क्या शब्द ही हैं महत्वपूर्ण,
मौन का कोई अर्थ नहीं।
बोलकर प्रकट करना ही ज़रूरी,
संकेत स्वयं शब्दार्थ नहीं।।
मौन तो भावना को करता प्रकट,
क्या आंखें ही संकेत की भाषा नहीं।
दिल से ही दिल की राह होती है,
मौन पतझड़ में बसन्त का आगाज़ नहीं?
....हमारी कलम से
धन्यवाद-शिल्पी