जीवन का सत्य
बीता हुआ समय बताता है,
गलतियाँ हमारी
हमारा आज नींव हैं,
हमारे भविष्य की।
जिन्हें हम यूँ ही
सोते-बैठते,
खाते-पीत
बीता रहे हैं।
मानो यूँ ही
पैसा गँवा रहे हैं।
सुना था हमने भी,
जो व्यक्ति होते हैं अनुशासित,
करते हैं मेहनत,
वे जीवन की आधारशिला पार कर जाते हैं।
अक्सर एक सवाल
मेरे मन में आता है—
क्या यही नियम है?
क्या यही सच है?
हमने भी देखा है उन्हें,
जो अनुशासित तो थे,
पर कामयाब न हो पाए।
जब मैंने
इस विषय पर सोचा,
तब समझ आया—
क्या पता,
उन्होंने अपनी रुचि के विपरीत जाकर
या कठिनाइयों से विवश होकर
वह रास्ता चुना हो।
तब एक सबक मिला—
जीवन में वही राह चुननी चाहिए,
जिसे मन भी स्वीकार करे
और निर्णय भी सोच-समझकर लिया जाए।
— दीपांशी गर्ग ✍️