तुम भी कुछ कम नही हो
दिदाए गिरिया तुम नम नही हो ?
तेरा दिल क्या पत्थर का है, मेरा दिल तो मोम सा है
बातें, यादें सब बस्ते है छोटे से एक टूटे दिल में,
तेरे आंसु क्या बहते नही हैं, कैसे कुछ कहते नही हैं?
दुनिया सारी रो पड़ती है, सुनकर वो सारे किस्से
जो चेहरा खुद सुनाता है, बहुत कुछ कह जाता है।
खुद तो मैं पत्थर हूं पर
चेहरा, दिल, धड़कन मेरे
केसे पत्थर बन जाते ये, आपबीती पर अपनी ही
चुप्पी क्या सह पाते ये?
कोई किसी से कम नही था
तुम भी कुछ कम नही हो
दिदाए गिरिया क्या तुम नम नही हो ?