खौलती चाय जैसे , इश्क मेरे रगों में हो
बेचैन धुवां जैसे, हलचल धड़कनों में हो
आ जा ना संभाल लो आगोश में लेकर
दहकती आग जैसे , मेरे जवान बदन में हो
तेरे आने से साँसों में चिंगारी-सी उठे,
तेरी चाहत की तपिश मेरी हर छुअन में हो।
लब खामोश रहें, आँखें सब कुछ कह जाएँ,
ऐसी शिद्दत-ए-मोहब्बत मेरी नयन में हो।
रात महके तेरी जिस्म की खुशबू से इस क़दर,
जैसे सावन की पहली बारिश रुदन में हो।
तू छू ले तो मेरी रूह भी दहकने लगे,
तेरे इश्क़ की हरारत मेरी नशेमन में हो।
हम मिलें तो ये आलम हो कि दुनिया भूल जाएँ,
बस तू मेरे पहलू में हो और चर्चा भुवन में हो।
✍️बेनी सागर