बैंगन राजा, सब्जियों की भीड़ में
बैठा आंसू बहाय
बोला आलू - क्यूँ भाई,
किसकी याद आई?
कैसे आज आंख भर आई
रोते-रोते बैंगन बोला,
मैं क्यूँ रहता बेगाना।
बच्चे भी मुझसे चिढ़ते,
कोई ना मुझको खाना चाहे।
सब दीवाने हैं तुम्हारे
बिन तुम्हारे किसी को स्वाद ना आए।
मेरा तो नाम ही है बे-गुण
बोला आलू - अनमोल है हर कोई
सबका है अपना-अपना महत्व।
दिल छोटा नहीं करते,
अपनी तुलना नहीं किसी से करते।
पूर्ण नहीं है कोई जग में,
सभी एक-दूजे के पूरक रहते।
खुद को ना इतना छोटा समझो,
अपनी कीमत खुद पहचानो,
डॉ वंदना शर्मा