ना मंजिल की प्यास थी, ना तेरे मिलने की आस थी...
तुझमे बातें थी, जो कुछ खास थी....
कैसे भूल जाए उन यादों को, जो जीने की आस थी....
ना हफ़्ते ना महिने, ना कुछ सालों का था वो सफ़र,
जो भूल जाऊ तेरी यादें.....
हर लम्हा सदियों सा था जो जिये हैं तेरे साथ....
अब तो मरने के बाद भी रूह से लिपटी रहेगी तेरे मेरे सफ़र की वो सुनहरी यादें।।
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क्योंकि कुछ रिश्ते ख़त्म हो जाते हैं,
मगर उनकी यादें कभी नहीं खत्म होती।
- Anita