इश्क किया था पूरी शिद्दत से, रूह की गहराई उतारकर,
मगर किस्मत के पन्नों में सिर्फ अधूरापन लिख दिया गया।
वो साथ छूटा तो ऐसा लगा मानो सांसें चलती रहीं,
मगर अंदर का कोई हिस्सा हमेशा के लिए खामोश हो गया।
जिसे चाहा था अपनी दुआओं में हर पल शिद्दत से,
वही शख्स जिंदगी भर की एक बेनाम हसरत बन गया।
मिलने की आस में आँखें आज भी उसी रास्ते पर ठहरती हैं,
जहाँ से कभी मोहब्बत ने रुख मोड़ लिया था।