पल
कुछ ठहर गए, कुछ पल गए कुछ खोटे थे, कुछ चल गए
कुछ को पकड़ा था हाथों में कुछ हाथों में से फिसल गए
फिर से मिल जाये बीता वक़्त हम पल दो पल को मचल गए
कुछ पलों से हमने दौड़ लगाई वो खुद से भी आगे निकल गए
पलों की सवारी रुकती कब है कुछ आज गए, कुछ कल गए
कुछ ठहर गए, कुछ पल गए कुछ खोटे थे, कुछ चल गए