26/01/2026
आजादी की नई किरण
आजादी की नई किरण
जब तिरंगा से उतरी
तब मिट्टी ने पहचाना उसे
और इतिहास आंख खोल दी
संविधान की स्याही में
जनता की सांस बसी है
हर शब्द में समानता
हर पंक्ति में न्याय की लौ जलती है।
यह आजादी कोई उत्सव नहीं
रोज निभाने की वचन है
जहां मत अलग हो सकता है
मगर मन सबका एक जैसा है।
किसानों की हाथों में
किस्मत की लकीर चमकता है,
हर विद्यार्थी के कलम से
नया भारत आकर लेता है।
हिंदू मुस्लिम यहां भाई भाई
देखते नहीं किसी का जात और धर्म
सभी एक साथ नारा लगाएं
“वंदे मातरम वंदे मातरम।”