कभी कभी
मन में सवाल उठता है
कोई इतना भी आवश्यक क्यों हो जाता है ..?
वो न मिले तो लगता है जैसे
कुछ भी तो नही मिला
जैसे उसके बिन सब अधूरा है
यहां तक की चलती हुई सांसें भी थमी थमी सी नजर आती हैं,
और ऐसे में वो कहीं से मिल जाए तो
मन करता है थोड़ा सा और
पा लूं उसे
जो पाया है कहीं छुपा लूं उसे
मृत पड़ती देह के लिए
उससे बस एक मुलाकात ही
संजीवनी बन जाती है,
बताओ ना आखिर क्यों कोई इतना आवश्यक हो जाता है..!!