राना लिधौरी'के हिंदी- दोहे नृत्य
मधुवन में जब कर रहे,मधुर नृत्य गोपाल।
सँग में नाचे राधिका, होते सभी निहाल।।
जहाँ नृत्य में भाव हो,बजते घुँघरु खूब।
साथी बनते एक से,दिखते सब महबूब।।
नृत्य कला प्राचीन है,नाच गए नटराज।
बहुत हुआ विख्यात है,दिखे न बैसा आज।।
सुंदर गायन कंठ से,हो घुँघरु की तान।
पैर नृत्य तब कर उठे,बूड़े और जवान।।
नृत्य कला सरकार भी,दे संरक्षण आज।
गुरू घराना चल रहे,रखें देश की लाज।।
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✍️ राजीव नामदेव"राना लिधौरी"
संपादक "आकांक्षा" पत्रिका
संपादक-'अनुश्रुति'त्रैमासिक बुंदेली ई पत्रिका
जिलाध्यक्ष म.प्र. लेखक संघ टीकमगढ़
अध्यक्ष वनमाली सृजन केन्द्र टीकमगढ़
नई चर्च के पीछे, शिवनगर कालोनी,
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