तुम मुझे यू रुलाने की जिद लगाए बैठे हो,
हम तेरी मुस्कुराहट को दिल से लगाए बैठे हैं।
तुम्हें जिद है कि मैं अपनी मोहब्बत का इज़हार न करूँ,
हमें सुकून मिलता है इज़हार-ए-इश्क़ में।
मैं तुम्हें पा नहीं सकता इस दुनिया में,
पर दिल से हट जाओ, यह इजाजत भी न देंगे तुमको।
तुम सपनों में भी न आने की कसम खाते हो,
हम जगती आँखों में तुमको बसाए बैठे हैं।
तुम इस जीवन में एक बार भी न मिलो मुझसे,
पर दिल वाली दुनिया में हम तुमको साथी बनाए बैठे हैं।
तुम्हारी बेरुखी के पहरे अब और सख्त हो गए हैं,
मगर इन दूरियों से हमारे हौसले कब कम हुए हैं?
माना कि लकीरों में तुम्हारा साथ लिखा नहीं,
पर हम अपनी तकदीर से बगावत कर आए बैठे हैं।
जिंदगी में न मिल सको हमसे तो कोई बात नहीं,
पर मौत के बाद एक बार छू के चली जाना मुझको।
जब रूह इस जिस्म के पिंजरे को हमेशा के लिए छोड़े,
बस उस आखिरी सफर में तुम मेरा हाथ थाम लेना,
ताकि दुनिया की हर अधूरी हसरत वहीं पूरी हो जाए