KHOYE HUE HUM - 3 in Hindi Love Stories by Mehul Pasaya books and stories PDF | खोए हुए हम - 3

Featured Books
Categories
Share

खोए हुए हम - 3

खोए हुए हम – एपिसोड 3
"Silent Shore" की वापसी

शाम के हल्के नारंगी आसमान के नीचे, हवा में एक जानी-पहचानी ठंडक थी। वही पुराना रास्ता, वही समुद्र की धीमी लहरें और वही जगह—जिसे अब मेहुल और रेनी ने "Silent Shore" नाम दिया था। यह वही जगह थी जहाँ पहली बार मेहुल और रेनी की मुलाकात हुई थी। लेकिन इस बार, यह सिर्फ एक इत्तेफाक नहीं था। वे जानबूझकर यहाँ आए थे।

रेनी ने हल्की मुस्कान के साथ हवा को अपने चेहरे पर महसूस किया। "कितना अजीब लगता है न? जैसे समय यहाँ ठहर सा गया हो... कुछ भी बदला नहीं।"

मेहुल ने उसकी ओर देखा, उसकी आँखों में वही पुरानी यादों की झलक थी। "हाँ, लेकिन हम बदल गए हैं।"

दोनों चुपचाप किनारे की ओर बढ़े। सागर की लहरें उनके पैरों के नीचे रेत को बहा ले जाती थीं, जैसे वक्त उनकी यादों को कहीं दूर ले जाने की कोशिश कर रहा हो।

"तुम्हें याद है? पहली बार जब मिले थे, तुमने मुझसे कहा था कि यह जगह तुम्हें सुकून देती है," रेनी ने हल्की हँसी के साथ कहा।

मेहुल मुस्कराया, "और तुम्हें याद है? तुमने कहा था कि सुकून से ज्यादा यह जगह तुम्हें अजीब लगती है, जैसे यह कोई अधूरी कहानी हो।"

रेनी ने सिर हिलाया, "शायद अब यह अधूरी नहीं रही।"

वे दोनों किनारे पर बैठ गए। हवा की नमी उनके बालों को हल्के से छू रही थी। चुप्पी ने उनके बीच एक अनकहा संवाद बुन दिया था। मेहुल ने अपनी घड़ी उतारी और रेत पर रख दी। "समय को भूल जाओ, सिर्फ इस लम्हे को जियो।"

रेनी ने मुस्कराकर उसकी तरफ देखा। "अगर हम चाहें भी, तो क्या समय को रोक सकते हैं?"

मेहुल ने धीरे से जवाब दिया, "कम से कम आज रात के लिए तो रोक सकते हैं।"

वे देर रात तक वहीं बैठे रहे। अतीत, वर्तमान और भविष्य की बातें करते हुए। ऐसा लगा जैसे Silent Shore, जिसे उन्होंने खुद नाम दिया था, उनकी हर बात सुन रहा हो, हर याद को अपने लहरों के साथ बहा रहा हो, लेकिन कुछ एहसासों को हमेशा के लिए समेट कर रख भी रहा हो।

यह रात सिर्फ एक मुलाकात नहीं थी—यह एक वादा था। एक अनकहा वादा कि चाहे जो भी हो, यह जगह हमेशा उनकी होगी।


---

मेहुल: "रेनी, फाइनली अब हमने इस जगह का नाम तो रख दिया, और ढेर सारी बातें भी कर लीं, एक-दूसरे को गहराई से देख भी लिया... लेकिन अब जो खास बात है, वो हमें क्लियर कर लेनी चाहिए, शायद।"

रेनी: (थोड़ा मुस्कराते हुए) "खास बात? कौन सी खास बात, मेहुल?"

मेहुल: (गहरी सांस लेते हुए) "देखो, हम यहाँ सिर्फ पुरानी यादें ताज़ा करने नहीं आए हैं, ना ही सिर्फ इस जगह को नाम देने। इस जगह का हमारे रिश्ते से एक गहरा जुड़ाव होने वाला है, और मुझे लगता है कि अब हमें खुद से एक जरूरी सवाल पूछना चाहिए।"

रेनी: (थोड़ा गंभीर होकर) "कौन सा सवाल?"

मेहुल: "हम यहाँ क्यों हैं, और हमारा रिश्ता कहाँ जा रहा है?"

रेनी: "हाँ, मैं जिस रोशनी को ढूंढने को बोल रही थी, शायद वो यही है। फाइनली मुझे एक रोशनी मिल गई है। हाँ, मैं समझ रही हूँ कि आप मुझसे कौन सा रिश्ता जोड़ना चाहते हैं। मैं तैयार हूँ इस रिश्ते के लिए। मुझे यह रिश्ता मंज़ूर है।"

(मेहुल की आँखों में एक हल्की चमक आई, जैसे उसकी सारी उलझनें अब साफ हो गई हों। उसने एक गहरी सांस ली और हल्की मुस्कान के साथ रेनी को देखा।)

मेहुल: "तुम्हें नहीं पता, ये सुनकर मुझे कितनी राहत मिली है, रेनी। मैं कभी नहीं चाहता था कि ये सब सिर्फ मेरे मन में हो… मैं चाहता था कि तुम भी इसे उतनी ही शिद्दत से महसूस करो जितना मैं करता हूँ।"

(रेनी ने हल्के से अपना हाथ मेहुल के हाथ पर रख दिया। समुद्र की लहरें जैसे इस नए बंधन की गवाही दे रही थीं। हवा में एक अजीब सी गर्माहट थी, मानो यह लम्हा हमेशा के लिए ठहर गया हो।)

रेनी: "मेहुल, मैं जानती हूँ कि हम दोनों बहुत अलग हैं, लेकिन शायद इसी वजह से हम एक-दूसरे के करीब हैं। मैंने कभी नहीं सोचा था कि मेरी तलाश यहाँ खत्म होगी, लेकिन शायद कुछ चीज़ें हमें हमारी मंज़िल तक खुद लेकर जाती हैं।"

मेहुल: "हाँ मिस, और मैं चाहता हूँ कि अब ये करीबी और ज्यादा बढ़ जाए, हमारे बीच एक इंच की भी जगह न बचे।"

रेनी: "और आप ये 'मिस-मिस' करना बंद करो। मेरा नाम रेनी है, और अब चलो, थोड़ा पास आओ और मुझे अपनी बाहों में घेर लो।"

(मेहुल हल्के से मुस्कराया। रेनी की आँखों में एक अलग सी शरारत थी, और इस बार वह खुद दूरी खत्म कर रही थी। उसने हल्के से अपने दोनों हाथ मेहुल के कंधों पर रखे, और बिना किसी झिझक के उसे अपनी बाहों में समेट लिया। मेहुल एक पल के लिए चौंक गया, लेकिन फिर उसकी बाहें खुद-ब-खुद रेनी के चारों ओर कसने लगीं। समुद्र की लहरें जैसे इस पल की गवाही दे रही थीं।)

मेहुल: "अब हम इतना आगे बढ़ ही रहे हैं, तो तुम्हारी तारीफ में कुछ बोल दूँ? ये नशीली आँखें और ये रसीले होंठ, ये गोरे गाल और चिकनी कमर... आए हाए! ऐसे मत देखो मेरी जान, वरना किस कर लूंगा तुम्हारे इन लाल गुलाबी होंठों पर।"

रेनी: (हल्की हँसी के साथ) "तो किस करने से कौन रोक रहा है, मिस्टर मेहुल?"

(मेहुल थोड़ा और पास आया, लेकिन जैसे ही उसने कुछ और करीब जाने की कोशिश की, रेनी ने हल्के से पीछे हटते हुए मुस्कराकर कहा—)

रेनी: "अरे-अरे! इतनी जल्दी क्या है? थोड़ा इंतजार तो करना पड़ेगा!"

मेहुल: "अच्छा, मतलब इतनी देर से मैं यहाँ रोमांस करने की कोशिश कर रहा हूँ और तुम अब कह रही हो कि इंतजार करो?"

रेनी: "हाहा! प्यार में इंतजार का अपना ही मज़ा होता है, मेहुल। और वैसे भी, मैं चाहती हूँ कि जब वो पल आए, तो वो सबसे खास हो, सबसे अलग।"

(मेहुल मुस्कराया और हल्के से उसकी नाक दबा दी।)

मेहुल: "ठीक है मैडम, जैसे आप चाहें। लेकिन याद रखना, मैं इंतजार करने वालों में से नहीं हूँ!"