अगर मैं गिरा तो प्रेम में गिरा
झुका तो सामने प्रेम खड़ा था।
अगर मैं अनैतिक हुआ तो प्रेम में हुआ,
समझौते हुए होंग तोे प्रेम बचाने के लिए
लोगो से चालाकियां की तो प्रेम पाने के लिए।
अगर मैं नालायक बना था तो
इसलिए कि प्रेम के लायक बन सकूँ।
जब लोग असरदारों के सामने झुक रहे थे
और अपनी तरफ़दारियाँ चुन रहे थे,मैं प्रेम में था।
मुझे इसके लिए आज भी लज्जित किया जाता है
शुक्र है मैं बदनाम दुनियादारी के लिए नहीं।