Bewafa - 36 in Hindi Love Stories by Mehul Pasaya books and stories PDF | बेवफा - 36

Featured Books
Categories
Share

बेवफा - 36

एपिसोड 36: विजय का पलटवार

एक नई चुनौती

समीरा को लगा था कि विजय की धमकियों से अब उसे छुटकारा मिल जाएगा, लेकिन वह गलत थी। पुलिस ने भले ही विजय की करतूत को पकड़ लिया था, लेकिन अब वह पहले से भी ज्यादा खतरनाक हो गया था।

रात को करीब ग्यारह बजे समीरा के फोन पर फिर से एक अनजान नंबर से कॉल आया।

"हैलो?"

"तुम सोच रही थी कि मैं हार मान जाऊँगा?"

समीरा के रोंगटे खड़े हो गए। यह वही आवाज़ थी—विजय की।

"तुम जेल में हो, फिर भी तुम..."

"तुम्हें क्या लगा, समीरा? मैं अंदर हूँ तो कुछ नहीं कर सकता? तुम मुझे कमजोर समझ रही हो, लेकिन तुम भूल गई कि मैं जो चाहता हूँ, वो लेकर ही रहता हूँ।"

समीरा का दिल तेजी से धड़कने लगा। उसने तुरंत कॉल काट दी और फोन स्विच ऑफ कर दिया।

आर्यन की चिंता

अगली सुबह जब वह ऑफिस पहुँची, तो उसका चेहरा उतरा हुआ था।

"क्या हुआ?" नेहा ने पूछा।

समीरा ने कुछ नहीं कहा, बस अपनी सीट पर बैठ गई।

थोड़ी देर बाद आर्यन भी वहाँ आ गया।

"समीरा, सब ठीक है?"

"विजय... उसने फिर से कॉल किया था।"

आर्यन के चेहरे की रंगत उड़ गई। "क्या? कब?"

"कल रात।"

"यह अब हद से बाहर जा रहा है। हमें पुलिस को बताना होगा।"

पुलिस की चेतावनी

आर्यन और समीरा तुरंत पुलिस स्टेशन गए और इंस्पेक्टर से मिले।

"हमने विजय के जेल में फोन इस्तेमाल करने पर रोक लगा दी थी, लेकिन लगता है कि उसके किसी आदमी ने बाहर से कॉल किया होगा," इंस्पेक्टर ने कहा।

"तो क्या अब भी वह हमें नुकसान पहुँचा सकता है?"

"हम इस मामले को गंभीरता से ले रहे हैं। हमने उसकी गतिविधियों पर नजर रखने के लिए एक स्पेशल टीम तैनात कर दी है। लेकिन आपको भी सतर्क रहना होगा।"

एक नया खतरा

उसी रात समीरा अपने घर में अकेली थी। उसने दरवाजे ठीक से बंद कर लिए थे और खिड़कियों पर पर्दे डाल दिए थे। लेकिन फिर भी उसे एक अजीब-सी बेचैनी हो रही थी।

तभी उसके दरवाजे पर किसी ने दस्तक दी।

उसका दिल जोर से धड़कने लगा।

"कौन है?" उसने डरते-डरते पूछा।

कोई जवाब नहीं आया।

दस्तक और तेज हो गई।

समीरा ने कांपते हाथों से फोन उठाया और आर्यन को कॉल किया।

"आर्यन, कोई मेरे दरवाजे पर है!"

"मैं अभी आ रहा हूँ! दरवाजा मत खोलना!"

समीरा ने फोन रखा और अंदर से कुंडी और मजबूत कर ली। उसने खिड़की से झांककर बाहर देखा, लेकिन अंधेरे में कुछ नजर नहीं आया।

तभी अचानक दस्तक बंद हो गई।

कमरे में खामोशी छा गई।

कुछ देर बाद आर्यन और पुलिस दोनों वहाँ पहुँच गए।

रहस्य गहराता है

पुलिस ने चारों ओर तलाशी ली, लेकिन कोई भी नहीं मिला।

"शायद यह तुम्हें डराने के लिए किया गया हो," इंस्पेक्टर ने कहा।

"लेकिन यह कोई मज़ाक नहीं है। मुझे सच में ऐसा लगा कि कोई दरवाजा तोड़ने की कोशिश कर रहा था," समीरा ने कहा।

"हम यहाँ एक पुलिसकर्मी तैनात कर देंगे। अगर कोई फिर से आता है, तो हम उसे पकड़ लेंगे।"

आर्यन की सख्त चेतावनी

जब सब कुछ शांत हुआ, तो आर्यन ने समीरा से कहा, "अब बहुत हो गया। मैं तुम्हें इस हालत में नहीं देख सकता।"

"पर मैं कर भी क्या सकती हूँ?"

"मैं चाहता हूँ कि तुम कुछ दिनों के लिए मेरे घर चलो। वहाँ तुम ज्यादा सुरक्षित रहोगी।"

समीरा को यह विचार सही लगा, लेकिन उसे डर था कि अगर वह भाग जाएगी, तो विजय और ज्यादा ताकतवर महसूस करेगा।

"नहीं, मैं भागना नहीं चाहती। मुझे उसका सामना करना है," उसने दृढ़ता से कहा।

"अगर ऐसा है, तो मैं तुम्हारे साथ रहूँगा," आर्यन ने कहा।

विजय की अगली चाल

अगली सुबह पुलिस से एक चौंकाने वाली खबर आई—विजय को अस्थायी रूप से जमानत मिल गई थी।

"क्या?" समीरा के पैरों तले जमीन खिसक गई।

"हाँ, लेकिन हम उसकी हर गतिविधि पर नजर रखेंगे।"

"इसका मतलब है कि अब वह खुलेआम मुझे नुकसान पहुँचा सकता है!"

"हम उसे नज़र में रखेंगे, लेकिन आपको भी सतर्क रहना होगा," इंस्पेक्टर ने कहा।

समीरा को लगा कि उसका बुरा सपना सच होने वाला है।

क्या विजय अब खुलकर हमला करेगा?

क्या वह उसे रोक पाएगी?

(जारी...)