हम हमारी जिंदगी को जिंदगी कहलवाने के लिए क्या नहीं करते... हम पढ़ाई करते हैे, नौकरी करते है, शादी करते है, बच्चे पैदा करते है, उन्हें पढ़ाते है, सबकी जिम्मेदारी निभाते है, सबकी छोटी-छोटी जरुरीयतो का ख्याल रखते है, हम वह सब कुछ करते है जो एक जिंदगी को जिंदगी कहलवाने के लिए काफ़ी है... लेकिन... अंत में फिर भी हम अपनी जिंदगी को जिंदगी बनाने में नाकाम ही रहे... क्योंकि हम दूसरों की जिंदगी की कॉपी करने के चककर में... हम जिंदगी को अपनी जिंदगी में कॉपी करना भूल ही गए...