❤️ तेरे लिए ❤️
प्यार… एक ऐसा अहसास जो इंसान को उसकी हकीकत से दूर किसी और ही दुनिया में ले जाता है।
ये कहानी है अयान और रिया की, जिन्होंने मोहब्बत तो सच्ची की, लेकिन वक्त ने उनके इम्तिहान भी बहुत लिए।
---
पहली मुलाकात
अयान और रिया की मुलाकात कॉलेज के पहले दिन हुई थी। रिया नए-नए माहौल में थोड़ी घबराई हुई थी। क्लास में जब सब हँस-बोल रहे थे, वो कोने की सीट पर अकेली बैठी थी।
अयान ने उसे देखा और मुस्कुराते हुए पास जाकर बोला –
“हाय, मैं अयान… तुम अकेली क्यों बैठी हो?”
रिया हल्की मुस्कान के साथ बोली –
“कुछ खास नहीं, बस यूँ ही।”
उस एक छोटी-सी बातचीत ने दोनों के बीच दोस्ती की नींव रख दी।
---
दोस्ती से मोहब्बत तक
शुरुआत में दोनों सिर्फ़ अच्छे दोस्त बने। साथ पढ़ाई करना, लाइब्रेरी में घंटों बिताना, कैंटीन में कॉफ़ी शेयर करना – ये सब उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन गया।
धीरे-धीरे अयान को एहसास हुआ कि वो रिया को सिर्फ़ एक दोस्त से ज़्यादा पसंद करता है।
लेकिन उसने कभी इज़हार नहीं किया। डर था कहीं दोस्ती भी न टूट जाए।
रिया भी अपने दिल में अयान के लिए वही जज़्बात महसूस करने लगी थी। बस दोनों एक-दूसरे की आँखों में वो प्यार पढ़ लेते थे, लेकिन जुबान पर कभी नहीं लाते।
---
इज़हार
एक दिन कॉलेज की वार्षिक पार्टी में सब नाच-गा रहे थे। अयान ने हिम्मत जुटाई और रिया को डांस के लिए हाथ बढ़ाकर कहा –
“रिया, आज अगर तुमने मेरा हाथ थाम लिया तो मैं समझूँगा कि तुम्हें भी मुझसे कुछ कहना है।”
रिया ने बिना कुछ बोले मुस्कुराते हुए उसका हाथ पकड़ लिया।
बस वही पल था, जब बिना शब्दों के इज़हार हो गया।
---
तेरे लिए – सब कुछ
अब दोनों का रिश्ता प्यार में बदल चुका था।
अयान हर छोटी-बड़ी चीज़ रिया के लिए करता। उसका फेवरेट खाना लाना, क्लास के नोट्स बनाना, यहाँ तक कि बारिश में भीगकर भी उसके लिए छाता लाना।
रिया भी कहती –
“अयान, तुम इतना क्यों करते हो मेरे लिए?”
अयान हमेशा मुस्कुराकर कहता –
“तेरे लिए… कुछ भी।”
---
मुश्किलों की आहट
लेकिन कहते हैं ना, हर कहानी में मोड़ आता है।
रिया के पापा बहुत सख्त थे। जब उन्हें रिया और अयान की दोस्ती के बारे में पता चला तो उन्होंने साफ़ कह दिया –
“हमारी इज़्ज़त सबसे ऊपर है। हमें किसी भी हालत में ये रिश्ता मंज़ूर नहीं।”
रिया की आँखों में आँसू थे। वो चाहकर भी अयान के खिलाफ नहीं जा सकती थी।
---
जुदाई का दर्द
वक़्त ने दोनों को अलग कर दिया।
रिया को घर से निकलने की इजाज़त कम हो गई, फोन छिन लिया गया। अयान दरवाज़े पर घंटों खड़ा रहता, लेकिन मुलाकात नहीं हो पाती।
एक दिन रिया ने चुपके से अयान को चिट्ठी भेजी –
“अयान, मैं चाहकर भी तेरे साथ नहीं रह सकती। पापा के ख़िलाफ़ जाने की हिम्मत नहीं। लेकिन यकीन मानो, मैं तुझे हमेशा चाहूँगी। तेरे लिए मेरी दुआएँ हमेशा रहेंगी।”
ये पढ़कर अयान टूट गया।
---
नई शुरुआत
समय बीता, रिया अपने परिवार की मर्ज़ी से शादी कर ली।
अयान ने भी अपनी पढ़ाई पूरी कर एक अच्छी नौकरी पाई। लेकिन उसके दिल में रिया की याद हमेशा जिंदा रही।
वो अकसर अपने दोस्तों से कहता –
“प्यार पाने का नाम नहीं है, प्यार देने का नाम है। मैंने रिया से प्यार किया, और आज भी करता हूँ… बस उसके लिए।”
---
अंत
कभी-कभी अयान पुराने कॉलेज कैंपस के पास से गुजरता और वही बेंच देखता जहाँ वो और रिया बैठा करते थे।
उसकी आँखें भीग जातीं, लेकिन होंठों पर हल्की मुस्कान आ जाती।
क्योंकि असली मोहब्बत वही होती है जिसमें इंसान कह सके –
“तेरे लिए… मैं आज भी वही हूँ।”
---
✨ अगर आपको ये कहानी पसंद आई हो तो फॉलो ज़रूर करें ✨