“ इश्क़ में तेरे
चाहत हैं मेरी
रहेगा वफ़ा - ए इश्क़
अगर इजाज़त हो तेरी
तू चाहे तो इंकार कर और
तू चाहे तो इज़हार कर पर
मैं चाहूँ तुझे ही और
ग़र तू भी कर सके तो
सिर्फ़ और सिर्फ़
मुझे ही प्यार कर
इश्क़ मेरा सच्चा हैं इतना कि
तुझे आना ही पड़ेगा
आज नहीं तो कल
तुझे मेरा होना ही पड़ेगा
पास हैं तू मेरे इतने कि
दूर हो ही नहीं सकता
मोहब्बत - ए - इश्क़ को मेरी यू रुसवा ना कर
आँखों की गहराइयों में देख तो जरा
दिखती हुई तन्हाइयों में मिलेंगी शिकायते तेरे लिए ही “