Meera Prem ka Arth - 10 in Hindi Love Stories by sunita maurya books and stories PDF | मीरा प्रेम का अर्थ - 10 - पुरानी यादें या सच्चे झूठ

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मीरा प्रेम का अर्थ - 10 - पुरानी यादें या सच्चे झूठ

मैं चला जाऊंगा!...... माधव के मुँह से ये सुनके मीरा और सुधा माधव की तरफ हेरानी से देखने लगे .......माधव अपनी बात बदलते हुए बोला......मेरा मतलब है कि मुझे कुछ समय के लिए एकेडमी से बाहर ट्रेनिंग करने के लिए जाना है... मैं अकेला नहीं हूं. मेरे साथ मेरा पूरा बैच है हम सभी जा रहे हैं.... ये मैं तुम्हें कल ही बताना चाहता था लेकिन उसे पहले सुधा गुस्सा हो गई और तुम्हें अपना साथ लेके चली गई। हां लेकिन मैंने जो बात तुमसे कही थी...माधव के मन में जैसे ही कल रात की बात आयी उसके दिल की धड़कनें तेज़ हो गयीं। ......फिर कैसे करके उसने हिम्मत की और आगे बोला... कि मैं तुमसे प्यार करता हूं और इस बात के लिए मुझे कोई भी गिल्ट नहीं है तुम मुझे जैसी हो वेसे ही एक्ससेप्ट हो .....ये कहते हुए माधव लगातार मीरा की आँखों में देख रहा था...... और जानता हूँ तुम भी मुझसे कल कुछ कहना चाहती थी हेना !.......

माधव की बात सुनके मीरा अपनी स्वलिया नजरों से उसको देखने लगी। उसके सवाल को समझते हुए माधव थोड़ा मुस्कुराया और बोला।... . मीरा तुम्हारे शब्दों में आवाज़ नहीं होती लेकिन तुम्हारी ख़ूबसूरत आँखों की बोली को अच्छे से समझता हूँ मैं अब बताओ क्या कहना चाहती थी तुम मुझसे ?मीरा की आँखों में देखते हुए माधव ने पूछा ......क्या तुम्हें भी मुझसे प्यार है ?.........माधव के मुँह से ये सुन मीरा के शरीर में अचानक सिरहन दौड़ गई.....वो बस माधव की आँखों में अपने लिए ढेर सारा प्यार देख रही थी .......मीरा को कुछ ना बोलता देख सुधा आगे आई इस पहले वो कुछ बोलती मीरा ने सुधा का पकड़ा लिया। ये देख सुधा रुक गई और हेरानी से मीरा की तरफ देखने लगी ...मीरा भी माधव की आँखों में ही देख रही थी कि मीरा ने माधव की तरफ अपने कदम बढ़ाये और कुछ इशारों में बोलने लगी .......

माधव मैं जानती हूँ तुम बहुत अच्छे हो महनती हो....तुमको भले ही मुझसे प्यार हो गया हो। लेकिन मैं तुमसे प्यार नहीं कर सकती....मीरा की बात सुनके माधव के मुँह से निकला...क्यूं?......

मीरा ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए इशारों में कहना शुरू किया...मैं तुमसे प्यार नहीं कर सकती लेकिन हाँ हम हमेशा अच्छे दोस्त रहेंगे। और मैं चाहती हूं कि तुम अपना और अपनी मां पापा का सपना पूरा करो.. जो एक इंडियन आर्मी का एक अच्छा और इमानदार ऑफ़िसर बनना है .......और ऐसा इसलिए क्योंकि तुम्हारा पहला प्यार मैं नही भारत माता है .....ये बात तुमने ही मुझसे कही थी ना भूल गए क्या?...... माधव ने मीरा की बातें समझा और एक बार और रेपिट की ......

तुम कहना चाहती हो कि तुम मेरे और मेरे लक्ष्य के बीच आ रही हो?...... मीरा ने अपना सर हा में हिलाया.... उसकी बात सुन माधव मीरा के थोड़ा करीब आया और मीरा की बाजुओं को पकड़ के कहने लगा .... मीरा ऐसा कुछ नहीं है जैसा तुम समझ रही हो। तुम किसी भी तरह से मेरे और लक्ष्य के बीच में नहीं आ रही हो... बल्की पता तुम्हें देखने और मिलने के बाद मेरे अंदर और भी ज्यादा जोश बढ़ जाता है अपने देशप्रेम के लिए .....जब तुम्हें अपने संगीत, नृत्य में बड़े जुनून के के साथ प्रैक्टिस करते हुए देखता हु .. तुम मेरी प्रेरणा हो मीरा .......

माधव के मुँह से अपने लिए इतनी अच्छी बात सुनकर मीरा हेरान भी थी साथ ही खुश भी हो रही थी लेकिन उसने अपने चेहरे पर कोई भी रीएक्शन नहीं दीया. और बस माधव की आँखों में देखती रही और कुछ देर बाद इशारों में बोली...... मैं तुम्हारे लिए प्रेरणा हूं ये बहुत बड़ी बात है माधव जो तुमने मेरे लिए कही है। लेकिन मैं तुमसे प्यार नहीं कर सकती माधव।हा हम अच्छे दोस्त बने रह सकते हैं हमेशा। अगर तुम चाहो तो !......

मीरा की बात माधव को समझ आ गई। उसने इस बार मीरा पर कोई जोर डालने की कोशिश नहीं की और बोला... ठीक है मीरा जैसा तुम चाहो प्यार ना सही एक दोस्ती का रिश्ता तो रहेगा हमारा। हा लेकिन एक बात बोल दूं अगर तुम्हें कभी किसी भी मोड़ पर लगे कि तुम्हें मुझसे प्यार है या हो गया है तो तुम मुझे ज़रूर बताओगी........मैं उस पल का बेसबरी से इंतज़ार करुंगा ........ये कह कर वो मीरा को देख कर मुस्कुराने लगा और बोला... अच्छा ठीक है मैं चलता हूँ कुछ ही देर में हमको निकालना है .... अच्छा! ...मीरा एक बात पूछू तुमसे?...इससे पहले कि मीरा कुछ कहती है माधव ने कहा.......क्या तुम मेरे वापस आने का इंतज़ार करोगी?........

माधव ने जाने की बात सुनकर मीरा का चेहरा उदास हो गया फिर भी उस उदासी को छुपाते हुए मीरा ने इशारा किया कि माधव का हाथ पकड़ा और बोली... तुम कम टाइम में अच्छे दोस्त बन गए हो हमारे..फिर अपना सर हा मैं हिलाते हुए बोली... हा मुझे तुम्हारे वापस आने का इंतज़ार रहेगा .........ये कहते वक्त उसकी आंखो हल्के आंसू आ गए जिन्हे वो अपनी पलकों को लगातर झपका कर छुपाने की कोशिश कर रही थी ......माधव ने ये बात नोटिस की थी लेकिन उसने कुछ कहा नहीं... दोनो को ही एक दूसरे से दूर होने का दुख हो रहा था....माधव ने अपने चेहरे पर मुस्कान लाते हुए बोला...... चलो अब सुधा के लिए अच्छा है। उसको मेरी वजह से कोई परेशानी अब नहीं होगी ...क्यू है ना सुधा..माधव ने सुधा की तरफ देखा और मुस्कुराते हुए बोला।सुधा ने बस झूठी मुस्कान उसको दे दी....माधव ने मीरा की तरफ देखा और थोड़े इमोशनल होते हुए एक गहरी सांस ली और बोला... मुझे तुम्हारी बहुत याद आएगी!......

ये सुनके मीरा दिल भारी होने लगा। वो उसको गले लगाकर कहना चाहती थी कि वो माधव के साथ बेहद प्यार करती है लेकिन वो ऐसी नहीं कर सकती थी।.कुछ था जो उसको रोक रहा था ....माधव ने मीरा के दोनो हाथ को अपने हाथो में लिया और बोला...... अपना ख्याल रखना। मैं वापस आऊंगा. लेकिन मुझे अभी जाना होगा और फिर एक छोटी स्माइल देते हुए बोला,.........मैं चलता हूँ!..........ये कहकार माधव ने मीरा के हाथों को छोड़ दिया और धीरे-धीरे अपने कदमों के पीछे लेने लगा और फिर मुडकर वहां से चला गया.... क्योंकि उसके लिए भी मीरा के सामने ज्यादा देर तक अपनी भावनाओं को कंट्रोल करना बहुत मुश्किल था... इसलिए उसने वहां से जाना ही सही समझा ...... यहां मीरा के हाथ अभी उसकी तरफ हवा में उठे हुए थे जिस तरफ माधव गया था और आंखे वही गेट पर टिकी हुई थी .... मीरा को पता भी नहीं हुआ लेकिन उसकी आंखों से आंसू लगातार गिर रहे थे ........मीरा के आगे अचानक सुधा आ गई जिससे मीरा की पलकें एक बार को झपकी .......और उसके आंखों से आंसू फिसल कर उसके गालो उतर कर नीचे टपक गया.......

वर्तमान दिन........माधव एक बेंच पर अपना सर टिकाकर अपनी आंखें बंद करके अपनी धुंधली अतीत की बातें सोच रहा था...उसका चेहरा एकदम शांत था। बर्फीली हवाओं की वजह से उसके गाल और नाक लाल हो चुके थे....उसकी आंखें उसके फोन की आवाज से खुली। वो अपनी सोच से बाहर आया। धीरे से अपने सर को उठाकर अपने फोन को अपनी जैकेट पॉकेट से निकाला...फोन में एक नंबर फ्लैश हो रहा था जोकी ऑफिस का था। माधव ने कॉल पिक किया और हैलो कहा ....... उधर से आवाज आई ...... सर आपसे मिले आपके कुछ दोस्त हैं आए !...

ये सुनकर माधव ने कहा... ठीक है मैं आ रहा हूं। .........और फिर फोन को वापस अपनी जैकेट में रख लिया और फिर अपने दोनों हाथों को बेंच पर टिकाकर एक गहरी सांस छोड़ा और फिर उठकर वहां से चला गया......थोड़ी ही देर में अपने कैंप में पहुंच गया... वो केबिन के अंदर गया तो देखा की वहा पर 3 लड़के खड़े थे जिनके चेहरे जाने पहचाने थे. ये और कोई नहीं बलकी माधव के दोस्त, सूरज, सागर, और विशाल थे। जो ट्रेनिंग एकेडमी से लेकर आजतक साथ थे...जिन्हें देख कर माधव काफी सरप्राइज हो गया था और साथ ही वो काफी खुश था अपने पुराने दोस्तों को अपने सामने देखकर.... वो आगे बढ़ा और सबसे एक एक कर गले मिलकर बोला...अरे वाह तुम लोग यहाँ कैसे भाई तुम लोग सा ठीक हो ना ........और फिर बैठने का इशारा किया ... सभी बैठ गए ...... उन में से एक जिसका नाम सूरज था वो खुश होते हुए बोला ....... अरे कुछ नहीं माधव बस अपना विशाल शादी कर रहा है उसी का इन्विटेशन देने आए हैं तुझे .......ये बात सुन माधव ने ख़ुश होते हुए विशाल की तरफ देखा और बोला......अरे वाह ये तो बहुत अच्छी बात है बधाई हो .

.......तब विशाल भी माधव को जवाब में कहता हैं... हा मैंने सोचा कि मैं ही पहले कर दूं क्योंकि कोई भी नहीं कर रहा है...कहीं से तो शुरूआत हो .....और हा बधाई से थोडी काम चलेगा। मेरी शादी में आना पड़ेगा और कोई बहाना नहीं चलेगा समझे...अगर लास्ट मोमेंट पर किसी ने नाटक किया तो देखना.......

तभी सागर विशाल को छेड़ते हुए बोला......तो क्या ?......फिर विशाल बोला...मैं ..तो मैं ...फिर कुछ सोच कर इधर देखते हुए बोला.. ....मैं शादी ही नहीं करूंगा......विशाल की बात सुनकर माधव और बाकी दोनों जोर जोर से हंसने लगे ......उनको ऐसे हंसता देख विशाल कन्फ्यूज होके बोला... अरे तुम लोग क्यों हंस रहे हो? ....

अपनी हंसी को कंट्रोल करते हुए सूरज ने कहा...अरे रहने दे भाई कोई अपने दोस्तों के लिए शादी छोड़ता है। इतना भी मत फ़ेक कि हम लपेट भी ना पाये.......इतना कहकर वो लोग फिर से हंसने लगे ......फ़िर विशाल चिढ़ते हुए बोला... अरे तुम लोग तो मेरी हर बात मजाक में ले लेते हो। .मुझे तुम लोगो से बात नहीं करनी ..........फिर माधव थोड़ा शांत हुआ और मुस्कुराते हुए बोला... अरे विशाल बुरा क्यों मानता है हम तो बस तेरी टांग खींच रहे हैं........चल छोड़ ये सब ये बता लड़की तेरी पसंद की है या अंकल आंटी की पसंद की है .........ये बात सुनके विशाल ने अपना हाथ खड़े कर लिय और बोला......अरे नहीं लड़की पसंद करने में मेरा कोई हाथ नहीं है। मेरे मम्मी पापा की जो पसंद है वही मेरी पसंद हैं। और वेसे भी मेरे बस की नहीं है लड़कियों को अप्रोच करना या फिर उन से बात करना। ......विशाल की इस बात और जोर से हंसते हुए सूरज बोला... हा हा पता है याद है माधव एक बार ये कॉलेज में एक लड़की से बात करने के लिए गया था और इसके मुंह से निकले पहले शब्द सुनकर रही लड़की ने इसको कितना मारा था....इसके तो पहले शब्द ही...'," बहन जी आपका नाम क्या हैं?......ये बोलकर सूरज और भी जोर जोर से हंसने लगा उसके साथ बाकी सब भी जोर जोर से हंसने लगे .....इस बार विशाल भी उन के साथ हंसा और हंसते ही बोला... भाई बहुत कुटा था उसने मुझे और अपने बॉयफ्रेंड को भी बुला के पीटावाया था उसने। तब से मेरी हिम्मत नहीं होती भाई किसी लड़की से बात करने की ........

साले को इतना डर लगता है लड़कियों से लेकिन शादी भी सबसे पहले यहीं कर रहा है... सागर ने विशाल को छेड़ते हुए कहा... सागर की बात सुनकर विशाल हल्का सा शरमाने लगा। उसका चेहरा शर्म से लाल होने लगा था..... जिसे देखा सूरज भी विशाल को छेड़ते हुए बोला.... अरे देखो तो जरा भाई की मुस्कान तो रुक ही नहीं रही है ......तब माधव भी बहती गंगा में अपना हाथ साफ करते हुए बोला...... हा हा अभी बेचारे को मुस्कुरा लेने दो शादी के बाद बेचारा कभी हंस नहीं पाएगा.... फिर हंसना अरे वो क्या होता है.........फिर तो बीवी आंखें दिखाएगी और ये सावधान को पोजीशन ले लेगा............ये कहकर फिर से बाकी सब हंसने लगे... फिर कुछ देर ये हंसी मजाक का सिलसिला चला जब वो लोग थोड़ा शांत हुए तो विशाल ने माधव से कहा.. वेसे माधव हमने भी कुछ सुना है....विशाल ये कहते हुए सूरज और सागर की तरफ देखा और बोला.उसका इशारा समझकर सागर ने भी माधव की तरफ देखा और बोला....हा हमने भी सुना है की जनरल की बेटी तुमसे बहुत प्यार करती है ...फिर उसकी बात हामी भरते हुए सूरज बोला.... हा हा हमने भी सुना है क्या ये सही है बताओ ?....

उनकी बातें सुनकर माधव थोडा कन्फ्यूज होते हुए बोला ..........जनरल कौन जनरल?..... क्या तुम मिस्टर विनायक की बेटी के बारे में बात कर रहे हो?...... माधव का सवाल सुन सबने अपना सर हा में हिला दिया ......माधव थोड़ा सिरियस होते हुए बोला......वो लड़की पागल है...उसकी बात को पूरा करते हुए विशाल बोला...पागल है तेरे प्यार में!.......

फिर माधव थोड़ा इरिटेट होते बोला... लेकिन मैं उससे कोई प्यार नहीं करता और ना ही उसके लिए ऐसा कुछ है मेरे दिल में ........और तुम लोगो को ये सब बकवास किसने बोला?.......माधव की बातें और एक्सप्रेशन देखकर साफ पता चल रहा था कि उसको ये बात जरा भी पसंद नहीं आई थी... ये देख वो तीनो भी सिरियस हो गए और सागर बोला...वो लड़की हमें यहीं तुम्हारे केबिन के बाहर मिली थी उसने हमें ये सब कुछ बताया...फिर अपने पास रखे एक गुलाब के फूलो को माधव को देते हुए बोला... और उसने कहा कि जब हम तुमसे मिले तो तुम्हें यह दे दे!.....माधव ने अपने हाथ आगे बढ़ाए और उन गुलाब के फूलो को अपने हाथ में ले लिया। उन गुलाब की डंडियों में चिपकी हुई एक पर्चो थी जिसे माधव ने खोला। उस में लिखा था "मिस्टर माधव।" आज रात मुझे आपका इंतज़ार रहेगा....... ये पढ़कर माधव के चेहरे पर गुस्सा साफ नजर आने लगा। फ्रस्ट्रैट होकर माधव ने उन गुलाब के फुलो को वही सोफ़े पर पटक दिया .........माधव का ऐसा रिएक्शन देखकर तीनो हेरान और परेशान हो गए...तब हिम्मत करके सूरज जो माधव के पास ही बैठा था उसने माधव के कंधों पर हाथ रखा और बोला......

माधव मैं जानता हूं तुम इस टॉपिक पर बात नहीं करना चाहते ...लेकिन छोडो यार भूल जाओ उसको वो जा चुकी तुम्हारी जिंदगी से .अपनी जिंदगी में आगे बढ़ो माधव.... तुम क्यू रुके हुए हो। जबकी वो तो कब की अपनी जिंदगी में आगे बढ़ चुकी है .. खुश है वो अपनी जिंदगी में ......... सूरज की बात जैसे ही माधव के कानो में गई माधव गुस्से से सूरज की तरफ देखने लगा।.माधव की आंखो में गुस्सा देखकर सूरज का हाथ जो अब तक माधव के कंधों पर था वो हल्के से उठ गया... और सूरज ने अपनी नजरें नीचे कर ली...

उसके बाद विशाल ने कहा... हा यार माधव जब से वो लड़की गई तब हमने बस यही चाहा है कि तुम उस से आगे बढ़ो ........माधव अपनी जगह से खड़ा हुआ उसके मन में वो सारी यादे घुमने लगी जिसमें माधव ने मीरा के साथ समय बिताया था। उसके कान में विशाल की आवाज तो जा रही थी लेकिन दिमाग तक नहीं पहुंच रही थी। वो अपनी ही सोच में डूबा हुआ अपनी जगह से उठकर चलने लगा और खिड़की के पास जाकर खड़ा हो गया.....और बाहर देखने लगा.... सभी खड़े होकर माधव के पास आए और उसे कहने की कोशिश करने लगे तो उन लोगो ने देखा कि माधव एक टक जगह काफी देर से देख रहा था। इसका मतलब ये था वो बहुत गेहरी सोच में था ......तभी विशाल ने अपनी आवाज को थोड़ा ऊंचा करते हुए बोला...... माधव तू सुन भी रहा है मैं क्या कह रहा हूं?... इसके आगे विशाल कुछ बोलता माधव ने अपना सर हल्का सा उनकी तरफ घुमाया ..गहरी और भारी आवाज़ में बोला...... मुझे तुम लोगो को कुछ दिखाना है!......उसके मुँह से ये सुन तीनो एक दूसरे को कन्फ्यूज और स्वलिया नज़रों से देखने लगे ........

कुछ देर बाद ......वो सभी एक कमरे में थे और सभी के चेहरे पर हेरानी के भाव थे और सभी बिना पलक झपकाए अपने सामने देख रहे थे.. उनके सामने मीरा लेटी थी... उसके शरीर पर जगह जगह कट और चोटो के निशान थे। आँखों के नीचे काले घेरे चेहरा एकदम शांत शरीर एक दम बेजान जान पडा था....और साथ लगे बिस्तर पर सुधा लेटी थी। उसके शरीर पर भी काफी चोटे थी........वो तीनो लगातार हेरान और कन्फ्यूज होकर कभी सामने देखते कभी एक दूसरे को ....तिनो के मन में एक ही सवाल था कि तभी सब के कानो में एक आवाज पड़ी .....ये दोनों यहां इस हालात में ......फिर उनकी तरफ मुड़कर बोला... यहीं सोच रहे हो ना तुम लोग!.......

अपने मन ने चल रहे सवाल को माधव से सुनके तीनो स्वालिया नजरों से देखते हुए उसके पास आए और बोलने लगे...... हा माधव ये यहां कैसे?... फिर विशाल ने कहा... हा इसकी तो शादी हो गई थी ना फ़िर ये...इतना कहकर वो शांत हो गया ..... माधव ने सभी की तरफ देखा और बोला......वही तो मुझे समझ नहीं आ रहा है। आख़िर ये दोनों यहाँ क्यों और कैसे.... सुधा की हालत तो फिर भी ठीक है लेकिन रा.... इतना कहकर माधव ने मीरा की तरफ देखा और कुछ पल रुक यही मीरा को देखते हुए बोला... लेकिन मीरा की हालत ठीक नहीं उसपर मीरा के अंदर एक नन्ही जान पल रह रही है.....ये सुन तीनो कन्फ्यूज होकर मीरा की तरफ देखने लगे कि उनके कानों में माधव की आवाज पड़ी... और उसपर मिस्टर विनायक ने बताया कि मीरा के पीछे पुलिस पड़ी है...ये बात सुन सभी ने झटके से माधव की तरफ से गर्दन घुमाई और एक साथ ही बोले...... क्या?...

हा!., यहां कि लोकल पुलिस को उन्होने इसके बारे में पता करते हुए देखा था....वो मीरा को हर जगह ढूंढ रहे है ........फिर माधव सूरज की तरफ देखते हुए थोड़ा इमोशनल होकर बोला..., सूरज हो सकता है कि मीरा के वादे, वो प्यार सब दिखावा हो या झूठ हो। लेकिन मैं उससे प्यार करता था दिल से और मैंने कभी नही चाहा था कि मीरा को ऐसी हालत में देखु.. चाहे वो मेरे साथ हो या किसी और के। लेकिन मेरा दिल कभी नहीं माना कि मीरा ने मुझे धोखा दिया हो। वो मुझसे प्यार करती थी मुझे उसकी आँखों में दिखता था। भले वो कुछ बोलती नहीं थी लेकिन मैं महसूस कर पता था..........मुझे तो यहीं समझ नहीं आ रहा कि ऐसा भी क्या हो गया इसके साथ जो ये यहां इस हालात में है ........ सबने उसकी बात सुनी और सागर ने कहा...... लेकिन माधव तुम यहाँ हो इन्हें कैसे पता?....

इस बात का माधव ने जवाब दिया...... मुझे नहीं पता ये हमें ट्रेनिंग करते वक्त बर्फ़ दबे हुए मिले और ये वहा कब से थे हमे नहीं पता। ...सुरज जो अभी तक माधव की बात सुन रहा था। वो धीरे से चलते हुए सुधा के बिस्तर के पास गया और उसको ऊपर से नीचे देखने लगा... उसकी आँखों में भी आंसू थे... वो अपना हाथ बढ़ा कर सुधा के चेहरे के पास लाने लगा.... ये करते वक्त उसकी आंखों से एक आंसू निकला और सुधा के गालों पर जा गिरा।......................