— ज़िंदगी का फलसफा —
कभी-कभी सच कहने से ज़्यादा, सच को सुनना अच्छा है,
तूफ़ान में आगे बढ़ने से बेहतर, खुद को रोकना अच्छा है।
हर बाज़ी जीतना ही ज़िंदगी का नाम नहीं होता,
भलाई जिसमें छुपी हो, वो हार मान लेना अच्छा है।
जहाँ दवा भी असर न करे किसी दर्द-ए-दिल पर,
वहाँ होंठों पर एक छोटी सी मुस्कान रख लेना अच्छा है।
-MASHAALLHA