Fear of Betal in Hindi Horror Stories by Vedant Kana books and stories PDF | बेताल का खौफ

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बेताल का खौफ

रात के घने अंधेरे में, हवाओं के साए में, एक ऐसा जंगल था, जहाँ लोग कभी भी पैर रखने से डरते थे। यह जंगल अपनी डरावनी कहानियों के लिए प्रसिद्ध था, लेकिन एक कहानी थी, जो इस जंगल के अंधेरे में भी चुपचाप घातक बन चुकी थी "बेताल की कहानी"

हर कोई जानता था कि इस जंगल में कुछ अदृश्य ताकतें हैं, जो रात के समय इंसान को अपनी गिरफ्त में ले लेती हैं। कहते हैं कि जिन लोगों ने इस जंगल के अंधेरे में कदम रखा, वो कभी वापस नहीं लौटे। और यह कहानी, वही खौफनाक कहानी है जो हमें सुनानी है।



चाँदनी रात थी, और एक युवक, जो अपनी जान को जोखिम में डालने का शौक रखता था, उस खौफनाक जंगल के बीचों-बीच खड़ा था। उसका नाम विजय था, और उसने सुना था कि बेताल का आत्मा जंगल के पुराने किले में बसा हुआ है।

विजय का दिल धड़कते हुए इस किले की ओर बढ़ रहा था। उसके मन में अजीब से विचार थे – क्या वह बेताल के अस्तित्व को चुनौती दे सकता है? क्या वह डर को पराजित कर सकेगा?

जैसे ही उसने किले के पास कदम रखा, हवा एकाएक तेज़ हो गई। अचानक, एक सर्द सिहरन उसके शरीर में समा गई। ऐसा लगा जैसे जंगल ने अपनी चुप्पी तोड़ी हो।

सन्नाटे में कोई हलचल थी, जैसे कोई उसकी निगाहों से देख रहा हो। विजय ने अपने कदम और तेज़ कर दिए और किले के भीतर दाखिल हुआ।

किला अंधेरे में डूबा हुआ था, और उस अंधेरे में विजय की आंखों के सामने अजीब-सी छायाएँ झूल रही थीं। अचानक, एक तेज़ आवाज़ आई, जैसे किसी के गले से हंसी निकल रही हो।

विजय ने सिर उठाया, और सामने की दीवार पर एक दीवार चित्र से बेताल की आकृति नजर आई। उसकी आँखें लाल और तेज़ चपचपाती हुई थीं, जैसे वह किसी को अपनी गिरफ्त में लेना चाहता हो। विजय ने इसे नज़रअंदाज़ करने की कोशिश की, लेकिन जैसे ही उसने किले की गहराई में कदम रखा, खौफ और भी बढ़ गया।

जंगल से एक अदृश्य आवाज़ आई, "तुम यहाँ क्या कर रहे हो?" विजय के रोंगटे खड़े हो गए। वह सोचने लगा कि यह आवाज़ कहाँ से आई, लेकिन आसपास कोई नहीं था।

फिर अचानक उसके सामने हवा में हलचल हुई और एक आक्रामक धुंआ सा फैलने लगा। धुंआ बढ़ता ही जा रहा था, और फिर विजय ने देखा, किले के कोने में एक असामान्य आकृति खड़ी थी – बेताल!

बेताल का चेहरा विकृत था, और उसके चारों ओर अजीब सी ऊर्जा थी। उसकी आँखों में खौफनाक तेज़ चमक थी, और उसके पास से एक राक्षसी हंसी गूंज रही थी। विजय ने दिमागी तौर पर खुद को शांत करने की कोशिश की, लेकिन बेताल के रहस्यमय रूप ने उसे अपनी चपेट में ले लिया।

विजय ने बेताल से पूछा, "तुम कौन हो? और यहाँ क्यों हो?" बेताल ने अपनी आंखों की चमक को बढ़ाते हुए कहा, "मैं वही हूँ, जो तुम्हें यहां लेकर आया है। तुमने इस जंगल में कदम रखा है, तो अब तुम्हें मुझे सामना करना ही होगा।" विजय ने हिम्मत जुटाते हुए कहा, "मैं तुम्हें हराकर बाहर निकल जाऊँगा।"

लेकिन बेताल के हंसी के साथ उसकी आवाज़ एक अजीब ध्वनि में बदल गई, और उसके बाद उसने विजय से एक सवाल पूछा: "तुम सच में चाहते हो जानना कि मैं कौन हूँ?" विजय ने गर्दन हिलाई, और बेताल ने उसे अपना असली रूप दिखाया – बेताल का चेहरा अब इंसान से कहीं ज्यादा डरावना था, उसकी शरीर पर जंगली निशान थे और उसकी आंखों में अंधकार था।

तभी, बेताल ने विजय के सामने एक घेरा बना दिया और कहा, "तुमने मुझे यहाँ आने दिया है, विजय। तुम्हारा अंधकार तुमसे जुड़ा है। अब जो होगा, वह तुमसे नहीं बच सकता।"


विजय को अचानक एहसास हुआ कि बेताल केवल एक भूत-प्रेत नहीं था, वह एक प्रतीक था – डर और शैतान की शक्ति का। वह बेताल की गिरफ्त में था, और उसे अपने जीवन की सच्चाई का सामना करना पड़ा। लेकिन जैसे ही विजय ने बेताल का सामना किया, एक अजिब सी शक्ति ने उसे दबा लिया और बेताल की हंसी गूंजती रही।

अंत में, जंगल की खामोशी फिर से लौट आई, लेकिन विजय कभी वापस नहीं लौटा। उस रात के बाद, यह जंगल और भी खौफनाक हो गया। और यही कहानी अब तक सुनाई जाती है – विजय की तरह और भी लोग इस खौफनाक किले में आए, लेकिन कोई भी लौटकर नहीं आया।

क्या बेताल का खौफ अब खत्म हो गया है? क्या विजय को फिर कभी मुक्त किया जाएगा? या फिर, यह किला डर का एक अनंत खेल बन जाएगा? क्योंकि डर कभी खत्म नहीं होता।

जंगल के भीतर अब भी लोग गायब हो रहे हैं, और बेताल की हंसी कभी थमती नहीं। शायद, विजय का रूप अब जंगल के किसी कोने में फिर से छिपा है, इंतजार कर रहा है अगली आत्मा का…