🌸मोहब्बत की रुस्वाई🌸
तूने ही तो ये दुनिया बसाई है,
फिर क्यों आँखों में दर्द उतर आई है।
चुना था मोहब्बत का रास्ता तुमने,
फिर सफ़र में क्यों ये रुसवाई है।
तेरे क़दमों में सजदा करता था हमदम तेरा,
अब ये शिकवा क्यों कि तू हरजाई है।
जिसे अपना समझकर उम्र गुज़ारी,
उसी ने आज दूरी क्यों बनाई है।
तेरी यादों से रोशन था मेरा घर,
अब हर तरफ़ क्यों तन्हाई है।
हमने तो वफ़ा को इबादत समझा,
फिर हिस्से में क्यों सिर्फ़ जुदाई है।
✍️बेनी सागर