मेरी हिंदी भाषा
मधुरता वाणी में टपकती
हिंदी में जब कोई बात करें
अपनापन दिल को छू जाता
भाषा की शालीनता और गरिमा
उसे मधुर बनाती है
छेड़ देती तार झंकृत हृदय के
मेरी हिंदी भाषा जब मुखरित होती है
शब्द दिल को छू जाते
गहराई से बात जो हिंदी कहती है
हिंदी में जो अपनापन है रिश्तों का
मामा, चाचा, ताऊ, मौसी, बुआ
सबका लाड मिलता, खास लगता
अन्य किसी भाषा में वो बात कहां
प्रेम व्यक्त करे जो हिंदी जैसा
बड़े का सम्मान, रिश्तों की मर्यादा
भाषा हिंदी सबको जोड़े
बांध नेह का धागा
भावनाओं में बहती रस धार है हिंदी
दिल को दिल से जोड़े, मधुर राग है हिंदी
रिश्तों की सूत्रधार है भाषा हिंदी
डॉ वंदना शर्मा नई दिल्ली