Anokha Vivah - 23 in Hindi Love Stories by Gauri books and stories PDF | अनोखा विवाह - 23

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अनोखा विवाह - 23

अनिकेत अपने कमरे में बैठा सुहानी को देख रहा था सुहानी बेड पर चुपचाप बैठी थी अनिकेत सोफे से उठकर सुहानी के पास बैठता हुआ सुहानी से थोड़ा सख्त लहजे में पूछता है ," क्या कर रही हो तुम तैयार नहीं हूई घर नहीं जाना तुम्हें? "

सुहानी- " जाना है" ,,,,,,,,,, अच्छा जाना है पर मेरा मन तो नहीं है तुम्हें कहीं भी जाने देने का लेकिन हां अगर तुम्हारा बहुत मन है तो तुम्हें घर जाने को मिलेगा पर उसके पहले मैं जो पूछूंगा उसका सही सही जवाब देना होगा बोलो दोगी  सुहानी- हां,,,,,,, अनिकेत फिर से थोड़ा सख्त लहजे में ही अपने प्रश्न को शुरू करता है," ये बताओ शादी वाले दिन वो  अपनी दीदी का लहंगा तुमने अपने मन से पहना था या फिर तुम्हें किसी ने कहा था पहनने को क्यों कि शादी तो तुम्हारी दीदी की थी ना तुम्हारी नहीं किसी ने तुम्हें रोका नहीं, हम्ममम बोलो " ,,,,,,, सुहानी, अनिकेत का सवाल सुनकर एकदम चुप हो जाती है उसे समझ नहीं आता कि जो बात उसकी दीदी ने किसी को भी बताने को इसलिए मना कर दी थी कि अगर उसने किसी को भी ये बात बताई तो उसकी दीदी मर जाएगी ,वो बात कैसे सुहानी किसी को बता सकती है इसलिए उसने मन में ही फैसला किया कि वो अनिकेत को मना कर दे कि उसे नहीं पता , सुहानी ने धीरे से अनिकेत के सवाल पर जवाब में ना में सिर हिला दिया, पर अनिकेत को सुहानी की ये बात अच्छी नहीं लगी उसने एक बार और सुहानी से कहा ," देखो मैं तुम्हें ये नहीं कह रहा कि तुम्हें पता है या नहीं तुम्हें कह रहा हूं कि बताओ उस दिन क्या हुआ था? ,,,,,,और ये जो इतने दिन से तुमने चुप रहने की कसम खाई है ना इसे भी तोड़ो समझ गई? 

अनिकेत के दोबारा पूछने पर भी सुहानी साफ मना कर देती है कि हमें नहीं पता, ये पहली बार था जब सुहानी  ने इस टोन‌ में और इस तेवर में अनिकेत से बात की थी , अनिकेत को सुहानी की इस बात पर अब गुस्सा आ रहा था कि अनिकेत कब से उससे कुछ पूछ रहा है और वो है कि इतने नखरे दिखा रही है अब अनिकेत ने भी ठान लिया था कि अब तो सुहानी से आज और अभी उस बात को जान कर रहेगा अनिकेत ने एक आखिरी बार फिर सुहानी से कहा," सुहानी ये आखिरी बार है अगर एक बार और मुझे तुमसे पूछना पड़ा तो फिर तुम इस घर से तो दूर बल्कि इस कमरे से भी नहीं निकल पाओगी वो भी जब तक तुम मुझे वो बात नहीं बता देती , अब सुहानी भी अनिकेत की बात सुनकर डर गई पर उसकी भी मजबूरी थी तो उसने अनिकेत से दीदी के मरने की बात बताई जिस पर अनिकेत को अब ज्यादा गुस्सा आ रहा था क्योंकि वो जानता था कि इसी तरह सुहानी को उसने बेवकूफ बनाया, पर अनिकेत भी कहां मानने वाला था अब उसने सुहानी को एक और मौका ना देते हुए कमरे का गेट लॉक किया और थोड़ा डराने के उद्देश्य से सुहानी के थोड़ा पास जाने लगा ,,बोलो बताओगी या फिर मैं कुछ और सोचूं , अनिकेत ने जैसे ही सुहानी के हाथ के ऊपर हाथ रखना चाहा सुहानी ने तुरन्त अपने हाथ को जोर से खींच लिया और अनिकेत की इस हरकत से सुहानी  सच में डर गई और बताने लगी 

सुहानी - वो , दीदी ने मना किया था उन्होंने कहा कि अगर हमने वो लहंगा नहीं पहना तो मां पापा मुझे अपने से दूर भेज देंगे,,,,, सुहानी की इस बात पर अनिकेत को कुछ समझ नहीं आता तो वो सुहानी से कहता है," देखो मुझे ठीक से बताओ हुआ क्या था और क्यों तुम्हें तुम्हारे ही मां पापा खुद से दूर भेज देंगे बोलो ,,,,,,,,,,,वो दीदी की शादी के एक दिन पहले हम और दीदी पार्लर गए थे उसके बाद एक जगह गए थे वहां पर दीदी ने हमें एक टेबल पर बैठा कर हम लोगों के लिए कुछ खाने के लिए बोलकर चली गई तब तक दो लोग आए और हमारे साथ तस्वीर ले ली हमने मना भी किया लेकिन तब तक दीदी आ गई उन लोगों ने मेरी तस्वीर दीदी को दिखाई और कहा कि ये तस्वीर वो मेरे मां पापा को दिखाएंगे और फिर वो हमें खुद से दूर भेज देंगे पर दीदी ने उन लोगों से बहुत कहा कि तस्वीर हटा दें फोन से पर उन लोगों ने कहा कि वो तभी हटाएंगे जब कल दीदी की जगह हम शादी करेंगे आपसे तो फिर हमने दीदी की बात मान ली और उनकी जगह हमने लहंगा पहन लिया और उन लोगों ने कहा कि अगर हमने ये बात किसी को बताई तो वो दीदी को मार देंगे,,,,,,, इतना बताकर सुहानी बहुत जोर जोर से रोने लगती है और रोते हुए एक ही बात कहती हैं कि अब दीदी मर जाएगी ,,,,,,,,, अनिकेत, सुहानी की ये बात सुनकर खुद को रोक नहीं पाता और जोर से चिल्लाता है ," बस बहुत हुआ अगर तुमने एक भी आंसू अपनी उस चालबाज बहन के लिए बहाया तो उसका पता नहीं लेकिन मैं तुम्हें जरूर मार दूंगा अब एकदम चुप हो जाओ एकदम चुप ...,,, अनिकेत की ऐसी आवाज सुनकर सुहानी को अनिकेत से डर लग रहा था पर अनिकेत खुद समझ नहीं पा रहा था कि अब वो क्या करे उसे आखिर अब क्या करना चाहिए,,,,,तभी उसके फोन पर एक फोन कॉल आता है जो कि उसके दादू अखण्ड प्रताप का था ,,, अनिकेत उस कॉल को रिसीव कर गुस्से से कांपती हुई आवाज में हेल्लो बोलता है पर उधर से कुछ आवाज आती उससे पहले ही इधर से फोन‌ कट जाता है उसे ऐसा लग रहा था कि इन सब में उसकी क्या गलती है उसके साथ ऐसा क्यों हुआ उसने शादी के लिए हां की थी क्यों कि उसने एक ऐसी पत्नी की कल्पना की थी जो उसके बराबर होगी और जिससे उसे हेल्प मिलेगी लेकिन यहां तो सब कुछ बहुत ही अलग था , तीन महीने बाद उसके बर्थडे वाले दिन उसे ठाकुर इन्टरप्राइजेज का सीईओ बना दिया जाएगा जहां दुनिया को उसे एक सक्सेसफुल सीईओ के नाम से जानना चाहिए वहां दुनिया उसे एक ऐसी लड़की का पति के रूप में जानेगी जिसे कुछ भी नहीं आता और ऊपर से दुनिया से कैसे इन्टरैक्ट करते हैं उसे तो ये भी नहीं पता यही सब सोचते सोचते दोपहर का बारह बज गया था

अनिकेत अचानक से अपनी जगह से उठता है और सुहानी की साइड के पास रखे स्टूल से एक ग्लास में पानी डालकर पीने लगता है और बराबर सुहानी को घूरता रहता है आज का दिन ऐसा था कि आज के पहले कभी अनिकेत को इतनी गुस्सा नहीं आई थी फिर भी वो अपने गुस्से पर बहुत कन्ट्रोल करते हुए सुहानी से कहता है ," तैयार हो तुम्हारे घर चलना है मैं अभी मानसी को भेज रहा हूं उससे पहले अपना ये चेहरा बहुत अच्छे से धुल लेना किसी को पता नहीं चलना चाहिए कि हमारे बीच आज क्या बात हुई है और खासकर तुम्हारी उस बत्तमीज बहन को ,,, सुहानी जहां अपनी दीदी के लिए ये सुनती है वो रोते हुए फिर से कुछ कहने की कोशिश करती इससे पहले ही अनिकेत , सुहानी के मुंह पर हाथ रख उसे चुप करवा देता है और धीरे से कहता है ,"  मैंने अभी तुमसे कहा था कि अपनी बहन के लिए एक आंसू नहीं बहाना लेकिन तुम्हें समझ नही आएगा ना वैसे भी मुझे बहुत तेज गुस्सा आ रही हैं मैं नहीं चाहता कि किसी और की ग़लती की सजा मैं तुम्हें दूं मैं तुम्हें तुम्हारे घर ले चलूंगा क्यों रश्म है लेकिन इससे ज्यादा की उम्मीद मुझसे मत लगाना,,,,,, सुहानी बस रोए जा रही थी थोड़ी देर बाद सुहानी और अनिकेत सुहानी के घर जाने को तैयार थे ............


आखिर क्या फैसला लेगा अनिकेत देखने के लिए पढ़ते रहिए" अनोखा विवाह ".....

❤️आप हमेशा मुस्कुराते रहे❤️