखकर
उससे कहता है,, तुम मुस्कुरा रही हो पता है ना अगर तुम पहले वाली रुपाली होती यानी कद्दू होती तो तुम मेरी बाहो मे नही निचे धड़ाम से पड़ी होती और तुम्हे पकड़ने से पहले ही इस घर का प्यारे से फर्स को टूटा हुआ देखना पड़ता .
रुपाली गुस्से से,, अरुण तुम कितने कमीने हो तुम नही सुधरोगे अभी बताती हूं, फिर वह उस पर अपने नाजूक हाथो से घूसो की बोछार कर देती है .
कहानी जारी है.......✍️